- अभिषेक मीणा 22 वर्ष की उम्र में हरियाणा के रेवाड़ी जिले के सबसे युवा डिप्टी कमिश्नर बने हैं.
- उन्होंने हिंदी माध्यम के स्कूल से पढ़ाई की और कोटा जाकर IIT-JEE की तैयारी की थी.
- अभिषेक ने पहले प्रयास में IIT दिल्ली में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया
IAS Abhishek Meena Youngest DC: 21 साल की उम्र में UPSC जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक को पहले ही प्रयास में पास करना और 22 साल की उम्र में IAS बनना हर किसी के लिए संभव नहीं होता. लेकिन हरियाणा कैडर के 2016 बैच के IAS अधिकारी अभिषेक मीणा ने यह उपलब्धि हासिल की. आज वह हरियाणा के रेवाड़ी जिले के डिप्टी कमिश्नर (DC) हैं और राज्य के सबसे युवा डिप्टी कमिश्नरों में गिने जाते हैं.
राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के बहनोली गांव में किसान परिवार में जन्मे अभिषेक मीणा अपनी इस सफलता को केवल अपनी मेहनत का परिणाम नहीं मानते. NDTV से खास बातचीत में उन्होंने अपनी यात्रा को लेकर खुलकर चर्चा की.
‘मैं कोई असाधारण छात्र नहीं था'
जब हमने अभिषेक मीणा से पूछा कि आज जब वह अपने सफर को पीछे मुड़कर देखते हैं तो सफलता की सबसे बड़ी वजह किसे मानते हैं, तो उनका जवाब व्यक्तिगत उपलब्धि से ज्यादा परिस्थितियों पर केंद्रित था. उन्होंने कहा कि वह मीणा समुदाय से आते हैं, जहां कई दशकों से सरकारी नौकरी को सम्मान, स्थिरता और बेहतर जीवन का माध्यम माना जाता है.

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हिंदी माध्यम के स्कूल से कोटा तक का सफर
अभिषेक ने शुरुआती पढ़ाई एक साधारण हिंदी माध्यम के स्कूल से की. वह बताते हैं कि स्कूल में वह हमेशा अच्छे छात्र रहे और अक्सर अपनी कक्षा में प्रथम आते थे. लेकिन असली बदलाव तब आ या, जब परिवार ने उन्हें IIT-JEE की तैयारी के लिए कोटा भेजने का फैसला किया. NDTV से बातचीत में उन्होंने बताया कि कोटा पहुंचने के बाद पहली बार उन्हें एहसास हुआ कि प्रतियोगिता कितनी बड़ी है. “स्कूल में मैं टॉपर था, लेकिन कोटा जाकर महसूस हुआ कि मेरी जानकारी कितनी सीमित है. वहां देशभर के प्रतिभाशाली छात्रों के बीच रहकर समझ आया कि अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है.”
यही अनुभव उनके लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. अगले दो साल तक उन्होंने पूरी एकाग्रता के साथ तैयारी की. वह बताते हैं कि कोटा में पढ़ाई का खर्च परिवार के लिए आसान नहीं था, लेकिन संयुक्त परिवार के सभी सदस्यों ने बिना किसी हिचकिचाहट के उनका साथ दिया.

