- अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास पर मिसाइल हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने का दावा किया
- अमेरिका ने 2001 में अफगानिस्तान और 2003 में इराक पर आक्रमण कर आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक युद्ध शुरू किया
- अमेरिका ने 2011 में पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन को मार गिराया जो अलकायदा का प्रमुख था
अमेरिका ने वेनेजुएला के साथ जारी तनाव के बीच राजधानी काराकास पर बड़े पैमाने पर मिसाइल से हमला किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया है. ट्रंप ने पहले कई बार वेनेजुएला के राष्ट्रपति को हटाने की अपनी रणनीति के तहत वहां ग्राउंड ऑपरेशन की संभावना के बारे में चेतावनी दी थी. साथ ही दबाव बनाने के लिए कई प्रतिबंध भी लगाए थे. हालांकि ये पहली बार नहीं है, जब अमेरिका ने ऐसे किसी देश पर हमला किया हो, हाल के दशको में अफगानिस्तान और इराक के अलावा उसके ऐसे आक्रमण का एक लंबा इतिहास रहा है.
ट्रंप ने वेनेजुएला पर बैन बढ़ाया और इलाके में अमेरिकी सेना की मौजूदगी बढ़ाई, साथ ही कैरिबियन व पैसिफिक में जहाजों पर ड्रग ट्रैफिकिंग का आरोप लगाया. कैरेबियन सागर में बीते समय में अमेरिकी सेना की कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई थी.
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इससे पहले सीआईए ने पिछले साल दिसंबर 2025 में वेनेजुएला के तट पर एक डॉक फैसिलिटी पर ड्रोन हमला किया था. सूत्रों ने बताया कि इस हमले में एक दूर के डॉक को निशाना बनाया गया था, जिसके बारे में अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि इसका इस्तेमाल वेनेजुएला का एक गैंग ड्रग्स स्टोर करने और उन्हें शिपमेंट के लिए नावों पर भेजने के लिए कर रहा था.
वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के बाद आक्रामक हुआ अमेरिका
अमेरिका अपने दुश्मनों को दुनिया के किसी भी कोने से ढूढकर निकालने और बदला लेने के लिए जाना जाता है. 2001 में 11 सितंबर को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के बाद तो ये रफ्तार और भी बढ़ गई. तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के नेतृत्व में , अमेरिका और नाटो ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक युद्ध शुरू किया. पारंपरिक जमीनी हमलों के साथ-साथ, आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में अमेरिकी सेना और खुफिया समुदाय ने अपनी युद्ध क्षमताओं को और विकसित किया, जिसके तहत अफगानिस्तान , पाकिस्तान , यमन और सोमालिया सहित विभिन्न देशों में संदिग्ध आतंकवादी समूहों और उनके नेतृत्व के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए.

अमेरिका अघोषित युद्ध के लिए भी जाना जाता है. कहा जाता है कि संयुक्त राष्ट्र से मान्यता प्राप्त 194 देशों में से अमेरिका कभी ना कभी, अब तक 84 देशों पर हमला कर चुका है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी ने इतिहास में अब तक केवल 11 बार ही औपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा की है, जिसमें अंतिम बार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1942 में घोषणा हुई थी.
अमेरिका का अफगानिस्तान पर हमला
अमेरिका ने अक्टूबर 2001 में अफगानिस्तान पर आक्रमण किया और तालिबान सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया. उसे इस बात का शक था कि तालिबान सरकार अल-कायदा को संरक्षण दे रही है. दिसंबर 2009 में, राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की तैनाती और बढ़ाने का आदेश दिया और अल-कायदा और तालिबान विद्रोह से लड़ने के लिए अतिरिक्त 30,000 सैनिकों को तैनात किया. 2021 तक वहां अमेरिकी और नाटो के आतंकवाद विरोधी और विद्रोह विरोधी अभियान जारी रहे, इसके बाद तालिबान ने, देश से अमेरिकी नेतृत्व में हुई बातचीत के बाद वापसी के दौरान अफगानिस्तान पर फिर से नियंत्रण कर लिया. अफगान युद्ध में 2,400 से अधिक अमेरिकी, 18 सीआईए एजेंट और 1,800 से अधिक नागरिक मारे गए. ये यूएसए के इतिहास का सबसे लंबा युद्ध बन गया, जो 19 साल और 10 महीने तक चला. अमेरिका के इसमें 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक खर्च भी हुए.

