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अखिलेश के PDA की काट, OBC कार्ड और ब्राह्मणों पर जोर, यूपी बीजेपी की टीम ने साधे सामाजिक समीकरण

यूपी बीजेपी की नई टीम में खासकर ब्राह्मणों और ओबीसी पर सबसे ज्यादा फोकस किया गया है. पंकज चौधरी की टीम में जाति के आधार पर सबसे अधिक नुमाइंदगी ब्राह्मणों की ही है.

अखिलेश के PDA की काट, OBC कार्ड और ब्राह्मणों पर जोर, यूपी बीजेपी की टीम ने साधे सामाजिक समीकरण
यूपी बीजेपी की टीम में क्षेत्रीय संतुलन. (फाइल फोटो)
  • यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने 64 सदस्यों वाली नई टीम बनाई है जिसमें पिछली टीम से अधिक बदलाव किए गए हैं
  • टीम में ओबीसी वर्ग के 29 सदस्य शामिल हैं जिसमें जाट, कुर्मी, यादव, पाल, गुर्जर और अन्य जातियां शामिल हैं
  • अनुसूचित जाति के 7 सदस्य और अनुसूचित जनजाति का एक सदस्य टीम में शामिल कर दलित समाज से जुड़ाव बढ़ाया गया है
लखनऊ:

उत्तर प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष पंकज चौधरी की भारीभरकम टीम की घोषणा गुरुवार को कर दी गई. इसमें 64 सदस्य हैं जो पिछली बार की तुलना में अधिक हैं. पिछली टीम के आधे से अधिक नेताओं की छुट्टी कर दी गई है. युवाओं और महिलाओं को मौका देते हुए क्षेत्रीय संतुलन साधा गया है. लेकिन जिस बात ने सबसे अधिक ध्यान खींचा वह है सामाजिक समीकरण साधने की कवायद, जिसके जरिए बीजेपी ने अखिलेश यादव के सफल पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए की काट ढूंढने का प्रयास किया है.

पंकज चौधरी की टीम में 29 ओबीसी

खुद कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी की टीम में ओबीसी पर जबर्दस्त फोकस किया गया है. इस टीम में पिछड़े और अनुसूचित समाज को विशेष वरीयता दी गई है. छह में चार क्षेत्रीय अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से बनाए गए. उत्तर प्रदेश में ओबीसी की संख्या करीब 55 प्रतिशत मानी जाती है. 64 में सबसे अधिक ओबीसी वर्ग के 29 पदाधिकारी बनाए गए हैं जो टीम में करीब 45 प्रतिशत है.

इसमें सर्वाधिक तीन- तीन जाट और कुर्मी, दो-दो यादव, पाल, गुर्जर, शाक्य व लोधी को जगह दी गई है. साथ ही अन्य 13 ओबीसी में एक-एक पद पर कुशवाह, कोरी, गोस्वामी, चौरसिया, लोनिया चौहान, तेली, निषाद, बिंद, मौर्य, राजभर, विश्वकर्मा, जायसवाल और सैनी को अवसर दिया गया है.

गैर यादव ओबीसी को अपने पाले में करने की कोशिश

महत्वपूर्ण संदेश यह है कि बीजेपी पिछले चार चुनावों की तरह इस बार भी गैर यादव ओबीसी को अपने पाले में लाने का प्रयास कर रही है. पिछले लोकसभा चुनाव में यह वोट बीजेपी से खिसककर समाजवादी पार्टी के पक्ष में चला गया था. चौधरी की टीम में केवल दो यादवों को जगह मिली है. जबकि गैर यादव पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग से 27 नेताओं को जगह दी गई है.

जाट नेताओं को टीम में जगह

गीता शाक्य, शंकर लोधी, दिलीप पटेल और राजेश चौधरी को महामंत्री बनाया गया है, जो शाक्य, लोधी, कुर्मी और जाटों की नुमाइंदगी करते हैं. गैर यादव ओबीसी को नुमाइंदगी देते हुए पूजा पाल और ध्रुव विजय शाक्य को भी जगह मिली है. बीजेपी ने पश्चिम उत्तर प्रदेश पर जोर लगाया है और यहां से जाट नेताओं को टीम में जगह दी गई है. दिल्ली आईआईटी से पढ़े लिखे और पश्चिम क्षेत्र के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनीवाल को युवा जाट नेता के रूप में दोबारा उपाध्यक्ष बनाया गया है. मेरठ के जाट चेहरे देवेंद्र सिंह को किसान मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बड़ा संदेश दिया गया है.

 पश्चिम क्षेत्र की कमान नवाब सिंह नागर को देकर पार्टी ने गुर्जर वोटों को बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. ओबीसी जातियों में कुर्मी समाज को 3 (5 प्रतिशत), जाट को 3 (5 प्रतिशत), यादव, पाल, गुर्जर, लोधी और शाक्य समाज को भी सम्मानजनक प्रतिनिधित्व देकर सामाजिक न्याय की रूपरेखा तैयार की गई है.

