- भारत ने चीन के नेतृत्व वाले विवादास्पद विकास निवेश सुविधा समझौते को WTO में शामिल करने का विरोध किया
- वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार यह समझौता विश्व व्यापार संगठन के मूलभूत सिद्धांतों को कमजोर करेगा
- WTO का 14वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन कैमरून के याउंडे में चल रहा है और यह सम्मेलन चार दिनों तक चलेगा
भारत ने विश्व व्यापार संगठन में पिछले दरवाजे से निवेश समझौते के जरिये दबदबा बनाने की चीन की चाल का खुला विरोध किया है. डब्ल्यूटीओ में ज्यादातर देशों की चुप्पी के बीच भारत ने स्पष्ट तौर पर चीन के समर्थन वाले इनवेस्टमेंट एंग्रीमेंट को गलत बताया. कैमरून में अंतरमंत्रालयी बैठक के दौरान भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि विकास हेतु निवेश सुविधा (IFD) समझौता डब्ल्यूटीओ की ताकत पर असर डालेगा और उसके बराबरी वाले सिद्धांतों के खिलाफ होगा.
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि आईएफडी समझौते को शामिल करने से विश्व व्यापार संगठन की कार्यात्मक सीमाएं कमजोर होंगी और इसके मूलभूत सिद्धांतों को नुकसान पहुंचेगा. यह बात भारत ने कैमरून के याउंडे में चल रहे विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में कही.

संगठन के मूल सिद्धांतों पर सवाल
चार दिवसीय मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (एमसी) 29 मार्च को समाप्त होगा. मंत्रिस्तरीय सम्मेलन डब्ल्यूटीओ का निर्णय लेने वाला सर्वोच्च निकाय है. इसकी बैठक हर दो साल में होती है. विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) जिनेवा स्थित 166 सदस्यीय निकाय है जो वैश्विक व्यापार संबंधी मुद्दों का निपटान करता है. यह सदस्य देशों के बीच विवादों का निपटारा भी करता है. भारत 1995 से इसका सदस्य है. डब्ल्यूटीओ सुधार विकसित देशों, विशेष रूप से अमेरिका द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा एक प्रमुख एजेंडा है. भारत इसका समर्थन कर रहा है. लेकिन उसने कहा है कि संगठन के मूल सिद्धांतों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए. डब्ल्यूटीओ का संचालन इसके सदस्य देशों की सरकारों द्वारा किया जाता है. सभी प्रमुख निर्णय सदस्य देशों द्वारा सामूहिक रूप से लिए जाते हैं. ये निर्णय या तो मंत्रियों द्वारा (जिनकी बैठक कम से कम हर दो साल में एक बार होती है) या उनके राजदूतों या प्रतिनिधियों द्वारा (जिनकी नियमित बैठक जिनेवा में होती है) लिए जाते हैं. निर्णय सामान्यतः सर्वसम्मति से लिए जाते हैं.
वैश्विक व्यापार में समानता और संतुलन सुनिश्चित करना जरूरी
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि विश्व व्यापार संगठन में सबकी सहमति से होने वाली निर्णय प्रक्रिया, सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) नियम और विशेष एवं अलग व्यवहार वैश्विक व्यापार में संतुलन सुनिश्चित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मूलभूत सिद्धांतों को बनाए रखने की आवश्यकता बताई. उन्होंने सोशल मीडिया मंच पर लिखा, "संगठन के मूलभूत सिद्धांतों, विशेष रूप से सर्वसम्मति आधारित निर्णय प्रक्रिया, एमएफएन नियम आधारित व्यापार और विशेष एवं अलग व्यवहार को बनाए रखना जरूरी है, जो वैश्विक व्यापार में समानता और संतुलन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं."
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विरोध की मूल वजह आखिर है क्या?
दरअसल, भारत ने आईडीएफ को डब्ल्यूटीओ के नियमों में ‘Annex 4' के तहत शामिल करने से साफ मना कर दिया. बता दें कि Annex 4 में ऐसे समझौते आते हैं, जो सभी देशों पर लागू नहीं होते. ये उन्हीं देशों पर लागू होते हैं, जो उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार हो जाते हैं. ये समझौते विशिष्ट व्यापारिक मुद्दों पर केंद्रित होते हैं, जैसे कि सरकारी खरीद या नागरिक विमान व्यापार. ये समझौते विशिष्ट नियम और शर्तें प्रदान करते हैं जो सदस्य देशों को पालन करना होता है. आईडीएफ एक ऐसा प्रस्ताव है, जिसे 2017 में चीन और कुछ अन्य देशों ने शुरू किया था. इसका मकसद निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाना है, लेकिन भारत को लगता है कि इससे सभी देशों के लिए बराबरी का माहौल नहीं रहेगा.
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भारत की दो टूक, सुधार के लिए तैयार, लेकिन...!
भारत ने साफ-साफ शब्दों में अपनी बात रख दी है कि वह डब्ल्यूटीओ में सुधार को लेकर बातचीत के लिए हमेशा तैयार है. हालांकि, किसी भी नए समझौते को लागू करने से पहले उसके नियम, सुरक्षा और प्रभाव पर चर्चा होनी चाहिए. जिससे सभी देशों के हितों की रक्षा हो सके. इससे पहले डब्ल्यूटीओ के 13वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भी भारत ने इस आईएफडी समझौते का कड़ा विरोध किया था और अब एक बार फिर इसका सख्त विरोध कर भारत ने अपना रुख दुनिया के सामने साफ कर दिया है.
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