उत्तर प्रदेश के बागपत से इंसानियत और संवेदनशीलता की एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने लोगों का दिल छू लिया. दो नवजात बच्चियां जिन्हें जन्म के बाद उनके अपने ही बेसहारा छोड़ गए थे, आज उन्हें नई पहचान और बेहतर भविष्य की उम्मीद मिल गई है. इन बच्चियों की जिंदगी में यह बदलाव बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल की पहल से आया है.
एक नाली के पास मिली, दूसरी रेलवे ट्रैक के किनारे
कुछ दिन पहले बागपत में एक नवजात बच्ची नाली के किनारे लावारिस हालत में मिली थी. वहीं दूसरी बच्ची रेलवे ट्रैक के पास झाड़ियों में पड़ी मिली. दोनों मासूम जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थीं. उनकी रोने की आवाज सुनकर आसपास के लोगों ने उन्हें देखा और तत्काल अस्पताल पहुंचाया. समय पर मदद मिलने से दोनों की जान बच गई.
डीएम ने गोद में उठाकर दिया अपनापन
जिला अस्पताल पहुंचीं डीएम अस्मिता लाल ने दोनों बच्चियों की हालत का जायजा लिया. उन्होंने बच्चियों को अपनी गोद में उठाकर प्यार-दुलार किया और उन्हें नई पहचान दी. नाली के पास मिली बच्ची का नाम "नव्या" रखा गया जबकि रेलवे ट्रैक के पास मिली बच्ची को "समायरा" नाम दिया गया.
इलाज और देखभाल के दिए निर्देश
डीएम ने अस्पताल के डॉक्टरों से दोनों बच्चियों के स्वास्थ्य, पोषण और इलाज की विस्तृत जानकारी ली. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चियों की देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही न हो. साथ ही उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाएं और आवश्यक पोषण उपलब्ध कराने को कहा.
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