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दुनिया की 5 सबसे खौफनाक मौतें, पढ़कर कांप जाएगी रूह

दुनिया की कुछ सजाएं और हादसे इंसानी पीड़ा की सबसे डरावनी मिसाल हैं. स्कैफिज़्म, लिंगची जैसी क्रूर सजा से लेकर ब्रेकिंग व्हील और परमाणु हादसे तक, ये घटनाएं मानव क्रूरता और त्रासदी की चरम सीमा दिखाती हैं.

दुनिया की 5 सबसे खौफनाक मौतें, पढ़कर कांप जाएगी रूह
सांकेतिक तस्वीर
नई दिल्ली:

इतिहास में सबसे दर्दनाक मौत तय करना आसान नहीं है, क्योंकि दर्द और भय का अनुभव हर इंसान के लिए अलग होता है. फिर भी कुछ सजाएं और हादसे ऐसे रहे हैं, जिन्हें इंसानी पीड़ा की चरम सीमा माना जाता है. ये घटनाएं बताती हैं कि किस तरह मानव इतिहास में क्रूरता और त्रासदी के भयावह अध्याय लिखे गए.

1. स्कैफिज़्म (Scaphism): जिंदा सड़ने की सजा

प्राचीन फारस की इस सजा को इतिहास की सबसे क्रूर यातनाओं में गिना जाता है. इसमें दोषी को दो लकड़ी के ढांचों या नावों के बीच जकड़ दिया जाता था. उसे जबरदस्ती दूध और शहद खिलाया जाता और शरीर पर भी शहद लगाया जाता था, जिससे कीड़े-मकोड़े आकर्षित होते थे. धीरे-धीरे शरीर सड़ने लगता, संक्रमण फैलता और व्यक्ति कई दिनों तक असहनीय दर्द झेलते हुए मर जाता था.

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2. हिसाशी ओउची: रेडिएशन से तड़प-तड़पकर मौत

1999 में जापान के टोकाइमुरा परमाणु हादसे में कर्मचारी हिसाशी ओउची को भयानक रेडिएशन का सामना करना पड़ा. रेडिएशन इतना खतरनाक था कि उनके शरीर की कोशिकाएं धीरे-धीरे खत्म होने लगीं. करीब 83 दिनों तक अस्पताल में जीवन-मृत्यु से जूझते हुए उन्होंने दर्दनाक मौत झेली. उनकी त्वचा और आंतरिक अंग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे.

3. लिंगची: 'हजार कटों की मौत'

प्राचीन चीन की यह सजा क्रूरता की चरम मिसाल थी. इसमें दोषी के शरीर को धीरे-धीरे काटा जाता था, ताकि मौत तुरंत न आए और दर्द लंबे समय तक चलता रहे. यह सजा न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद भयावह मानी जाती थी. सदियों तक इसका इस्तेमाल हुआ, जिसके बाद इसे समाप्त कर दिया गया.

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4. ब्रेकिंग व्हील: शरीर तोड़ने की यातना

मध्यकालीन यूरोप में ‘ब्रेकिंग व्हील' बेहद क्रूर सजा थी. इसमें दोषी को पहिए पर बांधकर लोहे की छड़ों से उसकी हड्डियां एक-एक कर तोड़ी जाती थीं. कई मामलों में व्यक्ति को घंटों या दिनों तक तड़पने के लिए छोड़ दिया जाता था, जिससे यह सजा बेहद दर्दनाक मानी जाती थी.

5. नटी पुट्टी गुफा हादसा: जिंदा दफन जैसी मौत

2009 में अमेरिका में जॉन एडवर्ड जोन्स एक बेहद संकरी गुफा में उल्टा फंस गए थे. करीब 24 घंटे तक बचाव की कोशिशें होती रहीं, लेकिन उन्हें निकाला नहीं जा सका. अंततः शरीर ने जवाब दे दिया और उनकी मौत हो गई. यह हादसा 'धीमी और बेबस मौत' की सबसे दर्दनाक घटनाओं में गिना जाता है.

ये घटनाएं केवल इतिहास की कहानियां नहीं हैं, बल्कि इंसानी पीड़ा, त्रासदी और क्रूरता की चेतावनी भी हैं. साथ ही, ये हमें याद दिलाती हैं कि आज के दौर में मानवाधिकार, सुरक्षा और संवेदनशीलता कितनी जरूरी हो गई है.

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