यही वो मकान है, जहां दुनिया के सबसे बदनाम तानाशाह एडोल्फ हिटलर का जन्म हुआ था. आज से इस इमारत की पहचान हमेशा के लिए बदल गई है. ऑस्ट्रिया की सरकार ने बुधवार, 22 जुलाई से इस मकान में आधिकारिक तौर पर एक नया पुलिस स्टेशन खोल दिया है. इसका मकसद आज के बढ़ते दक्षिणपंथी चरमपंथियों को नाजी तानाशाह के जन्मस्थान पर जाने से रोकना है. यहां के अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बदलाव से इस जगह के भविष्य को लेकर सालों से चल रही संवेदनशील बहस भी खत्म हो जाएगी. ऑस्ट्रिया की अक्सर इस बात के लिए आलोचना होती रही है कि उसने होलोकॉस्ट यानी यहूदियों के नरसंहार में अपनी भूमिका की पूरी जिम्मेदारी नहीं ली.
इस मकान में 20 मिलियन यूरो यानी भारतीय करेंसी में लगभग 220 करोड़ रुपए की लागत से हुई मरम्मत का काम तय समय से तीन साल देरी से पूरा हुआ है. आप अब देखकर कह नहीं सकेंगे कि ऑस्ट्रिया के ब्राउनौ-एम-इन शहर के बीचों-बीच स्थित इस साधारण सी इमारत में इतिहास के सबसे कुख्यात लोगों में से एक का जन्म हुआ था.

20 अप्रैल 1889 की वह तारीख
जर्मन बॉर्डर के पास 17वीं सदी के इस घर की खुरदरी पीली दीवारों पर अब ऑस्ट्रिया के आर्किटेक्चर फर्म 'मार्टे' ने सफेदी कर दी है. इसी घर में 20 अप्रैल 1889 को भविष्य का 'फ्यूहरर' पैदा हुआ था. अब इस मकान के एंट्री गेट के ऊपर पुलिस का साइन लगा है, जबकि फुटपाथ पर अभी भी एक स्मारक पत्थर लगा है जिस पर लिखा है: "शांति, स्वतंत्रता और लोकतंत्र के लिए. फिर कभी फासीवाद नहीं. मरने वाले लाखों लोगों की चेतावनी."

हिटलर के मकान के बाहर फुटपाथ पर लगा स्मारक पत्थर (फोटो- AFP)
क्या यह फैसला सही है?
इस मकान पर अक्सर नए जमाने के नाजी (neo-Nazis) आते-जाते थे. इसके बावजूद, इसकी आखिरी मालकिन गेरलिनडे पोमर ने घर में किसी भी तरह के बदलाव का विरोध किया और सरकार द्वारा इसे अपने कब्जे में लेने के खिलाफ आखिर तक कानूनी लड़ाई लड़ी. ऑस्ट्रिया ने 2016 में इस जर्जर इमारत पर कब्जा करने के लिए कानून पास किया था. इसके तीन साल बाद, सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार 8,600 स्क्वायर फीट की इस प्रॉपर्टी को 8,10,000 यूरो में खरीदने की मंजूरी दे दी.

मकान में मरम्मत के दौरान की तस्वीर (AFP)
खरीदने के बाद इस जगह का क्या किया जाए, इस पर कई विकल्प थे. लेकिन इतिहासकारों के लिए इसे गिराने का विकल्प बिल्कुल भी सही नहीं था. उन्होंने ऑस्ट्रिया की सरकार से कहा कि वह नाजियों द्वारा 60 लाख से ज्यादा यहूदियों, साथ ही रोमा, LGBTQ लोगों और कम्युनिस्टों की हत्या में अपनी भूमिका को स्वीकार करे. इसे ऐतिहासिक स्मारक न बनाने का फ़ैसला किया गया क्योंकि डर था कि चरमपंथी यहां मत्था टेकने आया करेंगे. आखिर में एक एक्सपर्ट कमीशन ने इसे पुलिस स्टेशन बनाने का निर्णय लिया. ऑस्ट्रियाई सरकार का कहना था कि वहां हमेशा पुलिस की मौजूदगी से साफ तौर पर पता चलेगा कि नाजीवाद का कोई भी महिमामंडन स्वीकार्य नहीं होगा और इससे उस जगह का असर खत्म हो जाएगा.
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