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एक-दो नहीं 7 भर्ती परीक्षाओं में धांधली, झारखंड के छात्र क्यों कर रहे प्रदर्शन? JPSC-JSSC विवाद की पूरी कहानी

आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि राज्य की जांच एजेंसियों ने कई मामलों में कार्रवाई जरूर की है, लेकिन अब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आई है.

एक-दो नहीं 7 भर्ती परीक्षाओं में धांधली, झारखंड के छात्र क्यों कर रहे प्रदर्शन? JPSC-JSSC विवाद की पूरी कहानी
झारखंड में विरोध प्रदर्शन
ANI

झारखंड में 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब एक व्यापक अभियान का रूप ले चुका है. आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि सिर्फ 14वीं जेपीएससी ही नहीं बल्कि पिछले सात वर्षों में जेपीएससी और जेएसएससी की कई भर्ती परीक्षाएं विवादों में रही हैं.

इसलिए वे केवल एक परीक्षा की नहीं बल्कि वर्ष 2019 से अब तक आयोजित सभी विवादित भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं. छात्रों का आरोप है कि राज्य में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता लगातार सवालों के घेरे में रही है. कहीं पेपर लीक के आरोप लगे, कहीं उत्तर कुंजी को लेकर विवाद हुआ, कहीं रिजल्ट पर सवाल उठे तो कहीं चयन प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां सामने आईं. उनका कहना है कि यदि इन सभी मामलों की एक साथ स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाती है, तभी पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकेगा और युवाओं का भरोसा भर्ती प्रणाली में लौटेगा.

आखिर CBI जांच की मांग क्यों?

आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि राज्य की जांच एजेंसियों ने कई मामलों में कार्रवाई जरूर की है, लेकिन अब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आई है. उनका आरोप है कि भर्ती घोटालों में केवल कुछ लोगों की गिरफ्तारी से मामला खत्म नहीं हो जाता. यदि किसी संगठित गिरोह, बिचौलियों, कोचिंग नेटवर्क या अधिकारियों की मिलीभगत रही है तो उसकी निष्पक्ष जांच केवल केंद्रीय एजेंसी ही कर सकती है.

छात्रों की प्रमुख मांगें हैं

-वर्ष 2019 से अब तक JPSC और JSSC की सभी विवादित परीक्षाओं की CBI जांच.
-जिन परीक्षाओं में अनियमितता साबित हो, उन्हें रद्द कर दोबारा परीक्षा कराई जाए.
-दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों, बिचौलियों और लाभार्थियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो.
-भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए.
-भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए.

पिछले 7 साल में JPSC-JSSC की कौन-कौन सी भर्ती परीक्षाएं विवादों में रहीं-

2019-20
JPSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में रिजल्ट, मेरिट सूची और चयन प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए. कई मामलों में हाईकोर्ट तक याचिकाएं पहुंचीं.

2021
JPSC की संयुक्त सिविल सेवा भर्ती को लेकर उत्तर कुंजी और चयन प्रक्रिया पर विवाद सामने आए.
अभ्यर्थियों ने पारदर्शिता की मांग को लेकर प्रदर्शन किए.

2022
JSSC की कई भर्ती परीक्षाओं में उत्तर कुंजी, कट-ऑफ और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए. अभ्यर्थियों ने आयोग पर पारदर्शिता नहीं बरतने का आरोप लगाया.

2023
JSSC CGL परीक्षा सबसे बड़े विवादों में रही. परीक्षा से पहले पेपर लीक के आरोप लगे. सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र वायरल होने का दावा किया गया. मामला हाईकोर्ट पहुंचा और जांच की मांग उठी.

2024
JGGLCCE (JSSC CGL) परीक्षा को लेकर व्यापक विवाद हुआ. अभ्यर्थियों ने पेपर लीक, संगठित नकल और डमी कैंडिडेट बैठाने के आरोप लगाए. विपक्ष ने भी CBI जांच की मांग उठाई

2025
JSSC की कुछ अन्य भर्तियों में चयन प्रक्रिया और रिजल्ट को लेकर अभ्यर्थियों ने विरोध दर्ज कराया.
भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर लगातार सवाल उठते रहे.

2026
14वीं JPSC पीटी परीक्षा कथित अनियमितताओं को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन का केंद्र बनी.
CID जांच शुरू हुई और कई गिरफ्तारियां हुईं. छात्र परीक्षा रद्द करने, CBI जांच और पिछले सात वर्षों की सभी विवादित JPSC-JSSC भर्तियों की जांच की मांग कर रहे हैं.

आंदोलन क्यों हुआ बड़ा?

14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा में कथित धांधली के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन अब पूरे राज्य के अभ्यर्थियों का आंदोलन बन चुका है. रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार धरना-प्रदर्शन हो रहे हैं. छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो आमरण अनशन पर बैठे, विभिन्न छात्र संगठनों ने आंदोलन को समर्थन दिया और कई राजनीतिक दलों ने भी सरकार पर दबाव बनाया.

सरकार का क्या कहना है?

राज्य सरकार का कहना है कि जिन मामलों में शिकायतें मिली हैं, उनकी जांच की जा रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी सार्वजनिक रूप से कहा है कि छात्रों के साथ न्याय होगा और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. वहीं 14वीं जेपीएससी पीटी मामले में सीआईडी जांच जारी है और कई लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है.

छात्रों का तर्क

छात्रों का कहना है कि अगर पिछले सात वर्षों की सभी विवादित भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो हर नई भर्ती पर सवाल उठते रहेंगे.  उनका मानना है कि यह सिर्फ नौकरी का नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य और राज्य की भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल है. इसी कारण आंदोलनकारी अब केवल एक परीक्षा की जांच नहीं, बल्कि पिछले सात वर्षों की सभी विवादित JPSC और JSSC भर्ती प्रक्रियाओं की CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं.

जानकारी के लिए बता दें कि जेपीएससी-जेएसएससी विवाद को लेकर सरकार की तरफ से एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है. इस कमेटी में राज्य के चार मंत्रीगण शामिल हैं. जिसमें कांग्रेस की तरफ से दीपिका पांडे सिंह, झारखंड मुक्ति मोर्चा की तरफ से चमरा लिंडा और सुदिव्य कुमार सोनू तो वहीं राजद की तरफ से संजय प्रसाद शामिल हैं. इस कमेटी की कार्यवाही को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए इस कमेटी में अपर मुख्य सचिव अजय कुमार, जो कि स्वास्थ्य विभाग के सचिव हैं, उन्हें भी शामिल किया गया है.

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