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अमेरिका की 'आसमानी आंख' तबाह, देखिए ईरान के एक हमले ने US के इस खास विमान की क्या हालत कर दी

प्रिंस सुल्तान एयर बेस पश्चिम एशिया में अमेरिकी वायु अभियानों का एक प्रमुख केंद्र है. यह बेस खुफिया जानकारी जुटाने, हवाई ईंधन‑भराई और हमलों के समन्वय जैसी कई महत्वपूर्ण मिशनों का समर्थन करता है.

अमेरिका की 'आसमानी आंख' तबाह, देखिए ईरान के एक हमले ने US के इस खास विमान की क्या हालत कर दी
e3 awacs plane
  • अमेरिका और इजरायल की संयुक्त युद्ध योजना ईरान में सत्ता परिवर्तन और आजादी के वादे के बावजूद सफल नहीं रही
  • 27 मार्च को ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले में सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस को बड़ा नुकसान पहुंचा
  • हमले में अमेरिकी E-3 सेंट्री AWACS विमान और एयरियल रिफ्यूलिंग टैंकर सहित कई सैन्य विमान क्षतिग्रस्त हुए
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नई दिल्ली:

अमेरिका जिस जंग को इजरायल के साथ मिलकर जीतने के ख्वाब देख रहा था, वह इतनी भी आसान रही नहीं. ईरान की सत्ता को पलटने और वहां के लोगों को कथित आजादी का वादा कर चुके अमेरिका के लिए वहां की फोर्स से पार पाना इतना आसान भी नहीं रहा. अमेरिका ने भी इस युद्ध में काफी नुकसान कराया है. इनमें एक अमेरिकी E‑3 सेंट्री AWACS विमान भी है जिसकी तस्वीरें जारी हुई हैं. सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस से AWACS विमान की तस्वीर उसके नुकसान की कहानी बयां कर रही है. अमेरिका के इस सबसे खास विमान को अमेरिका की 'आंख' कहा जाता था.

27 मार्च के हमले में हुआ था नुकसान

27 मार्च को ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, जिसका निशाना सऊदी अरब में स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस था.  इस हमले में कई अमेरिकी सैनिक घायल हुए और महत्वपूर्ण सैन्य विमानों को नुकसान पहुंचा था.जिनमें एक अमेरिकी E‑3 सेंट्री AWACS विमान और एयरियल रिफ्यूलिंग टैंकर भी शामिल था. 

विमान में क्या खास था?

E-3 सेंट्री (AWACS) एक बोइंग 707 आधारित उड़ता हुआ कमांड सेंटर है, जो हवा में 360-डिग्री निगरानी, लक्ष्य को पहचाना और युद्ध प्रबंधन की अनूठी क्षमता रखता है. यह 30,000 फीट से अधिक की ऊंचाई से 320 किमी से अधिक दूर के हवाई-समुद्री टार्गेट(Air-Sea Targets) को ट्रैक कर सकता है.यह दुश्मन के कम ऊंचाई वाले विमानों को भी खोज लेता है. यह 8-11 घंटे तक लगातार उड़ान भर सकता है.इसमें एक बड़ा, घूमता हुआ रडार गुंबद (Rotodome) होता है जो हर दिशा में नजर रख सकता है. यह जमीन या समुद्र की सतह पर मौजूद बाधाओं के बावजूद कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लक्ष्यों की सटीक पहचान करता है.

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यह बिना रुके यह 8 घंटे से अधिक समय तक हवा में रह सकता है, और ईंधन भरकर इसे 24 घंटे से अधिक समय तक सक्रिय रखा जा सकता है.यह न केवल दुश्मन का पता लगाता है, बल्कि मित्र राष्ट्रों के लड़ाकू विमानों, जहाजों और जमीनी बलों को रीयल-टाइम डेटा भेजकर युद्ध को नियंत्रित (battle management) भी करता है. यह आधुनिक इंफ्रारेड (IR) गाइडेड मिसाइलों से खुद को बचाने के लिए दिशात्मक इंफ्रारेड काउंटरमेजर (DIRCM) सिस्टम से लैस है. 

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अमेरिकी प्रवक्ता ने नहीं दिया कोई जवाब 

हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड के एक प्रवक्ता ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.  शुरुआती आकलन बताते हैं कि निगरानी और रीफ्यूलिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले कई विमान इस हमले से प्रभावित हुए हैं. प्रिंस सुल्तान एयर बेस पश्चिम एशिया में अमेरिकी वायु अभियानों का एक प्रमुख केंद्र है. यह बेस खुफिया जानकारी जुटाने, हवाई ईंधन‑भराई और हमलों के समन्वय जैसी कई महत्वपूर्ण मिशनों का समर्थन करता है. E‑3 सेंट्री जैसे विमान हवाई निगरानी और कमान‑नियंत्रण में अहम भूमिका निभाते हैं, जबकि टैंकर विमान इस क्षेत्र में लड़ाकू विमानों की ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाने के लिए जरूरी होते हैं.

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ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 13 अमेरिकी सैन्य कर्मियों की मौत हो चुकी है,जिनमें से 7 की मौत खाड़ी क्षेत्र में और 6 की मौत इराक में हुई.इसके अलावा 300 से ज्यादा सैनिक घायल हुए हैं. ईरान की सरकार ने अभी तक नई हताहत संख्या जारी नहीं की है.लेकिन अमेरिका में स्थित एक कार्यकर्ता समूह ने 23 मार्च को दावा किया कि लगभग 1,167 ईरानी सैनिक मारे गए हैं और 658 सैनिकों की स्थिति अज्ञात है. 

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