Greater Noida GIMS Hospital: ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे आउटसोर्स कर्मचारियों और पुलिस के बीच बुधवार देर रात तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई. धरना समाप्त कराने पहुंचे पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद मौके पर हंगामे का माहौल बन गया. कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें जबरन धरना स्थल से हटाया गया और इस दौरान महिला व पुरुष कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की की गई.
आधी रात को मची अफरा-तफरी
धरने पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि देर रात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम धरना स्थल पर पहुंची और प्रदर्शन समाप्त करने के लिए दबाव बनाने लगी. कर्मचारियों के विरोध करने पर पुलिस ने उन्हें जबरन उठाने का प्रयास किया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस दौरान लाठीचार्ज जैसी स्थिति बनी और कई कर्मचारियों को चोटें आईं. उनका कहना है कि अचानक धरना स्थल के हॉल की लाइट भी बंद कर दी गई, जिससे अफरा-तफरी मच गई. कर्मचारियों के अनुसार, इस घटनाक्रम में कुछ महिला और पुरुष कर्मचारी घायल हुए हैं. मौके पर मौजूद लोगों ने घायल कर्मचारियों को प्राथमिक उपचार दिलाया.
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कर्मचारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की
घटना के दौरान पुलिसकर्मियों और कर्मचारियों के बीच काफी देर तक बहस और धक्का-मुक्की होती रही. कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उनकी मांगों पर विचार करने के बजाय प्रशासन और संस्थान प्रबंधन पुलिस के माध्यम से आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रहा है. कर्मचारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह अनुचित है और इससे उनका आंदोलन कमजोर नहीं पड़ेगा. प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
डायरेक्टर ने क्या कहा?
डायरेक्टर डॉक्टर ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता ने कहा कि धरने पर बैठे हुए कर्मचारियों को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया था, क्योंकि काफी मरीजों को परेशानी हो रही थी. इस दौरान कुछ कर्मचारियों ने इसका विरोध किया. हालांकि इस दौरान किसी भी तरह का कोई लाठी चार्ज नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि किसी भी तरह का कोई भी लाठी चार्ज नहीं हुआ है और ना ही कोई घायल हुआ है. मैं फिर से कह रहा हूं कि मेरे सभी कर्मचारी धरना समाप्त करें और अपने काम पर वापस आ जाए.
बता दें कि आउटसोर्स कर्मचारी पिछले 10 दिनों से नियमित होने की मांग को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं. इनके नियमित होने की मांग को छोड़कर बाकी सब मांगों को प्रबंधन के द्वारा माना जा चुका है.
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