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This Article is From Feb 28, 2025

MahaKumbh 2025: कल तक रौनक से गुलजार था संगम तट, अब सब सूना-सूना-सा... कुंभ के बाद क्या हैं प्रयागराज के हालात?

MahaKumbh 2025: महाकुंभ की समाप्ति के बाद प्रयागराज के हालात ऐसे नजर आ रहे मानो बारात विदा हो गई, खाली जनवासा बचा है.

MahaKumbh 2025: कल तक रौनक से गुलजार था संगम तट, अब सब सूना-सूना-सा... कुंभ के बाद क्या हैं प्रयागराज के हालात?
प्रयागराज में कुंभ मेले की समाप्ति के बाद टेंट हटाते मजदूर.

MahaKumbh 2025: प्रयागराज में लगा महाकुम्भ का मेला अब उजड़ने लगा हैं. सवा महीने के मेले में दुनिया भर के श्रद्धालु करोड़ों की संख्या में पहुंचे. लेकिन मेला समाप्त होने के बाद अब इसकी चमक फीकी पड़ती नजर आ रही है. जो रास्ते कल तक श्रद्धालुओं से खचाखच भरे नजर आ रहे थे, वो अब सामान्य और सुनी नजर आ रही हैं. विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला महाकुम्भ 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी को समाप्त हो गया. 45 दिन के महाकुंभ में 66.30 करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान किया. लेकिन महाकुंभ में श्रद्धालुओं का रेला था, तबूओं की कतार थी, संतों का जमावड़ा था, धर्म की बात थी.. अब वो सब गायब सा हो गया है.

45 दिन तक जहां पैदल चलने की जगह नहीं थी, वह अब खाली

जिस संगम द्वार पर महाकुंभ के दौरान 45 दिन तक पैदल चलने तक की जगह नहीं थी, जहां देखों वहां श्रद्धालुओं का सैलाब,  केसरिया रंग के वस्त्र पहने साधु-संत और भीड़ को नियंत्रित करते हुए पुलिसकर्मी नजर आते थे. आज उसी संगम द्वार कुछ गाड़ियां चल रही हैं, लोग आ रहे हैं लेकिन वो चमक गायब है.

त्रिवेणी तट पर लगा था आस्था का मेला

महाकुम्भ में त्रिवेणी तट पर आस्था का मेला लगा रहा. प्रतिदिन नया उल्लास, उमंग देखने को मिला था. ऐसा प्रतीत होता मानों समूची सृष्टि त्रिवेणी की ओर चल पड़ी थी और देवरूपी अतिथि के स्वागत में प्रयागराज शहर सबरी हो गया था. लेकिन अब ये रौनक कहीं नजर आ रही.

महाकुम्भ के दौरान सबसे अधिक भीड़ संगम पर थी, लेकिन अब वैसी भीड़ नजर नहीं आ रही. प्रयागराज का महत्व है तो लोग आ रहे हैं, स्नान कर रहे हैं, लेकिन अब वो चमक नहीं है.

संगन स्नान कर रहे श्रद्धालुओं ने क्या कुछ कहा

शुक्रवार को संगम पर स्नान करने पहुंचे एक श्रद्धालु विनय मिश्रा ने कहा- हमारे लिए ये मेला ही है. उस वक्त भीड़ की वजह से नहीं आए थे, 29 तारीख की घटना के बाद हमने प्लान बनाया कि बाद में आएंगे. एक दूसरे श्रद्धालु संतोष पांडे ने कहा- अभी भी बहुत अच्छा लग रहा है लेकिन अब भीड़ कम हो गई है.

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घाटों से भीड़ गायब, पुल पर इक्का-दुक्का लोग

मेला खत्म होने से कई जगहों पर सन्नाटा है. घाटों से भीड़ गायब है, पांटून पुल पर इक्का-दुक्का लोग नजर आ रहे तो वहीं अखाड़ा मार्ग खाली है. महाकुंभ के मेले के दौरान पांटून पुल पर श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आती थी, 30 से अधिक पुल बनाये गए थे, जो घाट बनाए गए हैं उस पर लोग दिख नहीं रहे, 30 से अधिक घाट बनाये गए थे, जिसमें स्थाई और अस्थाई दोनों शामिल है. लेकिन सब खाली पड़े हैं.