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पहले प्रयास में IIT, फिर बदली सोच
लगातार मेहनत का नतीजा यह रहा कि अभिषेक ने पहले ही प्रयास में IIT-JEE पास किया और उन्हें IIT दिल्ली में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में दाखिला मिला. उन्होंने बताया कि छात्रवृत्ति और सरकारी सहायता की वजह से IIT की पढ़ाई लगभग बिना किसी आर्थिक बोझ के पूरी हो गई. हमारे सवाल पर कि IIT ने उन्हें क्या सिखाया, अभिषेक ने कहा कि वहां पढ़ाई से ज्यादा सोचने का तरीका बदला. उनके मुताबिक, देश के अलग-अलग हिस्सों से आए प्रतिभाशाली छात्रों के साथ पढ़ने से समस्याओं को देखने का नजरिया विकसित हुआ और कठिन परिस्थितियों में शांत रहकर समाधान निकालने की आदत बनी.
IIT में आया IAS बनने का विचार
अभिषेक बताते हैं कि बचपन में उन्होंने कभी तय नहीं किया था कि उन्हें IAS बनना है. उन्होंने कहा कि स्कूल और IIT-JEE की तैयारी के दौरान उनका पूरा ध्यान केवल परीक्षा पास करने पर था. लेकिन IIT दिल्ली में पढ़ाई के दौरान पहली बार उन्होंने गंभीरता से सोचना शुरू किया कि आगे किस क्षेत्र में जाना है. जब हमने उनसे पूछा कि आखिर सिविल सेवा ही क्यों, तो उन्होंने कहा कि इसका जवाब उनके गांव और सामाजिक परिवेश में छिपा है.
अखबार पढ़ने की आदत बनी सबसे बड़ी ताकत
UPSC की तैयारी को लेकर बात करते हुए अभिषेक ने किसी महंगे कोचिंग मॉडल या विशेष रणनीति का जिक्र नहीं किया. इसके बजाय उन्होंने अपनी सबसे बड़ी ताकत रोज अखबार पढ़ने की आदत को बताया.
उन्होंने कहा कि स्कूल के दिनों से ही सुबह अखबार पढ़ना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था. IIT पहुंचने के बाद उन्होंने हिंदी के साथ अंग्रेजी के अखबार भी पढ़ने शुरू किए. हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले अभिषेक का मानना है कि अंग्रेजी अखबारों ने उनकी भाषा, शब्दावली और समसामयिक मुद्दों की समझ को काफी मजबूत किया. कॉलेज के तीसरे साल तक वह रोज एक-दो अखबार पढ़ते थे और साथ ही NCERT की किताबों से तैयारी करते रहे. अंतिम साल में उन्होंने पूरी तरह से UPSC की तैयारी शुरू कर दी.

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हॉस्टल में मिला तैयारी का माहौल
अभिषेक बताते हैं कि IIT के हॉस्टल का माहौल भी उनकी तैयारी में काफी मददगार रहा. वह कहते हैं कि वहां कई छात्र UPSC की तैयारी कर रहे थे. पहले से तैयारी कर रहे छात्रों से लगातार मार्गदर्शन मिलता था और परीक्षा से जुड़े विषयों पर चर्चा होती रहती थी. ऑनलाइन उपलब्ध स्टडी मटेरियल, दोस्तों के साथ बातचीत और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विषय पर मजबूत पकड़ ने उनकी तैयारी को व्यवस्थित बनाया.
21 साल में सफलता… किस्मत भी निभाती है भूमिका
कम उम्र में पहले ही प्रयास में UPSC पास करने को लेकर जब हमने उनसे सवाल किया, तो उन्होंने इसे केवल अपनी मेहनत का परिणाम मानने से इनकार कर दिया. उनका कहना था कि समय पर तैयारी शुरू करना, प्रतियोगी परीक्षाओं का अनुभव, लगातार मेहनत और कुछ हद तक किस्मत—इन सभी ने मिलकर यह सफलता दिलाई. “पहले प्रयास में सफलता केवल मेहनत से नहीं मिलती. सही समय पर सही तैयारी और थोड़ी किस्मत भी जरूरी होती है.”
‘असफलता के लिए भी खुद को तैयार रखा था'
बातचीत के दौरान अभिषेक ने तैयारी के मानसिक पक्ष पर भी खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि UPSC की तैयारी शुरू करते समय ही उन्होंने खुद को यह समझा लिया था कि लाखों एस्पिरेंट्स में से केवल लगभग एक हजार उम्मीदवारों का ही चयन होता है. ऐसे में मेहनत करने वाले कई योग्य उम्मीदवार भी चयन से बाहर रह जाते हैं.
इसी सोच ने उन्हें परिणाम के दबाव से दूर रखा. “मैं सफलता के साथ-साथ असफलता के लिए भी मानसिक रूप से तैयार था. अगर चयन नहीं भी होता तो इसका मतलब यह नहीं होता कि मेरी मेहनत कम थी. तैयारी का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाना होना चाहिए.”
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