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तैयार है ऋषिकेश का नया टूरिस्ट स्पॉट, लक्ष्मण झूला रह जाएगा इतिहास; कांच के पुल से गंगा की लहरें देखना बना देगा रोमांचक

Rishikesh Glass Bridge: ऋषिकेश में बजरंग सेतु का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जो अप्रैल के अंत तक पर्यटकों के लिए खुल जाएगा. यह उत्तराखंड का पहला कांच का पुल होगा और लक्ष्मण झूला का आधुनिक विकल्प होगा.

तैयार है ऋषिकेश का नया टूरिस्ट स्पॉट, लक्ष्मण झूला रह जाएगा इतिहास; कांच के पुल से गंगा की लहरें देखना बना देगा रोमांचक

Rishikesh Bajrang Setu: उत्तराखंड के ऋषिकेश को लक्ष्मण झूला के साथ एक और नई पहचान मिलने जा रही है, जिसकी चर्चा भी शुरू हो गई है. लंबे वक्त से इंतजार कर रहे ग्लास ब्रिज (कांच का पुल) लोगों के लिए जल्द ही खोल दिया जाएगा और यह ऋषिकेश का ही नहीं बल्कि, राज्य का पहला कांच का पुल होगा. इसे बजरंग सेतु नाम से भी जाना जाएगा. वैसे तो देवभूमि उत्तराखंड में देखने के लिए तो बहुत कुछ है, पहाड़, नदियां, तीर्थ स्थल, ग्लेशियर, वादियां, लेकिन जब आप कांच पर टहलेंगे और गंगा की लहरें आपके बिल्कुल नीचे होंगी तो यह नजारा देखने लायक होगा.

चपचमाता यह ब्रिज रात में बहुत खूबसूरत लगता है. ऋषिकेश में यह टूरिस्ट के लिए नया डेस्टिनेशन और सेल्फी प्वाइंट बनने को तैयार है. उत्तराखंड का पहला ग्लास सस्पेंशन ब्रिज 1929 के ऐतिहासिक लक्ष्मण झूला का आधुनिक विकल्प है. लगभग ₹60-70 करोड़ की लागत से बना यह 132 मीटर लंबा पुल, 66 मिमी मोटे ग्लास फ्लोर और बीच में दोपहिया वाहनों के लिए स्टील डेक के साथ इसी अप्रैल माह के अंत तक पर्यटकों के लिए खुलने की उम्मीद है.

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पूरे विश्व में ऋषिकेश के लैंड मार्क के रूप में जाने, जाने वाला लक्ष्मण झूला पुल अब अतीत की बात बनने जा रहा है, जिसके साथ ही ग्लास ब्रिज बजरंग सेतु बनकर लगभग तैयार है. इसके जल्द लोकार्पण की तैयारी चल रही है.

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बजरंग सेतु की मुख्य विशेषताएं

  • ग्लास फ्लोरिंग: पैदल यात्रियों के लिए किनारों पर पारदर्शी कांच की डेक, जिससे नीचे बहती गंगा दिखती है.
  • यातायात: मध्य भाग में दोपहिया वाहनों के लिए स्टील डेक.
  • संरचना: यह केबल-सस्पेंशन पुल है, जिसमें केदारनाथ और बद्रीनाथ की झलक देखने को मिल सकती है.
  • सुरक्षा: इस पर फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीमर (FRP) और उच्च गुणवत्ता वाले कांच का उपयोग किया गया है.
  • स्थान: यह पुराने लक्ष्मण झूला के समानांतर बना है, जो 2019 से बंद है.

बजरंग सेतु के प्रवेश द्वार की आकृति केदारधाम जैसी बन गई है. पुल पर हल्के चौपहिया वाहनों की भी आवाजाही होगी. लोक निर्माण विभाग की ओर से पुल का कार्य 97 प्रतिशत हो गया है. पुल के उद्घाटन के लिए विभाग को अभी तक शासन स्तर से हरी झंडी नहीं मिल रही है.

वैकल्पिक तौर पर बजरंग सेतु पर करीब तीन माह पहले से स्थानीय लोगों और पर्यटकों की आवाजाही शुरू हो चुकी है, लेकिन पुल पर दोपहिया वाहन प्रतिबंध होने से स्थानीय लोगों और पर्यटकों को परेशानी हो रही है. विभागीय स्तर पर पुल का निर्माण कार्य लगभग तैयार हो चुका है. शासन स्तर से उद्घाटन की अनुमति मिलनी है. शासन स्तर से अनुमति मिलते ही पुल जनता के लिए समर्पित कर दिया जाएगा.

(ऋषिकेश से आशीष डोभाल की रिपोर्ट)

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