क्या दुनिया के सबसे मशहूर महल में रहने से कोई राजा खुद मना कर सकता है? पहली बार में तो यह सुनने में बड़ा अजीब लगता है, लेकिन ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स तृतीय ने ऐसा ही फैसला लिया है. करीब 10 साल तक चले करोड़ों पाउंड के बड़े रेनोवेशन के बाद भी वह बकिंघम पैलेस में नहीं रहेंगे. सवाल है कि आखिर ऐसा क्यों? क्या महल में कोई समस्या है, या इसके पीछे कोई बड़ी योजना छिपी है? आइए जानते हैं कि आखिर बकिंघम पैलेस से दूर रहने के पीछे क्या वजह है और अब इस ऐतिहासिक महल का भविष्य क्या होगा.
किंग चार्ल्स तृतीय का फैसला
अगले साल बकिंघम पैलेस में मरम्मत का काम पूरा हो जाएगा. लेकिन तब भी किंग चार्ल्स ने पास ही स्थित क्लेरेंस हाउस में ही रहने का फैसला किया है. लगभग 10 साल से यह मरम्मत का काम चल रहा था और इसमें करीब 369 मिलियन पाउंड का खर्चा आया. इस प्रोजेक्ट में पुरानी हो चुकी बिजली की वायरिंग, पाइप और हीटिंग सिस्टम को बदला जा रहा है. 2017 में जब यह काम शुरू हुआ था, तो ब्रिटेन के अधिकारियों को उम्मीद थी कि यह महल राजा का लंदन में मुख्य निवास बना रहेगा, जैसा कि 1837 में महारानी विक्टोरिया के शासक बनने के बाद से रहा था. लेकिन अब किंग ने इससे इनकार कर दिया है.
हालांकि साथ ही राजा के कोषाध्यक्ष और निजी खजाने के संरक्षक जेम्स चाल्मर्स ने कहा कि यह महल विदेशी मेहमानों के स्वागत सहित औपचारिक और सरकारी कार्यक्रमों के लिए मुख्य स्थान बना रहेगा. उन्होंने पत्रकारों से कहा, "यह राजशाही का मुख्यालय है और रहेगा, हमारी राष्ट्रीय इमारतों में सबसे खास है, और जब भी महाराज लंदन में होंगे, तो छत पर गर्व के साथ राजा का झंडा लहराएगा."
हिटलर की बमबारी के बावजूद नहीं छोड़ा था महल
बकिंघम पैलेस को छोड़ने की कल्पना ब्रिटेन के पुराने सम्राट तो कर ही नहीं सकते थे. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुए बमबारी में जर्मन बमों से इमारत पर नौ बार हमला होने के बावजूद परिवार ने इसे छोड़ने से इनकार कर दिया था.
राजा ने पहली बार बताया कितना टैक्स दिया
अधिकारियों ने यह भी बताया कि 2024-25 में किंग चार्ल्स तृतीय ने 1.29 करोड़ पाउंड टैक्स दिया. पहली बार यह जानकारी सार्वजनिक की गई है. इसके साथ ही वह ब्रिटेन के 100 सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले लोगों में शामिल हो गए हैं. बता दें कि 2022 में क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के निधन के बाद बढ़ती आलोचना के बीच शाही परिवार ने अपने पैसों और खर्चों की जानकारी पहले से ज्यादा खुलकर बताने का वादा किया है.
फैसला की टाइमिंग भी अहम है
ये सभी घोषणाएं ऐसे समय में हुई हैं, जब शाही परिवार जेफ्री एपस्टीन और पूर्व राजकुमार प्रिंस एंड्रयू (अब एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर) के रिश्तों को लेकर कई महीनों से चल रही विवादित खबरों से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है. लोगों का पूरा ध्यान एंड्रयू पर होने की वजह से किंग चार्ल्स तृतीय की राजशाही को आधुनिक बनाने और 1,000 साल पुरानी इस व्यवस्था में बदलाव दिखाने की कोशिशें पीछे छूट गई हैं.
अब इस महल का क्या होगा?
जेम्स चाल्मर्स ने कहा कि राजा के इस फैसले से आम लोगों को बकिंघम पैलेस देखने का ज्यादा मौका मिलेगा. वहां पहले से ज्यादा कार्यक्रम होंगे, ज्यादा लोग घूमने आ सकेंगे और पैलेस के टूर भी बढ़ाए जाएंगे. अभी हर साल करीब 7 लाख लोग बकिंघम पैलेस देखने आते हैं. इसके अलावा जैसा पहले बताया गया, यह महल विदेशी मेहमानों के स्वागत सहित औपचारिक और सरकारी कार्यक्रमों के लिए मुख्य स्थान बना रहेगा.
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