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सड़कों पर नंबर प्लेट बदलकर दौड़ रहे उत्तराखंड शासन लिखे के वाहन? कमर्शियल वाहन कैसे बने प्राइवेट वाहन

उत्तराखंड में सड़कों ऐसी गाड़ियां चल रही हैं जो सही मायने में टैक्सी है, यानी उन पर पीली नंबर प्लेट होनी चाहिए लेकिन उन वाहनों को प्राइवेट वाहनों के तौर पर उन पर सफेद रंग की प्लेट लगाकर चलाया जा रहा है.

सड़कों पर नंबर प्लेट बदलकर दौड़ रहे उत्तराखंड शासन लिखे के वाहन? कमर्शियल वाहन कैसे बने प्राइवेट वाहन
Uttarakhand Private Vehicles

उत्तराखंड में अक्सर मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन होता आया है  पुलिस और RTO लगातार मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते रहते हैं जिसमें वाहनों का चालान या सीज करने की कारवाई की जाती है लेकिन जब सरकारी वाहन नहीं मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन करते हुए खुलेआम नजर आते हैं तो ऐसे में क्या कार्रवाई की जाती होगी क्या इन वाहनों का चालान किया जाता है या फिर सीज किया जाता है लेकिन ऐसा नहीं है.

सड़कों पर या सचिवालय में कई ऐसे वाहन दिखने को मिल जाते हैं, जिन पर उत्तराखंड सरकार लिखा रहता है. वाहन के आगे उत्तराखंड शासन या अधिकारियों के पद लिखे मिल जाते हैं, लेकिन इन वाहनों की जो नंबर प्लेट होती है, वह व्हाइट कलर यानी जो वहां प्राइवेट नंबर के होते हैं, उसे कलर की प्लेट मिल जाती है. जबकि यह वहां कमर्शियल यानी टैक्सी वाले वाहन होते हैं, यानी नंबर प्लेट बदलकर कमर्शियल गाड़ी को प्राइवेट गाड़ी बनाकर अधिकारी सड़क पर खुलेआम दौड़ा रहे हैं. 

  • वैसे ही मोटर व्हीकल एक्ट में कई रंग की नंबर प्लेट होती है.पीली रंग नंबर प्लेट जिस पर काले अक्षर लिखे हो वह कमर्शियल गाड़ियां टैक्सी बस ट्रक के लिए होती है.
  • सफेद रंग की नंबर प्लेट जिस पर काले अक्षर लिखे होते हैं वह निजी वाहनों के लिए होती है.
  • हरे रंग की नंबर प्लेट जिस पर सफेद अक्षर लिखे जाते हैं वह इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के लिए होती है.
  • हरे रंग की नंबर प्लेट जिस पर पीले अक्षर लिखे जाते हैं वह व्यावसायिक इलेक्ट्रॉनिक वाहन के लिए होती है
  • काली रंग की नंबर प्लेट जिस पर पीले अक्षर होते हैं वह किराए पर चलने वाली कारों या लग्जरी कब के लिए होता है ऐसे वाहन होटल रिसोर्ट के लिए उपयोग में ले जाते हैं.
  • लाल रंग की नंबर प्लेट जिस पर सफेद अक्षर से लिखा होता है वे नए वाहनों के अस्थाई पंजीकरण के लिए होती है जो डीलर के पास होती है.
  • नीले रंग के नंबर प्लेट जिस पर सफेद अक्षर होते हैं वह विदेशी दूतावासों या राजनयिको के वाहन होते हैं.

पीले नंबर प्लेट की जगह सफेद नंबर प्लेट लगे वाहन

लगातार सड़कों ऐसे वाहन चल रहे हैं जो वास्तविक तौर पर टैक्सी वाले वाहन है यानी जिन पर पीले रंग के नंबर प्लेट होनी चाहिए लेकिन उन वाहनों को निजी वाहनों के तौर पर उन पर सफेद रंग की प्लेट लगाकर चलाया जा रहा है. ऐसे में मोटर व्हीकल एक्ट अधिनियम की धारा 192 में चालान किया जाता है इस धारा में गलत नंबर प्लेट रंग या उसका फोंट बदलने में दंड का प्रावधान है. इसमें 5000 से लेकर ₹10000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

उत्तराखंड सरकार लिखकर गड़बड़ी

अगर यह दोबारा इस तरह के अपराध में पकड़ा जाता है तो गाड़ी को सीज किया जा सकता है. क्योंकि ऐसे कई वाहन चल रहे हैं जिन पर उत्तराखंड शासन या फिर उत्तराखंड सरकार लिखा है और उन वाहनों की नंबर प्लेट बदल दी गई है. अब ऐसे में एक अपराध और होता है जो मोटर व्हीकल एक्ट के अंतर्गत आता है जिसमें HRSP यानी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट्स के रंग कोड का पालन नहीं करने पर भारी जुर्माना होता है लेकिन सड़कों पर दौड़ रहे उत्तराखंड सरकार शासन लिखे वाहन हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट को चेंज कर कर ही चल रहे हैं.

टैक्सी या फिर कमर्शियल चलने वाले वाहनों के नंबर TB, TA, TC, TD या PA होता है जैसे UK07 TA 0000, UK07 TB 0000, UK07 TD 0000 वही सरकारी वाहनों पर GA, GE ,GD, लिखा होता है जैसे UK07 GA 0000,UK07 GE 0000,

देहरादून रीजन के  आरटीओ संदीप सैनी ने एनडीटीवी को जानकारी देते हुए बताया कि इस बारे में एनफोर्समेंट की कार्यवाही चलती रहती है इसमें बहुत सारे चालान भी किए गए हैं और आरटीओ ऑफिस बुलाकर नंबर प्लेट भी चेंज करवाई गई है. आरटीओ संदीप सैनी ने बताया कि जहां तक शासन मैं चलने वाले वाहनों की बात है तो इसके लिए सचिवालय प्रशासन को बताया गया है कि सचिवालय में आने वाले ऐसे वाहन जिनकी नंबर प्लेट पीली होनी चाहिए लेकिन वह सफेद रंग की प्लेट लगाकर चला रहे हैं तो उनको या तो इस बारे में बताया जाए या फिर बदलने को कहा जाए.

संदीप सैनी ने कहा कि वाहन  में चलने वाले अधिकारी इस बात को सुनिश्चित कर लें कि अगर टैक्सी अनुबंध वाला वहां है तो उसकी नंबर प्लेट पीले होने चाहिए सरकार ने टैक्सी अनुबंध कर वाहन उपलब्ध कराए हैं अगर वह नॉर्म्स और नियम के मुताबिक चले तो बेहतर होगा, क्योंकि हमारे एनफोर्समेंट अगर सड़क पर इस तरह के वाहन पकड़ने तो उनका चालान भी होगा और जुर्माना भी किया जाएगा इसलिए निवेदन है कि ऐसी असहज स्थिति न आने दिए जाएं.

आरटीओ संदीप सैनी ने बताया कि सबसे पहले चालान किया जाता है और चालान भी ₹5000 या उससे ज्यादा का हो सकता है और दोबारा अगर ऐसा अपराध किया जाता है तो उसके वाहन के फिटनेस पर भी कार्रवाई की जाएगी और फिटनेस कैंसिलेशन भी किया जा सकता है ऐसे में ऐसे वाहन जिनका अनुबंध होता है सरकारी दफ्तरों में तो ऐसे में उनके अनुबंध भी खराब हो सकता है क्योंकि अनुबंध के दौरान नियम और शर्तें कई तरह के होते है.
 

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