kanpur Cyber Fraud: उत्तर प्रदेश की कानपुर पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ फिल्मी स्टाइल में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया. जामताड़ा की तरह साइबर अपराध का अड्डा बन चुके रेउना गांव से पुलिस ने 20 शातिर ठगों को किया है. पकड़े गए आरोपियों में कोई 5वीं पास है तो कोई 12वीं फेल. ये पहले मजदूरी करते थे, इसके बाद सभी ने लोगों को ठगने का काम शुरू किया. 5वीं पास आरोपी ने ठगी को तरीके भी बताए हैं, जिसमें पीएम आवास और अश्लील कंटेट इनका मुख्य हथियार था. आइए, विस्तार से जानते हैं पुलिस ने अपराधियों को कैसे पकड़ा और उन्होंने ठगी के क्या तरीके बताए.
फिल्मी स्टाइल में पुलिस ने घेरा गावं
कानपुर पुलिस की इस कार्रवाई को एडीसीपी IPS सुमित सुधाकर रामटेके के नेतृत्व में अंजाम दिया गया. पुलिस की टीम रेउना के रठिगांव पुल के पास पहुंची तो मंजर किसी फिल्म शूट जैसा था. सबसे पहले पुलिस ने गांव के चारों ओर घेराबंदी की और आसमान में ड्रोन उड़ाए गए. माइक से चेतावनी देते हुए कहा गया- 'आपको चारों तरफ से घेर लिया गया है, खुद को पुलिस के हवाले कर दो'. यह सुनते ही गांव में हड़कंप मच गया, अपराधी झाड़ियों और खेतों की ओर भागने लगे. लेकिन, आसमान से निगरानी कर रहे ड्रोनों ने उनकी सटीक लोकेशन पुलिस को दी, जिसके बाद 20 अपराधियों को दबोच लिया गया. हालांकि, इस दौरान 17 आरोपी फरार हो गए.
इन दो तरीकों से ठगी को देते थे अंजाम
'आपका PM आवास पास हो गया है'
पहला तरीका: ये साइबर अपराधी ट्रू कॉलर पर अपना नंबर आवास विकास अधिकारी के नाम से सेव करते थे. फिर उस नंबर से कॉल कर लोगों को झांसा देते थे कि उनका प्रधानमंत्री आवास पास हो गया है. इसके लिए रजिस्ट्रेशन फीस देने होगी. घर मिलने के लालच में फंसकर लोग उन्हें रुपये गूगल पे या फोन पे कर देते थे. आरोपी लोगों से बातचीत के आधार पर फैसला करते थे कि उन्हें कितने रुपये लेने हैं. आमतौर पर यह रकम 1100 से 5000 रुपये तक होती थी.

kanpur News: पुलिस गिरफ्त में आए आरोपी.
अश्लील कंटेंट देखने के नाम पर गिरफ्तारी की धमकी
दूसरा तरीका: गिरोह के कुछ सदस्य ट्रू कॉलर पर किसी पुलिसकर्मी की फोटो और नाम लिखकर अपना नंबर सेव करते थे. इसके बाद ये लोगों को कॉल कर डराते कि उन्होंने अश्लील कंटेंट देखा है. लोगों को यकीन दिलाने के लिए बीच-बीच में पुलिस सायरन की आवाज बताई जाती, उनका कोई साथी पुलिस की तरह सख्त लहजे में किसी को धमकाता. इससे लोगों को यकीन हो जाता कि पुलिस अधिकारी का ही कॉल है. ठग का शिकार हो रहे व्यक्ति को गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर वे 11,000 से लेकर मनमानी रकम वसूल लेते.
मजदूरी छोड़ गांव लौटे, फिर बनाया गिरोह
पकड़े गए ये आरोपी गिरोह के सरगना
पुलिस ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है उनमें राहुल कुमार, नीरज, प्रदीप सिंह, सतेंद्र, प्रांशु, जगरूप, रोहित, पुष्पेंद्र, अजीत, कुलदीप, नरेश, ज्ञान प्रकाश, रोमी, शैलेन्द्र, धीरज, मलखान, शिवकांत और पारस शामिल हैं. पुलिस ने आरोपियों के पास से 20 मोबाइल फोन, 12 फर्जी आधार कार्ड और कई एटीएम कार्ड बरामद किए हैं. अब पुलिस फरार 17 अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है. साथ ही पकड़े गए ठगों के म्यूल अकाउंट्स (दूसरों के नाम पर खुले बैंक खाते) को खंगाल रही है, जिससे ठगी गई कुल रकम का पता लगाया जा सके.
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