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अमेरिका का ये शख्स बीस साल से सांपों से कटवा रहा, अब खून ही बन गई दवा...जानें कैसे?

Snake Anti Venom: टिम फ्राइड का खून वैज्ञानिकों के लिए वरदान साबित हुआ. वैज्ञानिकों का मानना था कि अगर दुनिया में किसी के खून में 'ब्रॉडली न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज' (ऐसी एंटीबॉडीज जो जहर के हर प्रकार पर हमला करें) हो सकती हैं, तो वह टिम हैं.

अमेरिका का ये शख्स बीस साल से सांपों से कटवा रहा, अब खून ही बन गई दवा...जानें कैसे?

अमेरिका का एक शख्स पिछले 20 साल से मौत के साथ एक खतरनाक खेल खेल रहा है. वह खुद को दुनिया के सबसे जहरीले सांपों से कटवाता है और शरीर में जहर के इंजेक्शन लगवाता है. मकसद पागलपन नहीं, बल्कि मानवता को सांप के जहर से बचाने वाली एक ऐसी दवा (यूनिवर्सल एंटी-वेनम) तैयार करना है, जो दुनिया के किसी भी सांप के काटने पर जान बचा सके.

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, विस्कॉन्सिन के रहने वाले टिम फ्राइड एक पूर्व ट्रक मैकेनिक हैं. उन्होंने पिछले दो दशकों में 200 से ज्यादा बार सांपों से खुद को कटवाया है. इतना ही नहीं, उन्होंने ब्लैक मांबा, कोबरा और ताइपन जैसे दुनिया के सबसे घातक सांपों के जहर के करीब 700 इंजेक्शन खुद को लगाए हैं. टिम का शरीर अब एक 'फैक्ट्री' बन चुका है, जो जहर के खिलाफ खुद ही एंटीबॉडीज तैयार करता है.

शुरुआत में टिम का मकसद केवल सांपों को हैंडल करते समय अपनी सुरक्षा के लिए इम्यूनिटी बढ़ाना था. लेकिन इस प्रक्रिया में उन्होंने कई बार अपनी जान जोखिम में डाली. एक बार तो दो कोबरा सांपों के लगातार काटने के बाद वे कोमा में चले गए थे. हालांकि, बाद में उन्होंने इसे एक मिशन बना लिया ताकि दुनिया भर में हर साल सांप के काटने से मरने वाले करीब 1,40,000 लोगों की जान बचाई जा सके.

अब इंसानी खून से बनेगी दवा

आमतौर पर एंटी-वेनम बनाने के लिए जहर की हल्की खुराक घोड़ों या अन्य जानवरों के शरीर में डाली जाती है. फिर उनके शरीर में पैदा होने वाली एंटीबॉडीज को निकालकर दवा बनाई जाती है. लेकिन इसकी एक बड़ी समस्या यह है कि हर सांप के जहर के लिए अलग एंटी-वेनम की जरूरत होती है. भारत के सांप पर जो दवा असर करती है, जरूरी नहीं कि वह श्रीलंका या म्यांमार के उसी प्रजाति के सांप पर कारगर हो.

यहीं पर टिम फ्राइड का खून वैज्ञानिकों के लिए वरदान साबित हुआ. बायोटेक कंपनी 'सेंटिवैक्स' के सीईओ डॉ. जैकब ग्लैनविले को जब टिम के बारे में पता चला, तो उन्होंने उनसे संपर्क किया. वैज्ञानिकों का मानना था कि अगर दुनिया में किसी के खून में 'ब्रॉडली न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज' (ऐसी एंटीबॉडीज जो जहर के हर प्रकार पर हमला करें) हो सकती हैं, तो वह सिर्फ टिम हैं.

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लैब टेस्ट में मिली सफलता

वैज्ञानिकों ने टिम के खून के नमूनों पर रिसर्च की और उनका ध्यान 'एलापिड' परिवार के सांपों पर रहा, जिनमें कोबरा, मांबा और करैत शामिल हैं. इन सांपों का जहर 'न्यूरोटॉक्सिक' होता है, जो सीधे इंसान के नर्वस सिस्टम पर हमला करता है और फेफड़ों की मांसपेशियों को सुन्न कर देता है, जिससे सांस रुकने से मौत हो जाती है.

तमाम रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने टिम के खून से दो ऐसी शक्तिशाली एंटीबॉडीज खोजीं, जो जहर के मुख्य हिस्सों को बेअसर कर सकती हैं. जब चूहों पर इसका परीक्षण किया गया, तो यह 'कॉकटेल' दवा 19 सबसे घातक प्रजातियों में से 13 के खिलाफ पूरी तरह प्रभावी रही, जबकि बाकी 6 प्रजातियों के खिलाफ भी इसने सुरक्षा दिया.

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चंदन सिंह राजपूत
Senior Sub Editor
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