हालांकि "ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम" (ओईएफ) आमतौर पर अफगानिस्तान युद्ध के 2001-2014 चरण को संदर्भित करता है , यह शब्द आतंकवाद के खिलाफ युद्ध के लिए अमेरिकी सेना का आधिकारिक नाम भी है, और इसमें कई अधीनस्थ अभियान शामिल हैं जिनके तहत आतंकवाद से लड़ने के नाम पर दुनिया भर के क्षेत्रों में अमेरिकी सैन्य बलों को तैनात किया जाता है, अक्सर मेजबान राष्ट्र की केंद्रीय सरकार के साथ सुरक्षा सहयोग और बलों की स्थिति समझौतों के माध्यम से सहयोग किया जाता है ।
- ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम के तहत अमेरिका ने इथियोपिया, केन्या, लाइबेरिया, मॉरीशस, रवांडा, सेशेल्स, सोमालिया, तंजानिया, और युगांडा में सेनाएं तैनात कीं
- अल्जीरिया, बुर्किना फासो, कैमरून, चाड, माली, मॉरिटानिया, मोरक्को, नाइजर, नाइजीरिया, सेनेगल और ट्यूनीशिया में भी अमेरिकी सेना तैनात की गई
- कैंप लेमोनियर अफ्रीका में स्थायी अमेरिकी सैन्य अड्डा भी है, जिसकी स्थापना 2002 में जिबूती में की गई थी और यह ओईएफ-एचओए अभियानों का समर्थन करता है.
- राष्ट्रपति बराक ओबामा ने बोको हराम आतंकवादी समूह के खिलाफ खुफिया, निगरानी और टोही अभियान चलाने के लिए अक्टूबर 2015 में कैमरून में 300 अमेरिकी सैनिकों को तैनात किया.
फ्रांसीसी आतंकवाद-विरोधी प्रयासों का समर्थन करने के लिए अमेरिकी सेना ने 2013 में नाइजर में हस्तक्षेप किया. अक्टूबर 2017 में, नाइजर में इस्लामिक स्टेट के एक हमले में चार अमेरिकी विशेष अभियान सैनिक और पांच नाइजरी नागरिक मारे गए. उस समय नाइजर में लगभग 800 अमेरिकी सैन्यकर्मी मौजूद थे.

अमेरिका का इराक पर आक्रमण
2003 में अमेरिका ने राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को गद्दी से हटाने के लिए इराक पर आक्रमण किया और उस पर कब्ज़ा कर लिया. बुश प्रशासन ने सद्दाम हुसैन पर अल-कायदा से संबंध रखने और सामूहिक विनाश के हथियार (डब्ल्यूएमडी) रखने का आरोप लगाया. इराक युद्ध के दौरान 4,400 से अधिक अमेरिकी और सैकड़ों हजारों इराकी नागरिक मारे गए. ये लड़ाई आधिकारिक तौर पर 18 दिसंबर, 2011 को समाप्त हुआ. इराक से 2011 में अमेरिकी वापसी यूएस-इराक स्टेटस ऑफ फोर्सेज एग्रीमेंट के अनुसार थी.
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सीआईए के एजेंटों और अमेरिकी विशेष अभियान सैनिकों ने सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के खिलाफ लगभग 10,000 सीरियाई विद्रोही लड़ाकों को प्रशिक्षित और हथियारबंद किया. एक दशक से अधिक के गृहयुद्ध के बाद, बशर अल-असद को आखिरकार दिसंबर 2024 में एक अप्रत्याशित विद्रोही हमले के बाद उखाड़ फेंका गया, हालांकि इसके बाद भी अमेरिकी सेना सीरिया में बनी रही.
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2013-2014 में मध्य पूर्व में इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवेंट (आईएसआईएल/आईएसआईएस) आतंकवादी संगठन का उदय हुआ. जून 2014 में, ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व के दौरान, अमेरिका ने इराक में फिर से हमला किया और आईएसआईएल के खिलाफ हवाई हमले शुरू किए. इसके बाद सितंबर 2014 में सीरिया में आईएसआईएल पर और हवाई हमले किए गए.

ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में घुसकर मारा
अमेरिका ने न्यूयॉर्क में 11 सितंबर 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले के लगभग 10 साल बाद दो मई 2011 को आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के एबटाबाद से ढूढकर मौत के घाट उतार दिया. अमेरिका ने विश्वास के अभाव और आतंकवादियों से जुड़े मामले में पिछले अनुभवों की वजह से ओसामा बिन लादेन के ठिकाने की जानकारी पाकिस्तान से भी साझा नहीं की थी. ओसामा बिन लादेन अमेरिका का मोस्ट वांटेड आतंकवादी था और आतंकी संगठन अलकायदा का सरगना था. अमेरिकी नौसना की सील टीम ने एक गुप्त अभियान में उसे एबटाबाद के उसके घर में मार गिराया था.
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