मुजफ्फरनगर सिर्फ एक शहर नहीं बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन का गढ़ भी रहा है. यहां अब तक या तो कई बड़े आंदोलन हुए या फिर उनकी शुरुआत हुई लेकिन आज हम आपको एक ऐसे धरने के बारे में बताने जा रहे हैं जो बीते 30 साल बदस्तूर जारी है. इस धरने की मांग क्या है और कई साल से धरने पर बैठे व्यक्ति कौन हैं? ये सब जानने के लिए NDTV की टीम खुद पहुंची मुजफ्फर नगर. जब आप मुजफ्फर नगर के सबसे व्यस्ततम चौराहे शिव चौराहे के नज़दीक पहुंचेंगे तो यहां एक दुकान के सामने आपको सफ़ेद बाल, सफ़ेद लुंगी और सफेद कुर्ते में अख़बार पढ़ते एक बुजुर्ग मास्टर जी दिखेंगे. इनका नाम विजय सिंह है, जो यहां लगातार धरना दे रहे हैं.

आपको यहां एक दुकान के बाहर बिछी दरी और उसके ऊपर टंगे बैनर में लिखी उनकी मांगें भी दिखेंगी.इस धरने की खास बात है दो हिंदी के अखबार. बताया जाता है कि इन्ही दो अखबारों के सहारे मास्टर विजय सिंह का धरना 30 साल से चल आ रहा है. रोजाना जैसे कोई स्कूल जाता है या फिर नौकरी करने नियत समय पहुंचता है. वैसे ही मास्टर विजय सिंह रोज़ अपने गांव से सुबह 8 बजे धरना देने मुजफ्फर नगर के शिवमूर्ति चौराहे पहुंचते हैं. मास्टर विजय सिंह करीब 25 साल की उम्र में यानि युवावस्था में धरना शुरू किया था और आज बुढ़ापे की दहलीज़ पर खड़े हैं लेकिन सरकारें बदली. जांच हुई लेकिन धरना कोई न तोड़वा सका.
गांव की बेशक़ीमती ज़मीन को क़ब्ज़े से मुक्त कराने की मांग
मास्टर विजय सिंह का धरना 26 फ़रवरी 1996 में अपने गांव चौसाना की करोड़ों की ज़मीन को उस वक्त के ताकतवर विधायक ठाकुर जगत सिंह के अवैध क़ब्ज़े से मुक्त कराने के लिए शुरु हुआ था. उनके धरने के बाद जब जाँच हुई तब पता चला कि चौसाना वासी ही नहीं पश्चिमी उप्र के कई गांवों में ग्रामसभा, तालाब और वन क्षेत्र की ज़मीन को भूमाफ़िया ने हड़प लिया.फिर क्या था सरकारें बदली, जांच पर जांच होती रही फाइलें मुजफ्फरनगर से लखनऊ जाती रहीं लेकिन गांव की ज़मीन भूमाफियाओं से नहीं छुड़वाई जा सकी.साल दर साल बीत रहे हैं लेकिन मास्टर विजय सिंह का धरना खत्म नहीं हुआ. अब उनका गांव चौसाना भी मुजफ्फरनगर से शामली जिले में चला गयालेकिन धरना अब भी मुजफ्फरनगर में चला रहे हैं.

खुद को गांधीवादी बताते हैं लेकिन परिवार उनको सनकी कहता है
मास्टर विजय सिंह कहते हैं कि मांग जब तक पूरी नहीं होगी धरना चलता रहेगा. मेरा मानना है कि या तो शिकायत न करो जब शिकायत सही है तो फिर इसे अंजाम तक पहुंचाना भी मेरी ज़िम्मेदारी है. वो सरकार को चुनौती देते कहते हैं कि अगर मेरी शिकायत ग़लत है तो मुझे जेल भेज दो मैं जेल जाने को तैयार हूं. लेकिन जब जांच रिपोर्ट कह रही है कि ज़मीन पर अवैध क़ब्ज़ा है तो फिर सरकार कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है.वो कहते हैं कि योगी जी ने भी जांच करवाई है जनहित का मामला है.
वो कहते हैं कि 4000 बीघे ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर लिया गया. गांधीवादी हूं मेरा हिंसा में भरोसा नहीं है लेकिन इस उम्र में भी आशावादी हूं. उनके धरने पर परिवार के लोग क्या कहते हैं इस सवाल पर वो हंसते हुए कहते हैं कि परिवार के लोग मुझे मेंटल कहते हैं. कौन परिवार ये सब सहेगा, मेरे पास संपत्ति के नाम पर बस एक ये दरी और बैनर है. विजय सिंह की आंखें शून्य को निहार रही हैं और फिर मुझे देखकर बोलते हैं कि मेरे पास कुछ नहीं है बस मेरे सवाल बहुमूल्य हैं लेकिन सवाल यही है कि इन सवालों का सरकार की नज़रों में क्या मोल है ?
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