हरिद्वार की रहने वाली तमन्ना ने इस्लाम धर्म छोड़कर सनातन धर्म अपना लिया. उसने वैदिक रीति-रिवाज से हिंदू धर्म अपनाया. हरिद्वार के पावन चंडीघाट स्थित ब्रह्मकुंड पर तमन्ना ने अपने मुस्लिम घर-परिवार को छोड़कर सनातन धर्म में वापस की. तमन्ना की परवरिश एक मुस्लिम परिवार में हुई है लेकिन अब वह सनातन अपनाकर नेहा बन चुकी हैं.
मुस्लिम लड़की ने अपनाया सनातन धर्म
तमन्ना का नया नाम अब नेहा होगा.उसने इस्लाम धर्म का पूरी तरह परित्याग कर दिया है. तीर्थ सेवा न्यास के अध्यक्ष तीर्थाचार्य सन्त राम विशाल दास महाराज के मार्ग दर्शन और संरक्षण में पंडित जितेंद्र ज्योति ने वैदिक संस्कार कर्म संपन्न कराया. इस धर्म परिवर्तन कार्यक्रम की मुख्य भूमिका में हिन्दू रक्षा दल के जिलाध्यक्ष विशाल चौहान रहे.

तमन्ना के सनातन अपनाने के कार्यक्रम में देव आश्रम के महंत ओमदास महराज, विश्व हिंदू परिषद के संगठन मंत्री अर्जुन सिंह ,आर्यसमाज दिल्ली से मुकेश शास्त्री, अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद के संरक्षक बाबा हठ योगी महराज समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे. तमन्ना जैसे ही इस्लाम को त्यागकर नेहा बनी, घाट पर मौजूद सभी संतों ने पुष्पवर्षा कर और वैदिक मंगलाचरण के साथ उसका सनातन परिवार में स्वागत किया.

बाबा हठयोगी ने कहा कि इतिहास के विभिन्न कालखंडों में अनेक लोगों ने भय, अत्याचार, सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों की वजह से अपने मूल धर्म से दूरी बना ली थी. आज अगर कोई अपनी खुद की इच्छा और आस्था के आधार पर अपने पूर्वजों की परंपरा में लौटना चाहता है, तो उसका सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाना चाहिए. वहां मौजूद लोगों ने तमन्ना की घरवापसी को सनातन समाज के लिए उत्साह और आत्मविश्वास का विषय बताया.

तीर्थाचार्य सन्त राम विशाल दास महाराज ने कहा कि सनातन धर्म बलपूर्वक धर्म परिवर्तन का समर्थन नहीं करता. अगर कोई अपनी स्वतंत्र इच्छा, श्रद्धा और वैदिक संस्कृति के प्रति विश्वास के आधार पर अपने पूर्वजों की परंपरा में लौटना चाहता है, तो उसका स्वागत करना हमारा धार्मिक और मानवीय कर्तव्य है. आज की यह घरवापसी केवल एक व्यक्ति का परिवर्तन नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से फिर से जुड़ने का प्रेरणादायक संदेश है.
सनातन धर्म प्रेम, करुणा और सत्य का संदेश देता है
महंत ओमदास महाराज ने कहा कि सनातन धर्म विश्व को अपनाने,प्रेम, करुणा और सत्य का संदेश देता है. अपनी स्वेच्छा से सनातन धर्म को स्वीकार करने वाली बेटी नेहा को मेरा आशीर्वाद है. हम सभी का दायित्व है कि समाज में सद्भाव, संस्कार और धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ाएं और हर व्यक्ति के धार्मिक निर्णय का सम्मान करें.जय श्रीराम और "सनातन धर्म की जय" के उद्घोष के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.
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