
रूस के परमाणु पनडुब्बी निर्माण केंद्र सेवमेश शिपयार्ड में विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य को नौसेना शामिल करने के लिए आज रात यहां पहुंचेंगे।
रूस के पूर्व कीव श्रेणी के विमानवाही पोत (पूर्व नाम एडमिरल गोर्शकोव) को भारत को सौंपे जाने के समारोह में रूसी प्रधानमंत्री दमित्रि रोगोजिन तथा दोनों देशों की सरकारों एवं नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद होंगे। इस पोत का परियोजना 114430 के तहत 2.3 अरब डालर की लागत पर उन्नयन किया गया है।
करीब नौ वर्ष की बातचीत के बाद पोत में पुराने पुर्जे हटाकर नए लगाने तथा 16 मिग.29, के:यूबी डेक आधारित लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए वर्ष 2004 में 1.5 अरब डॉलर का शुरुआती अनुबंध हुआ। 1998 में गतिरोध समाप्त करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री येवगेनी प्रिमाकोव की सरकार ने भारत को मुफ्त में देने की पेशकश की थी बशर्ते वह इसकी मरम्मत और आधुनिकीकरण का खर्चा दे दे।
यद्यपि कार्य के प्रारंभिक मूल्यांकन में जरूरी परिश्रम की कमी के चलते उसकी कीमत काफी बढ़ गई, जिससे उसकी मरम्मत और आधुनिकीकरण का काम रुक गया।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं