- उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय का राजनीतिक दबदबा माना जाता है. लेकिन हाल के वर्षों में उनका रुतबा थोड़ा कम हुआ है
- 25 मार्च को महाराजा सूरजमल की मूर्ति का अनावरण समारोह होगा, जिसमें विभिन्न पार्टियों के जाट नेता शामिल होंगे
- इस समारोह में बीजेपी, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और आम आदमी पार्टी के जाट नेता शामिल हो सकते हैं.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों का राजनीतिक दबदबा माना जाता है. लेकिन हाल के वर्षों में उनके राजनीतिक रुतबे में थोड़ी कमी जरूर आई है . ऐसे में जाटों के सबसे बड़े शासक की याद में मेरठ में एक बड़ा जमावड़ा लगने वाला है, जिसमें पार्टी की दीवार भी टूटती हुई दिखाई देगी . अगले महीने महाराजा सूरजमल की मूर्ति के अनावरण के बहाने जाट अपनी राजनीतिक ताक़त दिखाएंगे . 25 मार्च को उत्तर प्रदेश के मेरठ में जाटों के इस सबसे प्रसिद्ध शासक की मूर्ति के अनावरण में जाट समाज से ताल्लुक रखने वाले कई जाने माने नेता शामिल होंगे.
समारोह में पार्टियों की कोई बंदिश भी नहीं होगी और अलग अलग पार्टियों के जाट नेताओं के शरीक होने की संभावना है. इनमें बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और राजस्थान के नागौर से लोकसभा सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल जैसे नेता शामिल हैं. जो नेता शामिल होंगे, उनमें पंजाब के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी नेता भगवंत मान के भी इस समारोह में मौजूद रहने की संभावना है. भगवंत मान सिख धर्म को मानने वाले हैं. लेकिन उनका नाता जट सिख समुदाय से है. पंजाब में इस समुदाय के लोगों की अच्छी खासी संख्या है .
राजस्थान , हरियाणा , पश्चिम उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब में जाट समुदाय से आने वाले लोगों की अच्छी खासी संख्या है . ख़ासकर हरियाणा , राजस्थान और पश्चिम उत्तर प्रदेश में तो राजनीतिक तौर पर जाटों का काफ़ी दबदबा रहा है. अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं जिसमें पश्चिम उत्तर प्रदेश के सीटों की भूमिका भी बड़ी अहम रहने वाली है. अभी हाल तक उत्तर प्रदेश में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे भूपेंद्र चौधरी जाट समुदाय से ही आते हैं. हालांकि हाल के सालों में जाटों के सियासी रसूख में कमी आई है . पश्चिम उत्तर प्रदेश में पिछले कई सालों से जाटों का बीजेपी को समर्थन बड़ी तादाद में मिलता रहा है .
कौन थे महाराजा सूरजमल
महाराजा सूरजमल को जाटों का सबसे बड़ा शासक माना जाता है. बेहद कुशल रणनीतिकार होने के चलते उन्हें जाटों का प्लूटो भी कहा जाता है. 1707 में राजस्थान के भरतपुर में जन्मे सूरजमल ने अपने जीवन में 80 युद्ध लड़ा और सभी जीते. 1763 में मुगलों से लड़ते हुए शहीद होने से पहले उन्होंने दो बार दिल्ली को मुगलों से छीना और आगरा के किले पर कब्ज़ा किया. अहमद शाह अब्दाली के आक्रमण के दौरान उन्होंने मथुरा और वृंदावन की रक्षा की और हिंदुओं के पवित्र स्थानों को बचाया.
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