- यूपी के गोरखपुर के रहने वाले आशुतोष नेपाल की तबाही से बचकर वापस आए हैं.
- आशुतोष ने बताया- मेरी आंखों के सामने 40 लोग बह गए.
- गोरखपुर अपने घर लौटने के बाद आशुतोष के परिजनों ने कहा कि अब कहीं नहीं जाने देंगे.
नेपाल में आई भयानक विनाशकारी बाढ़ की तबाही से बचकर यूपी के गोरखपुर के रहने वाले आशुतोष अपने वतन लौटा आए हैं. घर आते ही अपने बेटे को जिंदा पाकर माता, पिता खुशी से झूम उठे. मौत के खंडहर से वापस आने के बाद आशुतोष ने कहा कि बहुत खौफनाक मंजर था. आंखों के सामने 30 से 40 लोग बह गए. चारों तरफ खतरनाक मंजर था, लोग घायल पड़े थे. वे पल अभी भी आंखों में हैं. बेटे की दास्तान सुनकर आशुतोष के माता-पिता की आंखें नम हो गईं. उन्होंने कहा कि उम्मीद नहीं थी बेटा लौटेगा. अब बेटा वापस आ गया. अब मुझे किसी पैसे धन दौलत की जरूरत नहीं है. हम तीन दिनों से तड़प रहे थे. खाना, पानी सब छोड़ दिया था. अब मुझे खुशी है कि मेरा बेटा मेरी आंखों के सामने है. अब हम कभी नहीं जाने देंगे.
आशुतोष की मां मंजू देवी की आंखें उस वक्त नम हो गईं, जब वे अपने बेटे की दास्तां बयां कर रही थीं. उन्होंने कहा कि जब तबाही की खबर लगी तो कई लोगों से पूछा. अलग-अलग लोग अलग-अलग बातें बताते थे. कोई कहता था बेटा आपका सुरक्षित है. कोई कहता था अभी जानकारी नहीं है. यह बातें सुनकर और मन में पीड़ा होती थी लेकिन बेटे के आने के बाद उसे अपनी आंखों के सामने पाकर सारे गम भूल गए.

'अचानक हंसी चीख में बदल गई...'
आशुतोष ने बताया कि उसके आंखों के सामने ही 30 से 40 लोग बैठे थे. एक कंपनी में साथ रहते थे. आपदा आने के बाद पानी में बह गए. उन्हें बचाने का मौका नहीं मिला. आशुतोष ने बताया कि सारे डॉक्यूमेंट्स पानी में बह गए. घटना उस वक्त हुई, जब वह सारे लोग सुबह के वक्त कंपनी में काम करने के लिए गए थे. अचानक बाढ़ का पानी आने ने लोगों की हंसी चीख में बदल गई.
आशुतोष का कहना है कि उन्होंने जीने की उम्मीदें छोड़ दी थी. लगता नहीं था कि अब परिवार से मुलाकात होगी. लेकिन जब नेपाल प्रशासन ने हेलीकॉप्टर से लोगों को रेस्क्यू करना शुरू किया, लोगों को खाना-पानी पहुंचने लगे, तो जान में जान आई.

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आशुतोष उपाध्याय ने बताया खाना-पानी देने के 24 घंटे बाद हमें 28 अगस्त को रेस्क्यू करके हेलीकॉप्ट से आर्मी कैंप लाया गया. काठमांडू में मेडिकल हुआ. दो दिन वहीं रहे. भारत की एमबीसी के दो से तीन लोग पहुंचे. बातचीत करने पर पता चला कि लोगों के पास कोई डॉक्यूमेंट नहीं है. वह घर कैसे जाएंगे. बॉर्डर कैसे क्रॉस करेंगे. लेकिन एमबीसी टीम ने कहा कि आपको घबराने की जरूरत नहीं है. सबका डॉक्यूमेंट लगा हुआ है. डॉक्यूमेंट दोबारा वेरीफाई करके निकाल लिया जाए.
आशुतोष ने बताया कि डॉक्यूमेंट एमबीसी द्वारा वेरीफाई हुआ और कंपनी की तरफ से किराए के लिए ₹10000 दिए गए. इसके बाद उन्हें भारत-नेपाल बॉर्डर पर छोड़ा गया.
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