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UP की आबादी में मात्र 5% है निषाद समाज, फिर भी BJP-SP व निषाद पार्ट में निषाद नेताओं को पद देने की लगी होड़

Uttar Pradesh Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में निषाद समाज अचानक केंद्र में आ गया है, जहां विभिन्न राजनीतिक दल इस समुदाय को साधने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रहे हैं. भाजपा द्वारा साध्वी निरंजन ज्योति को पिछड़ा आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद समाजवादी पार्टी ने रुक्मिणी देवी को महिला विंग का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर प्रतिस्पर्धा को बढ़ा दिया है. समाजवादी पार्टी का यह फैसला 2027 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए निषाद वोट बैंक को आकर्षित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.

UP की आबादी में मात्र 5% है निषाद समाज, फिर भी BJP-SP व निषाद पार्ट में निषाद नेताओं को पद देने की लगी होड़
उत्तर प्रदेश की आबादी का मात्र 5% निषाद समाज, फिर भी भाजपा-सपा-निषाद दल में निषाद नेताओं को पद देने की लगी होड़
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Uttar Pradesh Political News: उत्तर प्रदेश में यकायक निषाद समाज से आने वाले नेता चर्चा का मुद्दा बन गए हैं. सबसे पहले भाजपा (BJP) ने साध्वी निरंजन ज्योति (Sadhvi Niranjan Jyoti) को पिछड़ा आयोग (backward commission) का अध्यक्ष बना दिया. इसके बाद निषाद पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में रोते दिखाई दिए और अब समाजवादी पार्टी ने फूलन देवी की बहन रुक्मणी देवी को समाजवादी पार्टी के महिला विंग का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है.

समाजवादी पार्टी ने 67 साल की रुक्मिणी देवी को पद दिया है. यह कोई रूटीन में दिया जाने वाला पद नहीं है, बल्कि समाजवादी पार्टी की पीडीए स्ट्रैटेजी का दिया गया महत्वपूर्ण पद मान जा रहा है. दरअसल, रुक्मिणी देवी के जरिए निषाद समाज को संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. निषाद मल्लाह कम्युनिटी उत्तर प्रदेश की बड़ी पिछड़ी जाति है, जिनका प्रभाव पूर्वांचल और अवध क्षेत्र से लेकर बुंदेलखंड तक फैला है. 2027 चुनाव के लिए यह महत्वपूर्ण प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है. रुक्मिणी देवी का कहना है कि सभी को अखिलेश यादव में भरोसा है. वहीं, संजय निषाद पर आक्रामक रुक्मणी कहती है कि इन्होंने दुकान बना रखी है. फूलन देवी के नाम पर लोगों को उल्लू बनाया है. उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि सरकार में रहकर संजय निषाद ने क्या किया?

राजनीतिक जानकार ने कही ये बात

निषाद समाज को लेकर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक जानकार योगेश मिश्रा का कहना है निषाद समाज का कोई एक नेता नहीं हो सकता. उत्तर प्रदेश में उनके तीन बेल्ट हैं, जिसमें बनारस से लेकर गोरखपुर तक है. दूसरा बनारस से कानपुर तक और तीसरा बुंदेलखंड में है. मुलायम सिंह यादव ने फूलन देवी के जरिए प्रयास किया, पर वह भी सफल नहीं हो पाए. भाजपा ने निरंजन ज्योति को पद दिया है, पर संजय निषाद से समझौता भी है. संजय निषाद गोरखपुर से लेकर  केवल अंबेडकर नगर तक के ही नेता हैं.

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आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के कुल वोटरों का 4.5% निषाद जाति के वोटर हैं. विधानसभा की 80 सीटें ऐसी हैं, जहां पर निषाद जाति के वोटरों की तादाद एक लाख के करीब पहुंच जाती है. वहीं, 160 से अधिक विधानसभा सीटों पर यह समाज अपना प्रभाव रखता है. इस समाज की छोटी जातियां कई बार खुद को निषाद समाज से अलग भी गिनती हैं. सभी को अगर एक साथ जोड़ भी दिया जाए, तो यह आबादी 9% के आसपास भी पहुंच जाती है. जिला वार अगर बात की जाए, तो गोरखपुर, बनारस, आजमगढ़,बलिया, मऊ, गाजीपुर,मिर्जापुर, भदोही, जौनपुर, प्रयागराज, सुल्तानपुर, फतेहपुर, जिलों में इनकी आबादी काफी ज्यादा है. 

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