उत्तर प्रदेश के कन्नौज में समाजवादी पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष कैश खान एक बार फिर विवादों में हैं. इस बार उन पर एक बेसहारा गाय पर अपने पालतू कुत्तों से हमला कराने का आरोप लगा है. घटना का कथित सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया. शिकायत मिलने पर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर कैश खान और उनके एक सहयोगी के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. वहीं, कैश खान के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और प्रशासनिक कार्रवाई का मुद्दा भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है.
क्या है पूरा मामला?
मामला कन्नौज शहर के मोहल्ला बालापीर का है. शिकायतकर्ता अदील खान ने पुलिस को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि 23 जून की सुबह करीब 6:35 बजे सपा के पूर्व कोषाध्यक्ष कैश खान और उनके मजदूर जमील खान ने सड़क पर घूम रही एक बेसहारा गाय को घेर लिया. शिकायत के अनुसार दोनों ने अपने पालतू और हिंसक कुत्तों को गाय पर छोड़ दिया. आरोप है कि कुत्तों के हमले में गाय गंभीर रूप से घायल हो गई और बुरी तरह लहूलुहान हो गई.

Animal Cruelty Case: गाय पर हमले का CCTV वीडियो आया सामने
CCTV फुटेज से बढ़ी गंभीरता
शिकायतकर्ता का दावा है कि पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है. कथित वीडियो सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा बटोरी. पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है.
गाय को परिसर में बंद करने का आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि घायल होने के बाद गाय को कथित तौर पर एक गेस्ट हाउस परिसर में ले जाकर बंद कर दिया गया. आरोप है कि यह गेस्ट हाउस पुरातत्व विभाग की प्रतिबंधित जमीन पर कब्जा कर बनाया गया है. हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
एसपी के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर
बताया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर मामला पुलिस अधीक्षक तक पहुंचा. इसके बाद एसपी विनोद कुमार ने मामले का संज्ञान लेते हुए कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए. सदर कोतवाली पुलिस ने कैश खान और जमील खान के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है. मामले की जांच उपनिरीक्षक रक्षा सिंह को सौंपी गई है.
कौन हैं कैश खान?
कैश खान कन्नौज की राजनीति में एक चर्चित नाम माने जाते हैं. अखिलेश यादव के करीबी कहलाते हैं. वह समाजवादी पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष रह चुके हैं और स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं. पुलिस सूत्रों के अनुसार उनके खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. प्राप्त जानकारी के मुताबिक उन पर विभिन्न मामलों में लगभग 10 मुकदमे चल रहे हैं. पिछले वर्ष प्रशासन ने उन पर जिला बदर की कार्रवाई भी की थी.
जमीन कब्जाने के आरोप भी रहे चर्चा में
कैश खान पर इससे पहले पुरातत्व विभाग की जमीन और अन्य सरकारी भूमि पर कथित कब्जे के आरोप भी लग चुके हैं. पुलिस अधिकारियों द्वारा उनकी हिस्ट्रीशीट और हथियार लाइसेंस को लेकर भी प्रशासन को रिपोर्ट भेजे जाने की जानकारी सामने आई है. पुलिस का कहना है कि फिलहाल गाय पर हमले के मामले की जांच साक्ष्यों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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