- यूपी के चार हजार से अधिक गैर सहायता प्राप्त मदरसों की एटीएस जांच का रास्ता साफ हो गया है.
- एटीएस के अधिकारी इन मदरसों की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि मदरसों को कहां से पैसा मिल रहा है?
- सरकार के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप से इनकार किया है.
उत्तर प्रदेश के चार हजार से अधिक मदरसों की ATS जांच होगी. गैर सहायता प्राप्त यूपी के इन मदरसों को पैसा कहां से आ रहा है, एटीएस इसकी जांच करेगी. मदरसों की एटीएस जांच के लिए यूपी सरकार ने पिछले साल दिसंबर में ही आदेश दिया था, जिसे मदरसा प्रबंधन समिति और टीचर्स एसोसिएशन, मदरसा अरबिया ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. लेकिन अब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है. जिससे उत्तर प्रदेश में संचालित 4,000 से अधिक गैर सहायता प्राप्त मदरसों की फंडिग की आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) द्वारा जांच कराए जाने का रास्ता साफ हो गया है.
अदालत ने खारिज की याचिका
न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति विवेक शरण की खंडपीठ ने मदरसा प्रबंधन समिति और टीचर्स एसोसिएशन, मदरसा अरबिया की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी. याचिकाकर्ताओं ने अदालत से नौ दिसंबर, 2025 के आदेश को रद्द करने की मांग की थी, जिसके तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने एटीएस के माध्यम से उनके संस्थानों के वित्तपोषण की जांच शुरू की थी.
पहले भी हो चुकी जांच, यह परेशान करने की कोशिशः याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि इससे पहले भी लगभग इसी आधार पर दो जांच बार की जा चुकी हैं, जिनमें उनके खिलाफ कुछ भी नहीं मिला था. उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा जांच याचिकाकर्ताओं को परेशान करने की एक कोशिश मात्र है, इसलिए यह जांच गलत है और इसपर रोक लगनी चाहिए.
सरकार ने कहा- जांच कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं
वहीं, अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने अदालत को बताया कि विभिन्न स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर यह जांच केवल याचिकाकर्ताओं के खिलाफ नहीं, बल्कि राज्य के 4,000 संस्थानों के खिलाफ की जा रही है. उन्होंने कहा कि जांच कोई दंडात्मक या जबरन की जाने वाली कार्रवाई नहीं है और याचिकाकर्ताओं को अपना जवाब प्रस्तुत करने की पूरी स्वतंत्रता है.
अदालत ने माना- यह जबरन की जाने वाली कार्रवाई नहीं
राज्य सरकार के पक्ष पर विचार करते हुए खंडपीठ ने याचिका खारिज कर दी और कहा, 'मामले के तथ्यों को देखते हुए अदालत का स्पष्ट मत है कि जांच को याचिकाकर्ताओं के खिलाफ जबरन की जाने वाली कार्रवाई नहीं कहा जा सकता. इसलिए अदालत फिलहाल याचिका पर विचार करने की इच्छुक नहीं है.'
हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता जांच समिति के समक्ष अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए स्वतंत्र हैं और यदि कोई जवाब दाखिल किया जाता है, तो उस पर विचार किया जाएगा.
विदेशों से पैसा लेने के खुफिया इनपुट पर जांच
मदरसों के खिलाफ यह जांच खुफिया सूचनाओं के आधार पर शुरू की गई थी, जिनमें विदेशी चंदा प्राप्त होने के आरोप लगाए गए थे. इन सूचनाओं में बिना वित्तीय दस्तावेजों या आय के सत्यापित स्रोतों के विभिन्न स्थानों पर बड़े पैमाने पर संस्थानों के निर्माण का उल्लेख किया गया था.
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष बोले- जांच का स्वागत
इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने कहा, "उत्तर प्रदेश में जब से भाजपा की सरकार बनी है तब से लेकर आज तक 5 बार जांच के आदेश दिए गए लेकिन 5वीं बार जो जांच के आदेश दिए गए कि ATS मदरसों की जांच करेगी. मदरसों के लोग जांच से घबराते नहीं है और मैं जांच का स्वागत करता हूं. हम पिछले बार भी जांच में सहयोग किए थे और इस बार भी हम सहयोग करेंगे."
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