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कर्मशियल जहाजों पर हमला स्वीकार नहीं, होर्मुज को लेकर UN में भारत की दो टूक

जनरल असेंबली की मीटिंग में वीटो पर बोलते हुए भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने कहा कि भारत के लिए अपनी एनर्जी और आर्थिक सुरक्षा के लिए खास चिंता की बात होर्मुज स्ट्रेट से कमर्शियल शिपिंग है.

कर्मशियल जहाजों पर हमला स्वीकार नहीं, होर्मुज को लेकर UN में भारत की दो टूक
भारत ने कमर्शियल शिपिंग को सैन्य हमलों का निशाना बनाने पर दुख जताया.
  • भारत ने UN की जनरल असेंबली की मीटिंग में होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग पर हमलों को लेकर चिंता जताई.
  • भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने कहा कि हमने सभी देशों से डिप्लोमेसी को बढ़ावा देने की अपील की है.
  • उन्होंने कहा कि भारत इस बात पर दुख जताता है कि लड़ाई में कमर्शियल शिपिंग को सैन्य हमलों का निशाना बनाया गया.
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भारत ने होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग पर हमलों पर चिंता जताई है. वहीं दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के विरुद्ध लाए गए प्रस्ताव पर रूस और चीन द्वारा वीटो करने के मामले में भारत ने किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं किया और तटस्थ रहने का फैसला किया है. गुरुवार को जनरल असेंबली की मीटिंग में वीटो पर बोलते हुए भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने इस मुद्दे पर कहा, “हमने सभी देशों से बातचीत और डिप्लोमेसी को बढ़ावा देने और तनाव कम करने और असल मुद्दों को सुलझाने की अपील की है.” साथ ही उन्‍होंने सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की भी अपील की. 

यह मीटिंग असेंबली के एक प्रोसेस के तहत बुलाई गई थी, जिसके तहत जो स्थायी सदस्य किसी प्रस्ताव पर वीटो करते हैं, उन्हें दस दिनों के अंदर अपने कामों के बारे में बताने के लिए उसके सामने पेश होना होता है. 

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रूस और चीन ने लगाया था वीटो 

7 अप्रैल को रूस और चीन ने काउंसिल के चुने हुए सदस्य बहरीन के पेश किए गए प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया. इस प्रस्ताव में ईरान से कमर्शियल शिपिंग पर हमले रोकने और नेविगेशन की आजादी में रुकावट न डालने की मांग की गई थी. 

रूस और चीन ने असेंबली में अपने वीटो का बचाव किया, जबकि अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों ने कई दूसरे देशों के साथ मिलकर वीटो की आलोचना की. अपने छोटे, 90-सेकंड, 198-शब्दों के बयान में हरीश दोनों पक्षों से दूर रहे, लेकिन स्ट्रेट में नेविगेशन की आजादी पर भारत की स्थिति साफ कर दी. 

कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाने पर जताया दुख

उन्होंने कहा, “भारत के लिए अपनी एनर्जी और आर्थिक सुरक्षा के लिए खास चिंता की बात होर्मुज स्ट्रेट से कमर्शियल शिपिंग है.” यह स्ट्रेट दुनिया भर के तेल ट्रैफिक के 20 फीसदी के लिए चोकपॉइंट है और इसके रुकने से भारत पर असर पड़ा है. 

उन्होंने आगे कहा, “भारत इस बात पर दुख जताता है कि इस लड़ाई में कमर्शियल शिपिंग को सैन्य हमलों का निशाना बनाया गया. इस लड़ाई के दौरान जहाजों पर सवार भारतीय नाविकों की कीमती जानें गईं.”

उन्होंने कहा, “हम फिर से कहते हैं कि कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना और बेकसूर सिविलियन क्रू मेंबर्स को खतरे में डालना या होर्मुज स्ट्रेट में नेविगेशन और कॉमर्स की आजादी में रुकावट डालना मंजूर नहीं है. इस बारे में अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए.”

28 फरवरी को इजरायल-अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट में जहाजों पर हमला किया, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरानी पोर्ट्स पर नेवल ब्लॉकेड लगा दिया. 

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बहरीन के प्रस्‍ताव का सह-प्रायोजक था भारत 

भारत ने वीटो को लेकर भले ही तटस्थ रुख अपनाया हो, लेकिन उसने 11 मार्च को बहरीन द्वारा पेश किए गए उस प्रस्ताव का सह-प्रायोजक बनने का फैसला किया था, जिसमें ईरान के मध्य पूर्व के पड़ोसी देशों पर हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की गई थी. 

इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 13-0 मतों से पारित किया गया, जबकि रूस और चीन ने मतदान में हिस्सा नहीं लेते हुए इसे बिना वीटो के पास होने दिया. 

पिछले हफ्ते प्रस्ताव पर वीटो को लेकर रूस की उपस्थायी प्रतिनिधि एना एम इवेस्टिग्नीवा ने कहा कि यह एकतरफा था और इसने इजरायल और अमेरिका की उन कार्रवाइयों को अनदेखा कर दिया जिनकी वजह से लड़ाई शुरू हुई. 

उन्होंने कहा कि इससे लड़ाई जारी रखने और उसे बढ़ाने के लिए बिना शर्त मंजूरी मिल जाती है. चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू कांग ने कहा कि बीजिंग बहरीन और खाड़ी देशों की बड़ी चिंताओं को समझता है, लेकिन उसने प्रस्ताव पर वीटो इसलिए किया क्योंकि इससे अनऑथराइज्ड सैन्य ऑपरेशन को सही साबित करने का दिखावा होता. 

चीन-रूस ने जानबूझकर आंखें बंंद की: अमेरिका 

खाड़ी देशों और जॉर्डन की तरफ से बोलने वाले कुवैत के स्थायी प्रतिनिधि तारिक एमएएम अल्बनई ने उस प्रस्ताव पर वीटो लगाने की आलोचना की, जो “अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक साफ और सीधे खतरे से जुड़ा था."

उन्होंने कहा कि खाड़ी देश आम सहमति के लिए बड़े पैमाने पर बातचीत के आधार पर एक और प्रस्ताव पेश करेंगे. 

अमेरिका के स्थायी प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने कहा कि चीन और रूस ने जानबूझकर आंखें बंद कर ली और इससे भी बुरा, ईरान की ओर से अपने पड़ोसियों पर हमलों, अपने ही लोगों के खिलाफ उसके आतंक और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उसके जानलेवा कब्जे को रोकने की कोशिश को होने दिया. 

उन्होंने ईरान पर आरोप लगाया कि वह फर्टिलाइजर समेत जरूरी शिपमेंट को बुआई के मौसम में दक्षिण एशिया पहुंचने से रोककर खाद्य संकट पैदा कर रहा है. उन्होंने कहा, “यह साफ है कि किसने जिम्मेदारी के बजाय रुकावट को चुना.”
 

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