IAS Rinku Singh Rahi: उत्तर प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही (IAS officer Rinku Singh Rahi) को नई पोस्टिंग मिल गई है. राही को जालौन का संयुक्त मजिस्ट्रेट बनाया गया है. पिछले दिनों रिंकू सिंह राही ने राष्ट्रपति को तकनीकी इस्तीफा भेज दिया था. उनका कहना था कि उन्हें काम करने का मौका नहीं दिया जा रहा है. हालांकि बाद में उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया था.
उन्होंने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में इस्तीफा वापस लेने के लिए कुछ शर्तें रखी, जिनमें 'काम नहीं तो वेतन नहीं' और उन्हें वापस उनके पुराने पद 'समाज कल्याण अधिकारी' पर भेजने की मांग शामिल है. इस्तीफा देने से पहले आईएएस रिंकू सिंह लंबे समय तक लखनऊ में राजस्व परिषद में अटैच थे.
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इसलिए दिया था इस्तीफा
रिंकू सिंह ने इस्तीफा में कहा था कि संवैधानिक व्यवस्था के समानांतर एक अलग ही सिस्टम चल रहा है और उन्हें काम करने का मौका नहीं दिया जा रहा है. फिलहाल इस पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा गया है. न तो शासन के अधिकारी और न ही स्वयं रिंकू सिंह इस मामले पर आधिकारिक रूप से कुछ बोल रहे हैं.
वकीलों के सामने कान पकड़कर लगाई थी उठक-बैठक
बता दें कि आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह तब चर्चा में आए थे, जब उन्होंने वकीलों के सामने कान पकड़कर उठक-बैठक लगाई थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था. उस समय रिंकू सिंह राही शाहजहांपुर जनपद के पुवायां तहसील (Shahjahanpur Powayan Tehsil) में SDM के पद पर थे. दरअसल, निरीक्षण के दौरान उन्होंने कचहरी के एक मुंशी को शौचालय के बाहर गंदगी फैलाते हुए देखा था, जिससे नाराज होकर उन्होंने उससे उठक-बैठक करवायी थी, जिससे नाराज होकर वकीलों ने विरोध शुरू कर दिया था और धरने पर बैठ गए थे. मामले को शांत करने के लिए रिंकू खुद वकीलों के बीच पहुंचे और माफी मांगी... इतना ही नहीं उन्होंने सार्वजनिक रूप से उठक-बैठक कर संदेश दिया था कि नियम सबके लिए समान हैं. जिसके बाद यूपी सरकार ने उन्हें राजस्व परिषद में अटैच किया था.
IAS रिंकू सिंह ने एक साथ खाईं थी 7 गोलियां
आईएएस अफसर रिंकू सिंह की ईमानदारी की मिसाल उस देखने को मिली थी, जब वो 2009 में मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण अधिकारी के रुप में तैनात थे. उस समय उन्होंने विभाग में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त एक्शन लिया था और करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा किया था, जिससे नाराज होकर माफिया ने उन पर हमला कर दिया था और उन्हें सात गोलियां मारी थीं, जिसमें उनके पेट में पांच गोलियां और एक सिर में लगी थी. गंभीर रूप से घायल रिंकू सिंह का लंबा इलाज चला था. उनकी कई सर्जरी हुई. इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और वो ईमानदारी से काम करते रहे.
पहले पीसीएस, फिर बने IAS अधिकारी
अलीगढ़ के रहने वाले रिंकू सिंह ने 2004 में यूपीपीसीएस परीक्षा पास कर जिला समाज कल्याण अधिकारी बने. नौकरी के साथ वह सिविल सेवा की तैयारी करते रहे. 2023 में उन्होंने यूपीएससी क्रैक कर दिया. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उनको 2025 में शाहजहांपुर का एसडीएम बनाकर भेजा गया. वहीं वकीलों से विवाद होने के बाद उन्हें राजस्व परिषद में अटैच कर दिया गया था.
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