- यूपी चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोकदल और समाजवादी पार्टी के बीच वार पलटवार का दौर जारी है
- अखिलेश के चवन्नी को रुपया बना देने वाले बयान को लेकर नाराज आरएलडी उन पर हमलावर है.
- अखिलेश ने दावा किया है कि पीडीए के डर से बीजेपी अपने सहयोगी दलों को ज्यादा सीटें देने जा रही है
उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव से पहले कुछ अलग ही चल रहा है.राष्ट्रीय लोकदल और समाजवादी पार्टी एक दूसरे पर जमकर वार पलटवार कर रहे हैं. सपा प्रमुख अखिलेश यादव के चवन्नी को रुपया बना देने वाले बयान को लेकर नाराज आरएलडी लगातार सपा और अखिलेश यादव पर हमलावर है. इस बीच अखिलेश यादव ने न सिर्फ आरएलडी बल्कि बीजेपी के सभी चार सहयोगी दलों पर निशाना साधते हुए दावा कर दिया कि पीडीए के डर से बीजेपी अपने सहयोगी दलों को ज्यादा सीटें देने जा रही है.
अखिलेश यादव के दावे पर पलटवार
अखिलेश यादव के दावे के बाद बीजेपी के सहयोगी दल अखिलेश यादव पर निशाना साध रहे हैं. आरएलडी ने कहा कि सपा और कांग्रेस इंडिया गठबंधन में बराबर के हिस्सेदार हैं, इसलिए सपा कांग्रेस को 200 सीटें देने जा रही है. वहीं सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को दूसरों की मदद से पहले अपनी सुरक्षा का ध्यान रखने का सुझाव देते हुए हमला किया. अपना दल ने भी कहा कि उनकी पार्टी मजबूती से बीजेपी के साथ खड़ी है.
आरोप प्रत्यारोप के दौर में राष्ट्रीय लोकदल और सपा के बीच तल्खी को समझना भी जरूरी है. दरअसल बीते विधानसभा चुनाव में आरएलडी का गठबंधन सपा से था. सपा ने आरएलडी को 33 सीटें दीं. आरएलडी ने तब 33 में से 8 सीटों पर जीत हासिल की थी. उसका कुल वोट परसेंटेज 2.92% रहा. विधानसभा चुनावों के बाद तय फॉर्मूला के आधार पर सपा ने जयंत चौधरी को राज्यसभा भेजा. हालांकि लगभग दो साल चली दोस्ती लोकसभा चुनाव से पहले टूट गई और आरएलडी ने बीजेपी का साथ चुन लिया.
2022 के विधानसभा चुनाव में था सपा-RLD गठबंधन
आरएलडी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में कुल 8 सीटें जीतीं.हालांकि बाद में उपचुनाव में एक सीट पर हुई जीत के बाद आरएलडी के वर्तमान विधायकों की संख्या 9 हो गई है.जिन जिलों में आरएलडी को जीत मिली वो सब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थित हैं, इनमें मुजफ्फरनगर, बागपत, शामली, मेरठ और हाथरस शामिल हैं. ये वो दौर था जब किसान आंदोलन की वजह से पश्चिमी यूपी में रूख बीजेपी के खिलाफ दिखाई दे रहा था. जयंत के सपा के साथ आने से मना गया कि आरएलडी को भी बड़ा फायदा होगा और समाजवादी पार्टी भी पश्चिम में अच्छा प्रदर्शन करेगी.
सपा और आरएलडी के गठबंधन में अगर ये देखा जाये कि फायदा किसको हुआ और नुकसान किसको हुआ तो शायद फायदे में आरएलडी ही रही क्योंकि पश्चिम में सपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था, जबकि 2017 में एक सीट जीतने वाली आरएलडी ने 8 विधायक चुनाव जीत गए. अगर जीत का परसेंटेज देखें तो आरएलडी को 33 में से सिर्फ 8 सीटों पर जीत मिली. यानी जीत का प्रतिशत एक चौथाई से थोड़ा कम ही रहा. माना गया कि आरएलडी अपने प्रभाव वाले वोट सपा के पक्ष में ट्रांसफर नहीं करा सकी. अगर आरएलडी के वोट ठीक से ट्रांसफर हुए होते तो सपा के नंबर पश्चिम में भी बेहतर दिखाई दिए होते.
