विज्ञापन

किराएदारी विवाद में DIOS हस्तक्षेप नहीं कर सकता! इलाहाबाद HC ने रद्द किया स्कूल को कब्जा लौटाने का आदेश

हाई कोर्ट ने DIOS, अपर जिलाधिकारी और स्कूल पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है. निर्देश में कहा गया कि दोनों अधिकारी अपने-अपने वेतन खाते से एक हफ्ते के अंदर याचिकाकर्ताओं को अदा करें.

किराएदारी विवाद में DIOS हस्तक्षेप नहीं कर सकता! इलाहाबाद HC ने रद्द किया स्कूल को कब्जा लौटाने का आदेश
यह मामला लखनऊ के नरही स्थित ‘विद्या मंदिर गर्ल्स स्कूल’ से जुड़ा है. (File Photo)
लखनऊ:

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने शुक्रवार को कहा कि जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को मकान मालिक और किराएदार के बीच निजी किराएदारी विवाद में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है. कोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत पुलिस की मदद से किराए पर चल रहे एक स्कूल भवन का कब्जा दोबारा किराएदार को दिलाया गया था.

जस्टिस जसप्रीत सिंह की सिंगल बेंच ने कहा कि डीआईओएस न तो इस विवाद में जरूरी पक्षकार था और न ही पीड़ित पक्ष. ऐसे में उसके द्वारा पुनर्विचार (रिकॉल) अर्जी दाखिल करना और उस पर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) द्वारा संबंधित पक्ष को नोटिस दिए बिना आदेश पारित करना पूरी तरह अवैध था.

बेंच ने आठ जून, 2026 के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके तहत संपत्ति का कब्जा मकान मालिकों से लेकर राजधानी लखनऊ के नरही स्थित सहायता प्राप्त विद्यालय ‘विद्या मंदिर गर्ल्स स्कूल' को वापस सौंप दिया गया था.

कोर्ट ने कहा कि यह आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन और शक्तियों का मनमाना प्रयोग था. अदालत ने डीआईओएस और अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के आचरण को कानून के शासन के विपरीत बताते हुए दोनों पर 25-25 हजार रुपये का व्यक्तिगत हर्जाना लगाया. कोर्ट ने निर्देश दिया कि दोनों अधिकारी यह राशि अपने-अपने वेतन खाते से एक हफ्ते के अंदर याचिकाकर्ताओं को अदा करें. 

ये भी पढ़ें: तारीख पर तारीख, अपहरण के 25 साल पुराने केस में इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणी

हाई कोर्ट ने विद्यालय पर भी 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और लंबित किराया अपील का निस्तारण एक हफ्ते के अंदर करने का निर्देश दिया.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला लखनऊ के नरही स्थित उस भवन से जुड़ा है, जिसमें विद्या मंदिर गर्ल्स स्कूल संचालित होता है. संपत्ति के मालिक डॉ. आभा गोयल और डॉ. अमित शेखर ने उत्तर प्रदेश शहरी परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 के तहत बेदखली का आदेश प्राप्त किया था और चार जून, 2026 को उन्हें भवन का कब्जा सौंप दिया गया था.

इसके बाद डीआईओएस ने एक पुनर्विचार अर्जी दाखिल की, जिस पर अपर जिलाधिकारी ने मकान मालिकों को सुने बिना विद्यालय को दोबारा कब्जा सौंपने का आदेश दे दिया. कोर्ट ने कहा कि डीआईओएस यह बताने में पूरी तरह फेल रहा कि निजी किराएदारी विवाद में हस्तक्षेप करने का अधिकार उसे किस कानूनी प्रावधान के तहत प्राप्त है.

ये भी पढ़ें: हाईकोर्ट ने कहा -थाना बना कारोबार का अड्डा, सबपर लो एक्शन

राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (संपत्ति के अपव्यय की रोकथाम) अधिनियम, 1974 का हवाला दिया, लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया. बेंच ने कहा कि विवादित संपत्ति निजी स्वामित्व वाली थी, न कि किसी शैक्षणिक संस्थान की. इसलिए, वर्ष 1974 के अधिनियम के प्रावधान इस मामले में लागू नहीं होते.

अपर महाधिवक्ता सुदीप कुमार एक ओर निजी प्रतिवादी विद्यालय की ओर से पेश हुए, जबकि दूसरी ओर उन्होंने राज्य सरकार और डीआईओएस का भी पक्ष रखा. इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि क्या किसी निजी पक्षकार की ओर से पेश होने के बाद वह राज्य और उसके अधिकारी का भी प्रतिनिधित्व कर सकते हैं.
 

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Allahabad High Court, Uttar Pradesh
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com