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15% डाउन पेमेंट और लकी ड्रॉ का खेल, जानिए कानपुर नगर निगम में कैसे चलती थी आगरा के गोविंद शर्मा की हुकूमत?

कानपुर के पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बड़े नेक्सस का खुलासा किया. उन्होंने बताया कि नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय की जांच और आदेश के बाद 7 फर्मों और उनके संचालकों के खिलाफ 6 अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं.

15% डाउन पेमेंट और लकी ड्रॉ का खेल, जानिए कानपुर नगर निगम में कैसे चलती थी आगरा के गोविंद शर्मा की हुकूमत?
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़े नेक्सस का क‍िया खुलासा.
  • कानपुर नगर निगम में टेंडर माफिया के सिंडिकेट का पर्दाफाश 2 ठेकेदार गिरफ्तार
  • सीएम की फटकार के बाद सिंडिकेट का भंडाफोड़, सरगना फरार
  • 7 फर्मों पर FIR, 100 करोड़ के टेंडर रद्द, जांच के लिए SIT गठित

कानपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक सख्त फटकार ने कानपुर नगर निगम (KMC) में सालों से जमे भ्रष्टाचार के दीमक को बेनकाब कर दिया है. 22 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान सीएम योगी ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और धांधली को लेकर अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई थी. इस फटकार का असर यह हुआ कि महज कुछ ही घंटों में नगर निगम में हड़कंप मच गया और 100 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर निरस्त कर दिए गए. अब इस पूरे टेंडर सिंडिकेट पर पुलिस और प्रशासन का हथौड़ा चल रहा है.

क्या है पूरा मामला और कैसे हुई कार्रवाई?

मंगलवार को कानपुर के पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बड़े नेक्सस का खुलासा किया. उन्होंने बताया कि नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय की जांच और आदेश के बाद 7 फर्मों और उनके संचालकों के खिलाफ 6 अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं. इनमें से 5 मुकदमे नगर आयुक्त की तहरीर पर स्वरूप नगर थाने में, जबकि छठा मुकदमा एक पीड़ित ठेकेदार सनी सिंह की शिकायत पर फजलगंज थाने में दर्ज किया गया है.
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सिंडिकेट से जुड़े दो बड़े ठेकेदारों संदीप जैन और रज्जन बाजपेई को गिरफ्तार कर लिया है. हालांकि, इस पूरे कॉकस का मास्टरमाइंड और सरगना गोविंद शर्मा पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया है. उसकी आखिरी लोकेशन राजस्थान में मिली है और जल्द ही उसे गिरफ्तार करने का दावा किया जा रहा है.

इन दागी फर्मों पर गिरी गाज

जिन फर्मों के खिलाफ धोखाधड़ी, रंगदारी और डराने-धमकाने की धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए हैं, उनमें मेसर्स दिलीप बाजपेई, मेसर्स अजय इंटरप्राइजेज, मेसर्स पारसनाथ बिल्डर्स, कैला इंटरप्राइजेज, तिरुपति ट्रेडर्स और जगदंबा इंटरप्राइजेज (दो मुकदमे) शामिल हैं। जल्द ही सातवीं एफआईआर भी दर्ज होने वाली है. 

कैसे काम करता था टेंडर माफिया का कॉकस?

पुलिस कमिश्नर के खुलासे के मुताबिक, कानपुर नगर निगम में ठेकों का एक पूरा सिंडिकेट एक्टिव था. छोटे कामों के लिए 400 और बड़े कामों के लिए 27 फर्में रजिस्टर्ड थीं, लेकिन काम किसे मिलेगा, यह सिर्फ सरगना गोविंद शर्मा तय करता था. मूल रूप से आगरा का रहने वाला गोविंद शर्मा पहले मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में काम करता था. कानपुर आकर उसने ऐसा जाल बिछाया कि सभी ठेकेदार उसके नियंत्रण में आ गए. 

लकी ड्रॉ का फर्जी खेल

गोविंद शर्मा ठेकेदारों को डरा-धमका कर 15 प्रतिशत डाउन पेमेंट पर टेंडर डलवाता था. इसके बाद 85 प्रतिशत पर एक ही रेट खुलने पर लकी ड्रॉ का नाटक किया जाता था. इस सांठगांठ के जरिए अंततः टेंडर गोविंद की ही किसी चहेती फर्म को मिल जाता था.

SIT करेगी भ्रष्टाचार के इस तिलिस्म की जांच

इस पूरे खेल में सफेदपोशों और निगम के किन अधिकारियों की मिलीभगत थी? यह सिंडिकेट किसके संरक्षण में फल-फूल रहा था? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए ADCP सेंट्रल डॉ. अर्चना सिंह के नेतृत्व में 4 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है. इसमें ACP स्वरूप नगर ज्योति श्री, फजलगंज इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय और स्वरूप नगर इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह शामिल हैं। SIT अब ब्लैक लिस्टेड फर्मों के GST नंबर, बैंक खातों और उनकी अन्य फर्मों की कुंडली खंगालेगी. आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी. 

100 करोड़ के टेंडर रद्द, ठेकेदारों में मची भगदड़

नगर आयुक्त ने भ्रष्टाचार की जड़ें काटने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. 100 करोड़ के टेंडर निरस्त करने के साथ ही ठेकेदारों के भुगतान पर रोक लगा दी गई है और नई फर्मों के पंजीकरण पर पाबंदी लगा दी गई है. रविवार को हॉट मिक्स प्लांट वाले बड़े ठेकेदारों के ठिकानों (भौंती, किदवईनगर आदि) पर छापेमारी की गई। डर का आलम यह है कि अजय इंटरप्राइजेज जैसी फर्मों के प्लांट पर ताले लटके मिले और ठेकेदार ने खुद ही अपना पंजीकरण निरस्त करने की गुहार लगा दी. 

मेयर के बेटे पर भी उठे सवाल, बागी पार्षद पहुंचे पुलिस कमिश्नर ऑफिस

नगर निगम में मचे इस बवाल के बीच राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है. मंगलवार को पवन गुप्ता समेत कई बागी पार्षद पुलिस कमिश्नर ऑफिस पहुंचे. उन्होंने कानपुर की महापौर के बेटे अमित पांडे उर्फ बंटी पर सरकारी और BIC की जमीनों पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया. पार्षदों का कहना है कि डीएम की जांच में कब्जे की पुष्टि के पांच महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है. वह बंटी पांडे पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग कर रहे थे, हालांकि, पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने यह कहते हुए मिलने से इनकार कर दिया कि मामले में पहले से ही लगातार कार्रवाई चल रही है. फिलहाल, कानपुर नगर निगम का यह टेंडर घोटाला शहर के साथ साथ प्रदेश भर  में चर्चा का विषय बना हुआ है. अब देखना यह है कि SIT की जांच में और कितने बड़े चेहरों से नकाब उतरता है. 

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