आरएलडी के वर्तमान विधायकों की सूची
- अशरफ अली - थाना भवन - शामली
- प्रसन्न कुमार - शामली विधानसभा - शामली
- राजपाल सिंह - बुढ़ाना - मुजफ्फरनगर
- अनिल कुमार - पुरकाजी - मुजफ्फरनगर
- गुलाम मोहम्मद - सिवालखास - मेरठ
- डॉ अजय कुमार - छपरौली - बागपत
- प्रदीप कुमार - सादाबाद - हाथरस
- मदन भैया - खतौली - मुजफ्फरनगर (उपचुनाव में जीतकर विधायक बने)
- मिथिलेश पाल - मीरापुर - मुजफ्फरनगर (चंदन चौहान के सांसद बनने के बाद उपचुनाव जीतीं)
RLD फिलहाल बीजेपी के साथ
लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोक दल ने बीजेपी का दामन थाम लिया. बीजेपी ने आरएलडी को लोकसभा की दो सीटें दीं, इनमें बागपत और बिजनौर लोकसभा शामिल थीं. बीजेपी के साथ आकर भी आरएलडी को फायदा ही मिला. लोकसभा की दोनों सीटों पर आरएलडी के प्रत्याशी चुनाव जीत गए. इसके अलावा खुद जयंत चौधरी केंद्र में मंत्री बनाए गए. यूपी सरकार की कैबिनेट में भी आरएलडी को जगह दी गई और अनिल कुमार योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे.
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में आरएलडी को बीजेपी कितनी सीटें देगी, फिलहाल तो ये साफ नहीं है. लेकिन आरएलडी का दावा है कि जब सपा ने उसे 33 सीटें पिछले विधानसभा में दी थीं तो बीजेपी को इस नंबर को बढ़ाकर कम से कम 35 करना चाहिए. हालांकि आरएलडी खुलकर सीटों की बात नहीं कर रही लेकिन ऑफ रिकॉर्ड ये दावा जरूर किया जाता है. बीजेपी आरएलडी के इस दावे पर साफ कहती है कि पार्टी के जनाधार को देखते हुए 35 का फ़िगर बहुत बड़ा है. आरएलडी को सीटें कम करनी ही होंगी.
RLD की बीजेपी पर दबाव वाली रणनीति
भारतीय जानता पार्टी के नेताओं की दलील ये है कि ज्यादा पर लड़कर कम जीतने से बेहतर है कम पर लड़कर ज्यादा जीता जाए. इस लिहाज से बीजेपी नेता आरएलडी को 20 के अंदर समेटने की कोशिश में हैं. इस बीच केंद्रीय मंत्री और आरएलडी के मुखिया जयंत चौधरी ने पश्चिम के कुछ जिलों के दौरे करके अपनी तैयारियां शुरू दिखाकर बीजेपी पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम करने के अलावा अपनी पार्टी के संगठन में बदलाव कर ये संकेत देने की कोशिश की है कि वो विधानसभा चुनाव को लेकर बेहद गंभीर है.
बीजेपी अपने सहयोगियों को कितनी सीटें देगी, ये तो फिलहाल साफ नहीं है लेकिन अखिलेश यादव के सोशल मीडिया पोस्ट में आरएलडी को 73, सुभासपा को 39, निषाद पार्टी को 31 और अपना दल को 19 सीटें देने का दावा करने को अखिलेश यादव के माइंड गेम के तौर पर देखा जा रहा है. इन नंबर्स को जोड़ लें तो ये आंकड़ा 162 हो रहा है. यानी 403 में बीजेपी अपने सहयोगियों को 162 सीटें देने जा रही है. जाहिर है ये आंकड़े ऐसे हैं, जिस पर किसी को यकीन न हो लेकिन अखिलेश के दावे ने चर्चा तो जरूर गर्म कर दी है.
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