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चाइनीज मांझे पर और सख्ती की तैयारी, यूपी सरकार लाएगी अलग कानून; हाईकोर्ट में रखा अपना पक्ष

उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के सामने अपना पक्ष रखा. बताया कि चाइनीज मांझे के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधान किए जाएंगे.

चाइनीज मांझे पर और सख्ती की तैयारी, यूपी सरकार लाएगी अलग कानून; हाईकोर्ट में रखा अपना पक्ष
  • चाइनीज मांझे के निर्माण से लेकर बिक्री और इस्तेमाल तक पर सख्ती की तैयारी
  • पीड़ितों के लिए मुआवजे जैसे प्रावधान पर भी विचार कर रही है सरकार
  • जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की पीठ के सामने विचाराधीन है मामला

उत्तर प्रदेश में जानलेवा चाइनीज मांझे के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने के लिए प्रदेश सरकार अलग और सख्त कानून लाने की तैयारी में है. राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के सामने अपना पक्ष रखते हुए बताया है कि चाइनीज मांझे के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधान किए जाएंगे. प्रस्तावित कानून के जरिए इसके निर्माण से लेकर बिक्री और इस्तेमाल तक पर सख्ती की तैयारी है. 

राज्य सरकार की ओर से अदालत को पहले बताया गया था कि जानलेवा मांझे पर प्रभावी रोक के लिए एक विशेष कानून पर काम किया जा रहा है. प्रस्तावित कानून का नाम ‘यूपी लेथल मांझा (प्रोहिबिशन ऑफ मैन्युफैक्चर, सेल एंड यूज) एक्ट' रखा जा सकता है. सरकार पीड़ितों के लिए मुआवजे जैसे प्रावधान पर भी विचार कर रही है. 

हाईकोर्ट में चल रही है सुनवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच चाइनीज मांझे के आयात, बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी रोक से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की पीठ के सामने यह मामला विचाराधीन है. अदालत लगातार यह जानने की कोशिश कर रही है कि प्रतिबंध के बावजूद जानलेवा मांझा बाजार में कैसे उपलब्ध हो रहा है और इसे रोकने के लिए जिम्मेदार विभागों ने क्या कदम उठाए हैं.

ऑनलाइन बिक्री की जानकारी पर भी कोर्ट सख्त

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि प्रतिबंधित चाइनीज मांझा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी उपलब्ध होने की शिकायतें सामने आई हैं. इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इस पहलू की भी जांच करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को प्रस्तावित है.

प्रतिबंध के बावजूद सामने आती रही हैं घटनाएं

चाइनीज मांझा पहले से प्रतिबंधित है, लेकिन इसके बावजूद अवैध बिक्री और इस्तेमाल की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं. कांच या अन्य धारदार सामग्री से लेपित सिंथेटिक डोर विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों, राहगीरों और पक्षियों के लिए जानलेवा साबित होती है. कई मामलों में गले में मांझा फंसने से गंभीर चोट और मौत तक की घटनाएं हुई हैं.

ऐसे में अब सरकार मौजूदा प्रतिबंध को और प्रभावी बनाने के लिए अलग कानून के जरिए निर्माण, भंडारण, बिक्री और इस्तेमाल की पूरी श्रृंखला पर सख्त कार्रवाई का कानूनी ढांचा तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. प्रस्तावित कानून के अंतिम प्रावधान इसके औपचारिक मसौदे और विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होंगे.

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