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This Article is From Jan 06, 2026

योगी कैबिनेट विस्तार 2026: इन चेहरों को मिल सकती है टीम योगी में जगह, जातीय समीकरण साधने में जुटी भाजपा

आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले योगी कैबिनेट में नए चेहरों की एंट्री होने जा रही है. माना जा रहा है कि यह जातीय, क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को दुरुस्त कर भाजपा की जीत सुनिश्चित करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है.

योगी कैबिनेट विस्तार 2026: इन चेहरों को मिल सकती है टीम योगी में जगह, जातीय समीकरण साधने में जुटी भाजपा
  • CM योगी और PM मोदी की दिल्ली बैठक के बाद उत्तर प्रदेश में कैबिनेट विस्तार की चर्चा जोरों पर है.
  • वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 54 मंत्री हैं जबकि अधिकतम 60 मंत्री हो सकते हैं, जिससे 6 पद खाली हैं.
  • भाजपा का उद्देश्य जातीय संतुलन मजबूत करना और ओबीसी तथा एससी वर्ग को कैबिनेट में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना है.

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच दिल्ली में हुई मुलाकात को लेकर जोरदार अटकलें लगाई जा रही हैं कि राज्य में कैबिनेट विस्तार अब बेहद निकट है. इस बैठक में लगभग एक घंटे तक बातचीत चली, जिसे राजनीतिक गलियारों में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है.

सीएम योगी के दिल्ली दौरे का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि उनका कार्यक्रम बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात का भी है. यूपी में बीते कई महीनों से लगातार कैबिनेट विस्तार की चर्चा जारी है, और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा अपने सामाजिक व क्षेत्रीय समीकरणों को दुरुस्त करने में कोई कोर‑कसर नहीं छोड़ना चाहती. 

कैबिनेट विस्तार क्यों जरूरी?

राज्य में वर्तमान में 54 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम 60 मंत्री हो सकते हैं. यानी 6 पद खाली हैं. दूसरी ओर, कई मंत्री लोकसभा 2024 के बाद केंद्र में चले गए, जिससे खाली स्थान और बढ़े.

यह भी पढ़ें- दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी से मिले सीएम योगी, यूपी में मंत्रिमंडल फेरबदल पर कयास

क्या है पार्टी की रणनीति?

जातीय संतुलन मजबूत करना, पश्चिमी यूपी, बुंदेलखंड और पूर्वांचल को संतुलित प्रतिनिधित्व देना. इसके साथ ही ओबीसी और एससी वर्ग को कैबिनेट में जगह देकर 2027 चुनाव की तैयारी करना भी पार्टी का अहम एजेंडा है. बीजेपी ने पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर ओबीसी समाज को साधने की शुरुआत पहले ही कर दी है. 

इन चेहरों को मिल सकती है योगी कैबिनेट में जगह

1. भूपेंद्र चौधरी (जाट समाज)

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पश्चिमी यूपी के बड़े जाट नेता. मीडिया रिपोर्ट्स में उनके नाम को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है.

2. पूजा पाल (पाल समाज)

ओबीसी श्रेणी के महत्वपूर्ण समुदाय पाल समाज से नए चेहरे को शामिल किए जाने की चर्चा है.

3. कृष्ण पासवान (पासवान समाज)

दलित (एससी) प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए पासवान समाज से नए चेहरे की एंट्री की संभावनाएं जताई जा रही हैं.

4. रामरतन कुशवाहा (कुशवाहा समाज)

कुशवाहा समाज बीजेपी का मजबूत आधार रहा है. इस समुदाय से प्रतिनिधित्व बढ़ाने की संभावनाएं हैं.

5. मनोज पांडे (ब्राह्मण समाज)

ब्राह्मण समुदाय की हालिया सक्रियता और नाराजगी को देखते हुए नए ब्राह्मण चेहरों को शामिल किए जाने की चर्चा तेज है.

6. आशीष कुमार आशु (कुर्मी समाज)

कुर्मी समाज- जो ओबीसी राजनीति की धुरी माना जाता है, से अतिरिक्त प्रतिनिधित्व की तैयारी के संकेत मिल रहे हैं.

7. पद्मसेन चौधरी (कुर्मी समाज)

कुर्मी समाज से एक और दावेदार, जिन्हें संगठन और सरकार दोनों में उपयोगी माना जाता है.

कब होगा विस्तार?

ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, मकर संक्रांति (14–15 जनवरी 2026) के तुरंत बाद कैबिनेट विस्तार होने की सबसे अधिक संभावना है.

यह कैबिनेट विस्तार आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जातीय, क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को दुरुस्त कर भाजपा की जीत सुनिश्चित करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है. दिल्ली में हुई उच्च‑स्तरीय बैठकों ने इस अटकल को और मजबूती दी है कि टीम योगी में जल्द ही नए चेहरों की एंट्री देखने को मिलेगी.

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