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खपत से ज्यादा बिजली उत्पादन के कारण श्रीलंका में छह घंटे तक पूरे देश में रहा ब्लैकआउट

श्रीलंका में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता 3,000 मेगावाट से थोड़ी अधिक है, जबकि दिन के समय बिजली की मांग 2,000 से 2,500 मेगावाट के बीच रहती है. टैक्स में छूट मिलने के कारण उपभोक्ता सौर ऊर्जा की ओर रुख कर रहे हैं.

खपत से ज्यादा बिजली उत्पादन के कारण श्रीलंका में छह घंटे तक पूरे देश में रहा ब्लैकआउट
इस ब्लैकआउट के कारण पूरे श्रीलंका में अफरा-तफरी रही. (फोटो-एनडीटीवी)
  • श्रीलंका में सौर ऊर्जा उत्पादन खपत से अधिक होने के कारण पूरे देश का नेशनल ग्रिड छह घंटे तक ठप रहा
  • सप्ताहांत में बिजली की मांग कम होने पर सौर ऊर्जा उत्पादन अधिक हो जाने से ग्रिड में असंतुलन पैदा हुआ था
  • सरकार ने सोलर सिस्टम उपयोगकर्ताओं से अपील की कि वे ग्रिड को स्थिर करने के लिए अपने सिस्टम को डिस्कनेक्ट करें

जी हां, खपत से ज्यादा बिजली उत्पादन के कारण पूरे श्रीलंका में ब्लैकआउट हो गया. शनिवार को श्रीलंका में पूरे देश की बिजली व्यवस्था छह घंटे तक ठप रही. ऐसा नेशनल ग्रिड के ट्रिप होने की वजह से हुआ, जिसका संभावित कारण यह था कि सौर ऊर्जा का उत्पादन खपत से अधिक हो गया था.

मांग कम, उत्पादन ज्यादा हो गया

सरकारी बिजली प्राधिकरण ने बताया कि दोपहर से लेकर शाम तक देश में ग्रिड से बिजली की आपूर्ति बंद रही. बाद में, पूरे द्वीप (जिसकी आबादी 2.2 करोड़ है) में चरणों में बिजली आपूर्ति बहाल की गई. ऊर्जा मंत्री अनुरा करुणातिलका ने कहा कि इस बड़ी खराबी के कारणों की जांच चल रही है. हालांकि, इंजीनियरों को संदेह है कि सप्ताहांत की छुट्टी के कारण बिजली की मांग कम थी, जबकि सौर ऊर्जा का उत्पादन बहुत अधिक हो गया था, जिससे असंतुलन पैदा हो गया.

दिलचस्प बात ये है कि श्रीलंका के अधिकारियों ने रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने वालों से बार-बार अपील की कि वे ग्रिड को स्थिर करने में मदद के लिए अपने सिस्टम को डिस्कनेक्ट कर दें. इसके बाद बिजली व्यवस्था बहाल हो सकी.

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, फरवरी 2025 में भी पूरा ग्रिड ठप हो गया था, जब एक रविवार को सौर ऊर्जा का उत्पादन खपत से अधिक हो गया था. उस समय बिजली आपूर्ति बहाल करने में छह घंटे से अधिक का समय लगा था.

टैक्स में छूट के कारण बढ़ रही सोलर क्षमता

श्रीलंका में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता 3,000 मेगावाट से थोड़ी अधिक है, जबकि दिन के समय बिजली की मांग 2,000 से 2,500 मेगावाट के बीच रहती है. टैक्स में छूट मिलने के कारण उपभोक्ता सौर ऊर्जा की ओर रुख कर रहे हैं और अपनी अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेच रहे हैं. इससे ऐसा असंतुलन पैदा हो रहा है, जिसे संभालने में बिजली कंपनी को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. सरकार का लक्ष्य तीन साल के भीतर सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर लगभग 4,400 मेगावाट करना है, जो 2024 के स्तर से 388 प्रतिशत अधिक है.

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