- अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद मध्य पूर्व में युद्ध शुरू हुआ, जिससे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है
- युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट पर जहाज फंसे हैं, जो विश्व के लगभग एक तिहाई कच्चे तेल का मार्ग है
- बेंट क्रूड तेल की कीमतें 15 प्रतिशत बढ़कर लगभग 84 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं, जो जुलाई के बाद सबसे अधिक है
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद मध्य पूर्व में जबरदस्त तनाव है. लगभग एक हफ्ते से मध्य पूर्व में जंग चल रही है. इस नई जंग ने तेल और गैस पर भी नया संकट खड़ा कर दिया है. तेल और गैस के जहाज फंसे हुएहैं. इससे दुनियाभर में इनकी कीमतें बढ़ गई हैं. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद बेंट क्रूड की कीमत 15% बढ़कर लगभग 84 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है. यह जुलाई 2024 के बाद सबसे ज्यादा है.
इस संकट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर जंग लंबी चली तो हालात कैसे संभलेंगे? क्योंकि इस जंग से पूरी दुनिया के सामने तेल का संकट खड़ा हो गया है. इससे सीधे तौरे पर तेल के आयात पर असर पड़ेगा. क्योंकि जिस होर्मुज स्ट्रेट से तेल लेकर जहाज निकलते हैं, वहां पर हालात ठीक नहीं हैं. दुनियाभर का लगभग एक तिहाई कच्चा तेल यहीं से होकर गुजरता है.
लेकिन कब तक?
अभी तो जंग को हफ्ताभर ही हुआ है, इसलिए बहुत ज्यादा असर शायद अभी न दिख रहा हो. लेकिन जंग लंबी खींचती है तो निश्चित तौर पर तेल आयात पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा.
वह इसलिए भी क्योंकि कच्चे तेल और गैस का सबसे ज्यादा उत्पादन भी मध्य पूर्व में ही होता है. ईरान जंग के बाद सऊदी अरब, कतर, ईरान, इजरायल, इराक जैसे देशों में कई सारी रिफाइनरियों में तेल का उत्पादन बंद हो गया है.
अगर ऐसा होता है तो दुनियाभर में तेल का आयात प्रभावित होगा. ऐसे में सवाल उठता है कि बिना तेल आयात के कोई देश कितने दिन तक गुजारा कर सकेगा. रिपोर्ट्स बताती हैं कि अगर पूरी तरह से आयात ठप हो भी जाए तो जापान के पास 254 दिन तक का तेल रहेगा. इसका मतलब हुआ कि अगर 254 दिन तक भी जापान को कच्चा तेल न मिले तो भी उस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

भारत का क्या?
रिपोर्ट्स की मानें तो जिस अमेरिका ने ये युद्ध शुरू किया है, कच्चे तेल के आयात के बगैर वह 200 दिन ही टिक सकता है. वहीं, साउथ कोरिया के पास 214 दिन तक रिजर्व है.
जर्मनी के पास 130, फ्रांस के पास 122, यूके के पास 120, न्यूजीलैंड के पास 95, तुर्किए के पास 94, भारत के पास 74 और ऑस्ट्रेलिया के पास 47 दिन तक का कच्चा तेल है. मतलब ईरान में अगर लगभग दो-ढाई महीने तक जंग चलती है और कच्चा तेल नहीं मिलता है तो भी भारत पर बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा.
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