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जैमिंग का जाल होगा बेअसर, दुश्मन चाहकर भी नहीं भटका पाएगा, सुखोई विमान हुआ और ताकतवर, जानिए कैसे

Sukhoi Fighter Jet News: नई नेविगेशन प्रणाली को सुखोई विमान की पूरी उड़ान क्षमता के हिसाब से तैयार किया जाएगा. यह 21 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर काम कर सकेगी. साथ ही मैक 1.5 की तेज रफ्तार और भारी दबाव वाली उड़ान परिस्थितियों में भी इसकी क्षमता बनी रहेगी.

जैमिंग का जाल होगा बेअसर, दुश्मन चाहकर भी नहीं भटका पाएगा, सुखोई विमान हुआ और ताकतवर, जानिए कैसे
sukhoi fighter jet
नई दिल्ली:

भारत अपने सबसे ताकतवर लड़ाकू विमानों में शामिल सुखोई-30 एमकेआई I को और आधुनिक बनाने जा रहा है. रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के 258 सुखोई लड़ाकू विमानों में नया एंटी-जैमिंग और एंटी-स्पूफिंग नेविगेशन सिस्टम लगाने के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानि आरएफपी जारी किया है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब आधुनिक युद्ध में इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और जीपीएस को गुमराह करने की तकनीक तेजी से बढ़ रही है. नया सिस्टम विमान को दुश्मन की ऐसी कोशिशों से बचाने में मदद करेगा.

क्या है नया सिस्टम?

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय कंपनियों से ऐसे आधुनिक जीपीएस एंटीना सिस्टम के लिए प्रस्ताव मांगे हैं, जो कई सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम के साथ एक साथ काम कर सके. इसमें भारत का अपना नाविक  सिस्टम भी शामिल होगा. इसके अलावा अमेरिकी जीपीएस,रूस का ग्लोनास, चीन का बेइदोऊ , यूरोप का गैलीलियो और इसरो का गगन सिस्टम भी इससे जुड़ सकेंगे.इसका मतलब यह है कि अगर युद्ध के दौरान दुश्मन किसी एक सिग्नल को जाम करने की कोशिश करे, तब भी पायलट को सही लोकेशन और दिशा की जानकारी मिलती रहेगी.

क्यों जरूरी है यह अपग्रेड?

आज के मौजूदा  युद्ध में सिर्फ मिसाइल और हथियार ही अहम नहीं हैं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक युद्ध भी बड़ा खतरा बन चुका है. दुश्मन देश अक्सर जीपीएस  सिग्नल को जाम या नकली सिग्नल भेजकर लड़ाकू विमानों को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं.नई तकनीक सुखोई विमानों को ऐसे खतरों से बचाएगी. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह सिस्टम बहुत मजबूत जैमिंग रोधी क्षमता के साथ आएगा. यह सिस्टम एक साथ कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप को भी रोक सकेगा यानी युद्ध के मुश्किल हालात में भी विमान अपनी सही स्थिति जान सकेगा.

कठिन परिस्थितियों में भी करेगा काम

नई नेविगेशन प्रणाली को सुखोई विमान की पूरी उड़ान क्षमता के हिसाब से तैयार किया जाएगा. यह 21 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर काम कर सकेगी. साथ ही मैक 1.5 की तेज रफ्तार और भारी दबाव वाली उड़ान परिस्थितियों में भी इसकी क्षमता बनी रहेगी. वायुसेना चाहती है कि सिस्टम हर मौसम और हर तरह के ऑपरेशन में भरोसेमंद रहे. खासकर ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान  पाकिस्तान ने भारत के लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और ड्रोन की नेविगेशन के डाइवर्ट करने के लिए जीपीएस जैमिंग और स्पूफिंग तकनीक का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी लेकिन वह सफल नहीं हो सका.इसका सीधा मतलब होता है कि भारत के लड़ाकू विमानों और मिसाइलों को गलत लोकेशन दिखाना.

कितने सिस्टम खरीदे जाएंगे?

रक्षा मंत्रालय ने कुल 300 एंटीना सिस्टम खरीदने की योजना बनाई है. इसके अलावा परीक्षण के लिए 50 फील्ड लेवल टेस्टर और 10 बेस लेवल टेस्टर भी खरीदे जाएंगे. इस परियोजना में दो विमानों पर ट्रायल, पूरी फ्लीट में इंस्टॉलेशन और वायुसेना कर्मियों की ट्रेनिंग भी शामिल है. प्रशिक्षण 9 टेट्रा स्कूल में दिया जाएगा. सरकार चाहती है कि पूरा काम कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के दो साल के भीतर पूरा हो जाए.

‘मेक इन इंडिया' पर जोर

इस टेंडर की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ भारतीय कंपनियां ही हिस्सा ले सकेंगी. सरकार रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करना चाहती है और स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा दे रही है. रक्षा मंत्रालय ने कंपनियों से 22 जून 2026 तक ऑनलाइन बोली जमा करने को कहा है.तकनीकी बोली अगले दिन खोली जाएगी.सुखोई- 30 एमकेआई  फिलहाल भारतीय वायुसेना की सबसे बड़ी और अहम लड़ाकू विमान फ्लीट मानी जाती है. ऐसे में यह अपग्रेड वायुसेना की युद्ध क्षमता को और मजबूत कर सकता है.

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