- सहारनपुर के सैय्यद माजरा गांव के कब्रिस्तान में लगातार बारिश और मिट्टी कटाव से कई कब्रें क्षतिग्रस्त हो गईं।
- तेज बारिश के कारण कब्रों से मृतक के शव बाहर आ गए और पानी के बहाव में दिखाई देने लगे, जिससे हड़कंप मच गया।
- समाजसेवकों आशु और पाशा ने संवेदनशीलता से शवों को इकट्ठा कर धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार सुपुर्द-ए-खाक किया।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच एक बेहद भावुक और परेशान करने वाली घटना सामने आई है. देहरादून-दिल्ली हाईवे के पास स्थित सैय्यद माजरा गांव के कब्रिस्तान में तेज बारिश और मिट्टी कटाव के कारण कई कब्रें क्षतिग्रस्त हो गईं. हालात इतने गंभीर हो गए कि कुछ शव कब्रों से बाहर आ गए और पानी के बहाव में दिखाई देने लगे. घटना की जानकारी मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया. बड़ी संख्या में लोग कब्रिस्तान पहुंचे और स्थानीय समाजसेवियों की मदद से बाहर आए शवों को पूरे सम्मान के साथ दोबारा सुपुर्द-ए-खाक किया गया. इस घटना ने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया है.
कब्रिस्तान का बड़ा हिस्सा पानी और कीचड़ से भरा
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के लोग कब्रिस्तान पहुंच गए. हर किसी के चेहरे पर दुख और चिंता साफ दिखाई दे रही थी. लगातार हो रही बारिश के कारण हालात इतने खराब थे कि कब्रिस्तान का बड़ा हिस्सा पानी और कीचड़ से भर गया था. मिट्टी धंसने से कई कब्रें टूट गईं, जिससे मृतकों के शव बाहर आ गए. समाजसेवी आशु और पाशा भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने स्थानीय लोगों को साथ लेकर तुरंत राहत कार्य शुरू किया. अत्यंत संवेदनशील माहौल में दोनों समाजसेवियों ने पूरी सावधानी और सम्मान के साथ बाहर आए शवों को एकत्र कराया. इसके बाद धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए सभी शवों को दोबारा सम्मानपूर्वक सुपुर्द-ए-खाक कराया गया.

Saharanpur Rain: बारिश में शव कब्र से बाहर आ गए
कब्रिस्तान की सुरक्षा के लिए पहले से कोई ठोस इंतजाम नहीं : ग्रामीण
बारिश और कीचड़ के बीच किए गए इस मानवीय कार्य की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि संकट की इस घड़ी में आशु और पाशा ने जिस संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और मानवता का परिचय दिया, वह समाज के लिए एक प्रेरणा है. लोगों ने उनके इस प्रयास को मृतकों के प्रति सम्मान और इंसानियत की मिसाल बताया. इस घटना ने प्रशासन के सामने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान कब्रिस्तान की सुरक्षा के लिए पहले से कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए थे. यदि समय रहते मिट्टी कटाव रोकने के उपाय किए गए होते, तो शायद ऐसी दुखद स्थिति पैदा नहीं होती.
अब ये हैं मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि कब्रिस्तान के चारों ओर मजबूत सुरक्षा दीवार, जल निकासी की उचित व्यवस्था और कटाव रोकने के स्थायी इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. लगातार हो रही बारिश के बीच सामने आई इस घटना ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया है और यह याद दिलाया है कि प्राकृतिक आपदाएं केवल संपत्ति ही नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं और आस्थाओं को भी गहरा आघात पहुंचाती हैं.
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