- केजीएमयू धर्मांतरण प्रकरण का नेटवर्क आगरा और एटा मेडिकल कॉलेज तक फैला पाया गया है
- STF को इस्लामिक मेडिकोज नामक समूह से जुड़ी पुस्तकों और पत्रिकाओं के जरिए छात्रों को जोड़ने की जानकारी मिली है
- डॉ. रिजवान मलिक पर परीक्षा परिणाम प्रभावित कराने और गैर-मुस्लिम छात्रों की सप्लीमेंट्री लगवाने के आरोप लगे हैं
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में सामने आए धर्मांतरण प्रकरण की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. एसटीएफ की जांच में अब इस नेटवर्क के तार आगरा और एटा मेडिकल कॉलेज तक जुड़ते नजर आ रहे हैं. जांच में आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (SNMC) के डॉक्टरों और केजीएमयू के कुछ छात्रों के संपर्कों की पड़ताल की जा रही है. इनमें मुख्य आरोपित डॉ. रमीज के करीबी बताए जा रहे डॉ. रिजवान मलिक का नाम भी सामने आया है. डॉ. रिजवान एटा मेडिकल कॉलेज में करीब पांच साल तक तैनात रहा था. इस दौरान वह कई विवादों में भी घिरा था.
STF की जांच में डॉ. रमीज, डॉ. रिजवान मलिक और अदनान अंसारी समेत कई लोगों के बीच संपर्कों की जानकारी सामने आई है. जांच एजेंसी को इस्लामिक मेडिकोज नाम के एक समूह के बारे में भी पता चला है. आरोप है कि इस समूह से जुड़ी पुस्तकों और पत्रिकाओं के जरिए मेडिकल कॉलेजों के पुराने और नए छात्रों के बीच संपर्क बढ़ाया जाता था. नए दाखिले लेने वाले छात्रों को भी समूह से जोड़ने की कोशिश की जाती थी.
एटा मेडिकल कॉलेज में भी विवादों में रहा डॉ. रिजवान
एटा मेडिकल कॉलेज में तैनाती के दौरान अक्टूबर 2023 में डॉ. रिजवान मलिक के खिलाफ एक असिस्टेंट प्रोफेसर की गाड़ी में तोड़फोड़ के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था. इस मामले में मेडिकल कॉलेज की तत्कालीन प्राचार्य डॉ. रजनी पटेल और अकाउंटेंट अभिषेक भी सह-आरोपित थे. सूत्रों के मुताबिक, एटा में तैनाती के दौरान डॉ. रिजवान की कुछ उच्चाधिकारियों से नजदीकियां थीं. उस पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर गैर-मुस्लिम छात्र-छात्राओं के परीक्षा परिणाम प्रभावित कराने और उनकी सप्लीमेंट्री लगवाने के आरोप भी लगे हैं. हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई हैय
100 से ज्यादा डॉक्टरों और मौलानाओं से जुड़ा नेटवर्क
एसटीएफ की जांच में इस नेटवर्क से 100 से अधिक डॉक्टरों और मौलानाओं के जुड़े होने की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है. आरोप है कि ये लोग जकात के नाम पर हर महीने करीब 10 लाख रुपये जुटाते थे. अब एसटीएफ इस रकम के स्रोत, बैंक खातों और लेनदेन की पड़ताल कर रही है.
जांच का दायरा लखनऊ, आगरा, बस्ती, सहारनपुर के देवबंद और बरेली तक पहुंचा है. इन शहरों के सरकारी और निजी संस्थानों से जुड़े डॉक्टरों के अलावा कई मौलानाओं की भूमिका भी जांची जा रही है. केजीएमयू के डॉक्टरों समेत करीब 12 मेडिकल स्टाफ, शहर के दो निजी मेडिकल कॉलेजों के संचालकों और अधिकारियों के संपर्कों की भी पड़ताल हो रही है. एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा के पूर्व और वर्तमान छात्रों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. संदिग्ध लेनदेन की जानकारी जुटाने के लिए बैंकों को पत्र भेजे गए हैं.
तकरीरों के जरिए जुटाते थे जकात की रकम
जांच में सामने आया है कि केजीएमयू के हॉस्टलों में बाहर से आने वाले मौलाना मेडिकल स्टाफ और छात्रों के बीच तकरीर करते थे. आरोप है कि डॉ. रमीज भी इन बैठकों में शामिल होता था. देवबंद, बरेली और आगरा से आने वाले मौलाना जकात के नाम पर चंदा जुटाते थे. इस रकम का इस्तेमाल नेटवर्क से जुड़े लोगों की जरूरतों और गतिविधियों में किए जाने का आरोप है. एसटीएफ अब फंडिंग के पूरे नेटवर्क का ब्योरा जुटा रही है.
महिलाओं को प्रभावित करने के लिए स्क्रिप्ट तैयार करने का आरोप
एसटीएफ की जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि नेटवर्क से जुड़े कुछ लोग हिंदू महिलाओं का धर्मांतरण कराने को धार्मिक पुण्य का काम मानते थे।.केजीएमयू परिसर के एक हॉल में होने वाली तकरीरों में महिलाओं को प्रभावित करने की रणनीति तैयार किए जाने की बात सामने आई है.आरोप है कि इसके लिए बाकायदा स्क्रिप्ट तैयार की जाती थी, जिसमें महिला डॉक्टरों को अपने प्रभाव में लेने और उनकी सोच बदलने के तरीके बताए जाते थे.
दीनी तालीम के नाम पर छात्रों को जोड़ने की कोशिश
जांच एजेंसी को केजीएमयू में बंद कमरों में होने वाली बैठकों की जानकारी भी मिली है.आरोप है कि डॉ. रमीज दीनी तालीम के नाम पर मुस्लिम मेडिकल छात्रों को इन बैठकों में बुलाता था.इनमें पढ़ाई में अच्छे और सामान्य पृष्ठभूमि के छात्र भी शामिल होते थे.जांच में आरोप लगाया गया है कि बाहर से आने वाले मौलाना धीरे-धीरे इन छात्रों को प्रभावित कर नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश करते थे.एसटीएफ अब बैठकों में शामिल लोगों और उनकी भूमिका की पहचान कर रही है.
पिता पर भी पहले लग चुके हैं धर्मांतरण के आरोप
केजीएमयू प्रकरण की जांच में डॉ. रमीज के परिवार की भूमिका भी जांच के दायरे में है.उसके पिता सलीमुद्दीन पर भी पूर्व में हिंदू युवतियों को प्रेमजाल में फंसाकर धर्म परिवर्तन कराने के आरोप लगे थे. बताया जा रहा है कि सलीमुद्दीन ने पंजाबी महिला खतीजा से दूसरी शादी की थी. आरोप है कि इस शादी से पहले महिला का धर्म परिवर्तन कराया गया था. सलीमुद्दीन पर अलग-अलग राज्यों की हिंदू महिलाओं को प्रेमजाल में फंसाकर धर्मांतरण कराने के भी आरोप हैं. पुलिस ने इस मामले में डॉ. रमीज के पिता सलीमुद्दीन और मां खतीजा को भी आरोपित बनाया है. दोनों पर बेटे की गतिविधियों में सहयोग और उसे संरक्षण देने का आरोप है.
अब STF और पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही हैं कि पिता और पुत्र एक ही नेटवर्क का हिस्सा थे या उनके अलग-अलग संपर्क और नेटवर्क काम कर रहे थे. जांच एजेंसियां संदिग्धों के आपसी संपर्क, आर्थिक लेनदेन और संस्थानों से जुड़े लोगों की भूमिका के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं.
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