अनुसूचित जाति के 7 सदस्य

बीजेपी ने अनुसूचित वर्ग में पासी को सबसे ज्यादा चार पद दिए हैं. एक-एक पद वाल्मीकि और जाटव को दिए गए. एसटी के रूप में गोंड को भी अवसर दिया गया है. दलित समाज से जुड़ाव गहरा करने के उद्देश्य से अनुसूचित जाति के 7 सदस्यों (11 प्रतिशत) और अनुसूचित जनजाति के 1 सदस्य (2 प्रतिशत) को टीम में स्थान मिला है.

11 ब्राह्मण चेहरों पर दांव

 दूसरा बड़ा सामाजिक संदेश ब्राह्मणों को लेकर दिया गया है. पिछले कुछ वर्षों में यह धारणा बनी है कि ब्राह्मण बीजेपी से नाराज हैं. खासतौर से यूजीसी गाइडलाइन्स के मुद्दे पर ब्राह्मणों की नाराजगी दिखाई दी थी. चौधरी की टीम में जाति के आधार पर सबसे अधिक नुमाइंदगी ब्राह्मणों की ही है. टीम में 10 ब्राह्मणों को जगह मिली है, जो कुल टीम का सर्वाधिक 15 प्रतिशत हैं. जबकि सामान्य वर्ग के 28 चेहरों को स्थान मिला है और इनमें ब्राह्मणों की हिस्सेदारी सबसे अधिक करीब 37 प्रतिशत है.

 अभिजात मिश्रा को महामंत्री बनाया गया, वहीं बृज बहादुर, अर्चना मिश्रा, शंकर गिरी, अंकुर शर्मा, यतेंद्र शर्मा, रजनी पांडे के अलावा अवध के क्षेत्रीय अध्यक्ष के रूप में अवधेश द्विवेदी को अवसर दिया गया. कार्यालय मंत्री व सह मंत्री और अन्य भूमिकाओं में कई ब्राह्मणों को जगह दी गई.

 7 क्षत्रियों को दी जगह

सामान्य वर्ग में ब्राह्मणों के बाद क्षत्रियों की संख्या सबसे अधिक 7 है जो कुल टीम का करीब 11 प्रतिशत है. पश्चिम क्षेत्र से दिग्गज क्षत्रिय चेहरा सुरेश राणा को हरियाणा व बंगाल चुनाव में बेहतर जिम्मेदारी निभाने का फायदा मिला, उन्हें उपाध्यक्ष बनाया गया है. जबकि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के छोटे बेटे नीरज सिंह को भी टीम में जगह मिली है. इसके अलावा चार भूमिहार, दो वैश्य व एक-एक कायस्थ और त्यागी को जगह दी गई है.

क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश

नई टीम में अवध क्षेत्र को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है, जहां से 16 पदाधिकारियों (25 प्रतिशत) को चुना गया है. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाले काशी क्षेत्र से 13 पदाधिकारियों (20 प्रतिशत) को टीम में जगह दी गई है. पश्चिम उत्तर प्रदेश से 10 (16 प्रतिशत), ब्रज क्षेत्र से 9 (14 प्रतिशत) तथा कानपुर और गोरखपुर क्षेत्रों से 8-8 पदाधिकारियों (13-13 प्रतिशत) को शामिल कर पूरे सूबे को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास किया गया है.

युवाओं और महिलाओं को बड़ा मौका

प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की इस नई टीम की सबसे बड़ी खासियत इसकी शैक्षणिक योग्यता और युवा ऊर्जा है. टीम के 64 पदाधिकारियों में से 29 पोस्ट ग्रेजुएट, 25 ग्रेजुएट, और 4 पीएचडी धारक हैं. इसके अलावा बी.टेक, एलएलबी और एमबीए जैसी व्यावसायिक डिग्री वाले चेहरों को भी संगठन में जिम्मेदारी दी गई है. इससे पार्टी की प्रशासनिक और रणनीतिक क्षमता को नई धार मिलेगी.

युवाओं को मौका देने की रणनीति के तहत उम्र के समीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है. टीम में 50 साल से कम आयु वाले नेताओं की भारी बहुलता है. 35 वर्ष से कम उम्र के 2, 40 वर्ष से कम के 11, 45 वर्ष से कम के 16 और 50 वर्ष से कम आयु के 27 नेताओं को शामिल कर संगठन में नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने का साफ संदेश दिया गया है.

 12 महिलाओं को मिली जगह

संगठन में आधी आबादी की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए कुल 12 महिला पदाधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से नवाजा गया है. इनमें 4 महिला उपाध्यक्ष, 1 महिला महामंत्री और 7 महिलाओं को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

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