- दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐसी सजा सुना दी, जिसकी हो रही है चर्चा
- दोनों पक्ष अगले महीने सदर बाजार थाने के स्टाफ का लंच होस्ट करेंगे
- इस फैसले ने सदर बाजार थाने के पुलिसकर्मियों के चेहरे पर भी मुस्कान ला दी है
अदालत का नाम सुनते ही दिमाग में पुलिस, वकील, तारीखें और मुकदमों की लंबी प्रक्रिया घूमने लगती है. लेकिन हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट में एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया, जहां जज साहब ने दो पक्षों के बीच झगड़ा तो खत्म कराया ही, साथ ही एक ऐसी सजा सुना दी जिसकी चर्चा अब हर तरफ हो रही है. अदालत ने मामला रद्द करने के बदले दोनों पक्षों को पुलिस थाने के सभी कर्मचारियों के लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था करने का आदेश दिया है.
क्या था पूरा मामला
बात साल 2022 की है, जब दिल्ली के सदर बाजार इलाके के रहने वाले मोमिन कुरैशी के खिलाफ मोहम्मद गुलफाम कुरैशी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. दिल्ली के सदर बाजार थाने में एफआईआर संख्या 909/2022 के तहत आईपीसी की धारा 385 (रंगदारी/जबरन वसूली) और 506 आपराधिक धमकी के तहत मामला दर्ज किया गया था. सालों तक चली खींचतान के बाद, आखिरकार 13 दिसंबर 2025 को दोनों पक्षों ने आपस में समझदारी दिखाते हुए एक समझौता पत्र पर दस्तखत कर लिए और पुराने गिले शिकवे भुलाकर राजीनामा कर लिया.
हाईकोर्ट का दरवाजा और जज साहब का फैसला
समझौते के बाद मोमिन कुरैशी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका (W.P.(CRL) 403/2026) दायर कर एफआईआर को पूरी तरह से रद्द (Quash) करने की मांग की. 4 फरवरी 2026 को जब यह मामला माननीय न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की बेंच के समक्ष आया, तो अदालत में शिकायतकर्ता और याचिकाकर्ता दोनों खुद मौजूद थे. पुलिस जांच अधिकारी ने दोनों की पहचान की पुष्टि की. शिकायतकर्ता मोहम्मद गुलफाम ने खुले दिल से कोर्ट को बताया कि अब उन्हें केस खत्म होने से कोई आपत्ति नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट के पुराने केस (जैसे ज्ञान सिंह बनाम पंजाब राज्य) का हवाला देते हुए अदालत ने माना कि जब दोनों पक्षों में दोस्ती हो चुकी है, तो केस को खींचना वक्त की बर्बादी होगी. अदालत ने एफआईआर और उससे जुड़ी तमाम कानूनी कार्रवाइयों को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया।
फैसला ही नहीं बल्कि मिली एक स्वादिष्ट सजा
केस तो खत्म हो गया, लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं हुई. जज साहब ने दोनों पक्षों की रजामंदी से इस मामले को हमेशा के लिए एक खुशनुमा मोड़ देने के लिए एक अनोखी शर्त रख दी. दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता मोमिन कुरैशी और शिकायतकर्ता मोहम्मद गुलफाम कुरैशी को निर्देश दिया कि वे दोनों मिलकर 21 फरवरी 2026 को दोपहर 1:00 बजे सदर बाजार थाने के सभी पुलिसकर्मियों और स्टाफ के लिए एक शानदार लंच होस्ट करेंगे. अदालत ने दोनों पक्षों द्वारा इस बात की सहमति देने और इस सुंदर पहल को स्वीकार करने के जज्बे की सराहना भी की.
अदालत के निर्देश की अवहेलना
दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता मोमिन कुरैशी और शिकायतकर्ता मोहम्मद गुलफाम कुरैशी को निर्देश दिया था कि वे दोनों मिलकर 21 फरवरी 2026 को पूरे थाने का लंच होस्ट करेंगे, मगर इन्होंने इस आदेश को नजरअंदाज कर दिया. अब दोनों पक्ष हाई कोर्ट के निर्देश का एहतराम करते हुए अगले महीने सदर बाजार थाने के स्टाफ का लंच होस्ट करेंगे.
पुलिसवालों के चेहरे पर खिली मुस्कान
अक्सर पुलिस थानों में केस और शिकायतों का तनाव बना रहता है, लेकिन इस फैसले ने सदर बाजार थाने के पुलिसकर्मियों के चेहरे पर भी मुस्कान ला दी है. अब कानूनी दांव पेच और विवाद का अंत किसी भारीभरकम जुर्माने या जेल की हवा से नहीं, बल्कि थाने में एक साथ बैठकर गरमा-गरम खाना खाने और कड़वाहट भूलकर नई शुरुआत करने से होने जा रहा है.
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