कानपुर बिधन क्षेत्र में एक अधिवक्ता की नाबालिग पुत्री से दुष्कर्म मामले में पुलिस ने असली आरोपी को पकड़ने के बजाय एक पूरी तरह बेगुनाह युवक को मुख्य अभियुक्त का नाम देकर जेल भेज दिया था. विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) अपर सत न्यायाधीश (20) पवन कुमार राय की अदालत ने अभियुक्त अमीन लायल को ससम्मान दोषमुक्त (बरी) कर दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने इस अमानवीय कृत्य के लिए तत्कालीन विवेचक व उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह व उनके वरिष्ठ पर्यवेक्षण अधिकारियों के खिलाफ जांच कर दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी को आदेश जारी किए हैं.
बता दें कि विधन थाना क्षेत्र के एक अधिवक्ता ने 25 मई 2021 को थाने में लिखित तहरीर दी थी. उन्होंने बताया था कि उनकी 13 साल की बेटी सुबह करीब 9 बजे सतवारी चौराहे पर गैस का छोटा सिलेंडर भराने गई थी. तभी वहीं रहने वाला विक्की उनकी बेटी को खींचकर झाड़ियों में ले गया और दुष्कर्म किया.
बिना पहचान किए अमीन को बाया 'विक्की'
मामले की जांच तत्कालीन थानाध्यक्ष व उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह कर रहे थे. उन्होंने अपनी विवेचना में इतनी घोर लापरवाही बरती कि बिना किसी शिनाख्त या पहचान पत्र के, कैंट इलाके में रहने वाले अमीन लायल (25) को पकड़ा और उसे कागजों में विक्की लायल उर्फ अमीन लायल दर्शाकर जेल की काल कोठरी में डाल दिया. पुलिस की इस सरसरी और त्रुटिपूर्ण कार्यप्रणाली के कारण यह निर्दोष युवक वर्ष 2021 से लगातार जिला कारागार में बंद था.
रिहाई के साथ जांच के आदेश
विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय की अदालत ने अमीन लायल को तत्काल जेल से रिझा करने का परवाना जारी करने का आदेश दिया. इसके साथ ही इस मामले में न्याय का गला घोंटने वाले दोषी पुलिस अधिकारियों पर नकेल कसने के लिए निर्णय की एक-एक प्रति पुलिस कमिश्नर और डीएम कानपुर नगर को भेजी गई है, ताकि दरोगा और उनके सीनियर अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय व दंडात्मक कार्रवाई की जा सके.
बचाव पक्ष के अधिवक्ता सलीम ने बताया कि दरोगा ने 1 मुख्य आरोपी को जेल भेजने के बजाए अमीन लायल को विक्की बनाकर जेल भेज दिया था. पीड़िता ने अपने बयानों में बताया कि विक्की उसके घर से महज 5-6 मकानों की दूरी पर रहता था. वह शादीशुदा था, जबकि अमीन लायल पीड़िता के घर से एक किलोमीटर की दूरी पर रहता था.
कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, निर्दोष को 5 साल जेल में रखा
अदालत ने पूरे साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद पाया कि विवेचक विनोद कुमार सिंह ने अभियुक्त की पर्याप्त पहचान किए बिना, उसके घर जाए बिना और बिना किसी दस्तावेज के सरसरी तौर पर चार्जशीट दाखिल कर दी. अदालत ने अपने आदेश में सख्त टिपणी करते हुए कहा कि तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक विनोद कुमार सिंह द्वारा विवेचना में गंभीर लापरवाही बरतते हुए एक ऐसे अभियुक्त के खिलाफ आरोप पत्र प्रेषित कर दिया, जिसने कोई अपराध किया ही नहीं था. विवेचक की लापरवाही के कारण एक निर्दोष व्यक्ति विगत लगभग पाँच वर्षों से जिला कारागार में निरुद्ध है.
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