अखाड़ा मार्ग की चमक फीकी नजर आ रही 

जो अखाड़ा मार्ग लोगों का आकर्षण का केंद्र था, वहां से साधु-संत जा चुके हैं, जहां पूजा पाठ होती थी, वो खत्म हो चुका है. जिन साधु संतों के शिविर में भीड़ थी वहां सन्नाटा है, दुकान भी अब हटा दी गई हैं. टेंट भी उखड़ेने लगे हैं. कुल मिलाकर इस अखाड़ा मार्ग की चमक फीकी हो चुकी है.

मेला समाप्ति के बाद कहीं खुशी तो कहीं गम

वहीं मेला खत्म होने से कुछ लोग खुश हैं तो कई लोगों के चेहरे पर मायूसी है. सफाई कर्मियों के चेहरे पर बोनस की खुशी है तो दुकानदार दुकानदारी कम होने से मायूस हैं. संगम नोज पर सफाई करने वाले सागर बंसल बोनस मिलने से खुश हैं तो विमला देवी और उन्नाव के मोहम्मद सलीम दुकानदारी कम होने से दुखी हैं.

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बोनस मिलने पर सफाईकर्मियों ने जताई खुशी

सफाईकर्मी सागर बंसल ने कहा- बहुत अच्छा लगा मेला. मुख्यमंत्री ने जो बोनस का ऐलान किया उससे बहुत खुशी है. दूसरी ओर संगम क्षेत्र में दुकान लगाने वाली विमला देवी ने कहा, दुकानदारी अब ढीली हो गई. अब रुपया में आठ आना दुकानदारी हो गई. मेले के दौरान अच्छी कमाई होती थी. पहले एक दिन में 8 से 10000 की कमाई होती थी. अब दुकानदारी डाउन हो जाएगी हजार डेढ़ हजार मिलेगा. भीड़ कब होने से अब अच्छा भी नहीं लग रहा है रुखड़ा रुखड़ा सा हो जाएगा.

सुकून कि सरकार ने हमारे काम को सराहा

मेला भले ही 13 जनवरी से शुरू हुआ था लेकिन पुलिस जवानों की ड्यूटी पहले से ही लगा दी गई थीं. ऐसे में थकान भारी ड्यूटी से आराम मिलने से वह खुश तो है लेकिन मेले की रौनक गायब होने से उनके चेहरे भी उदास हैं . हालांकि उनके चेहरे पर इस बात का सुकून है कि सरकार ने उनके काम को सराहा है.

पुलिस कर्मी बोले- अब सब निरस टाइप लग रहा

संगम क्षेत्र में कुंभ के दौरान ड्यूटी करने वाले पुलिस कर्मी गिरीश यादव ने कहा- मेले की भीड़भाड़ को देखकर अच्छा लग रहा था. अब बहुत निरस टाइप का लग रहा है. अब रौनक खत्म हो गई. मेले में थोड़ी परेशानी तो रहती है लेकिन सब अच्छा लग रहा था. मुख्यमंत्री ने हम लोगों के लिए सब कुछ दिया बहुत खुशी मिलती है.

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'मानो बारात विदा हो गई, खाली जनवासा बचा है'

महाकुंभ के समापन से ना सिर्फ शिव संगम क्षेत्र में चमक फीकी हो गई है बल्कि इसका असर शहर में भी देखने को मिल रहा है. प्रयागराज शहर के लोग भी महाकुंभ समाप्त होने से निराश हैं. उनका कहना है कि महाकुम्भ के समापन के बाद मेला क्षेत्र को देखकर ऐसा लग रहा है मानों बारात विदा हो गई और खाली जनवासा बचा है.

प्रयागराज निवासी वशिष्ठ नारायण दुबे ने कहा, "अगर एक शब्द में पूछेंगे तो जैसे घर में कोई शादी का उल्लास हो. लेकिन शादी के उल्लास के बाद जब बारात विदा हो जाती है. उसके बाद जैसे लगता है 2 दिन तक आप क्या काम बचा है. वही स्थिति हम लोगों को लग रही है. 

उन्होंने आगे कहा, "प्रयागराज में बहुत हर्षोल्लास का माहौल था और यहां पर आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियां थी उसे हम लोगों को बहुत आनंद आ रहा था. कुछ दिक्कत है तो थी, लेकिन उन समस्याओं से जब तुलना करेंगे तो जो संस्कृत अध्यात्म की अनुभूति हुई वो बहुत ऊपर है.

कुल मिलाकर प्रयागराज अब सामान्य होता नजर आ रहा है. शहर की सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा है तो चौराहे ट्रैफिक जाम से मुक्त दिख रहे हैं. रंग और रौनक गायब होने से सब कुछ थका सा दिख रहा.

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