- विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे को लेकर तीखी जुबानी जंग शुरू हो गई है
- कांग्रेस ने सपा को संकेत दिए हैं कि गठबंधन में मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण अपने पक्ष में करना चाहती है
- इमरान मसूद को मुस्लिम नेता के रूप में आगे बढ़ाकर कांग्रेस ने सपा पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव भले ही अभी कुछ महीने दूर हैं, लेकिन इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी के बीच छिड़ी जुबानी जंग ने माहौल बनाना शुरू कर दिया है. पहले कांग्रेस के राज्य प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सीट बंटवारे पर बराबरी वाली बात कही. वहीं इमरान मसूद ने भी गठबंधन को लेकर टिप्पणी की तो सपा से उदयवीर सिंह ने कहा कि उनसे क्या बात की जाएगी. हाईकमान ही सब कुछ तय करेगा. कांग्रेस सांसद इस पर चुप नहीं रहे और आरोप लगा दिया कि सपा को बोलने वाले मुसलमान नेता पसंद नहीं हैं. एक कदम और आगे बढ़ते हुए उन्होंने यहां तक कह दिया कि कांग्रेस से ज्यादा समाजवादी पार्टी को गठबंधन की जरूरत है.
उन्होंने यह भी कहा कि सपा ने 2024 में कांग्रेस से गठबंधन किया तो उसे 37 सीटें मिली थीं. इस तरह उनकी ओर से सपा को जवाब दिया गया है. साफ है कि इमरान मसूद की तल्खी यूं ही नहीं है और कांग्रेस ने सपा को एक संकेत देने की कोशिश की है. वह सपा पर दबाव बनाना चाहती है ताकि सीटों के बंटवारे पर बात हो तो वह ज्यादा डिमांड कर सके. यही नहीं जानकार मानते हैं कि एक रणनीति के तहत ही इमरान मसूद को आगे किया गया है ताकि वह मुस्लिम नेता के तौर पर उभर सकें. इसके अलावा सपा के लिए उन्हें घेरना भी मुश्किल होगा. वहीं इमरान मसूद खुलकर बोल रहे हैं.
इमरान मसूद सीधे अखिलेश पर भी कर रहे हमला
सहारनपुर के सपा सांसद ने 22 जून, 2026 को भी एक बयान दिया था. उनका कहना था कि यूपी में मुसलमानों के साथ हो रहे अन्याय पर उनकी (अखिलेश यादव) चुप्पी समझ से परे है। वे राम मंदिर की चंदा चोरी पर मुखर होकर बोलते हैं, लेकिन मुसलमानों पर हो रहे जुल्म पर चुप हो जाते हैं। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका संकेत बुलडोजर एक्शन और आजम खान के जेल जाने को लेकर भी था. यूपी की राजनीति को समझने वाले मानते हैं कि कांग्रेस चाहती है कि मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण वह अपने पक्ष में कर ले.
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सपा नेता आजम खां जेल में और अफजाल अंसारी मुखर नहीं
ऐसे समय में जब आजम खां जेल में हैं और फिलहाल कोई बड़ा मुस्लिम चेहरा सपा का नेता नहीं है. अफजाल अंसारी भले ही सीनियर हैं और सपा से सांसद हैं, लेकिन वह भी इन दिनों संभलकर चल रहे हैं. शायद सपा नेतृत्व से ही उन्हें कोई संदेश मिला है. माना जा रहा है कि इसीलिए कांग्रेस ने इमरान मसूद को आगे किया है. यूं भी कांग्रेस के पास फिलहाल कोई फायर ब्रांड और मुखर नेता नहीं है.
करीब 150 सीटों को ए ग्रेड वाला क्यों बता रही कांग्रेस
ऐसे में इमरान मसूद का आगे बढ़ना अहमियत रखता है. मुस्लिमों के मसले पर भी इमरान मसूद खुलकर बात करते रहे हैं. कांग्रेस के रणनीतिकारों को लगता है कि मुस्लिमों के मुद्दे उठाने से वह उन इलाकों में सपा के मुकाबले बढ़त बना सकेगी, जो मुस्लिम बहुल हैं. अब इसी के आधार पर वह ज्यादा सीटें मांग रही है और करीब 150 सीटों को अपने लिए ए ग्रेड वाला बता रही है. ये सीटें मुस्लिम बहुल हैं और कांग्रेस मानती है कि यदि गठबंधन में उसे इन पर मौका मिले तो वह अच्छा प्रदर्शन करेगी.
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