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This Article is From Jun 03, 2019

बर्बादी की कगार पर फर्रुखाबाद बसाने वाले नवाब बंगश का मकबरा, वारिस जी रहे मुफलिसी की जिंदगी

फर्रुखाबाद शहर में मोहम्मद खान बंगश के अलावा काबुल के नवाब और बंगश परिवार के भी कई मकबरे हैं.

बर्बादी की कगार पर फर्रुखाबाद बसाने वाले नवाब बंगश का मकबरा, वारिस जी रहे मुफलिसी की जिंदगी
300 साल से भी ज्यादा पुराना है नवाब मोहम्मद बंगश का मकबरा

फर्रुखाबाद शहर को बसाने वाले नवाब बंगश खान की ऐतिहासिक विरासत धीरे-धीरे मलबे में तब्दील हो रही है. बंगश खान की पुरातात्विक धरोहरें ही नहीं बल्कि नवाब के वंशज भी आज मुफलिसी की जिंदगी जीने को मजबूर हैं. 
मुगल शासक फरुखशियर के नाम पर फर्रुखाबाद शहर को बसाने वाले मोहम्मद खान बंगश का शहर में बना मकबरा पुरातत्व विभाग के अधीन है लेकिन मकबरे के आसपास शराबी और जुआरियों ने अड्डा बना रखा है और नवाब बंगश खान की कब्र बच्चों के खेलने के काम आ रही है. कुछ साल पहले  तीन सौ साल पुराने इस मकबरे की गुंबद को बचाने के लिए पुरातत्व विभाग ने यहां कुछ काम करवाया था लेकिन उसके बावजूद इस ऐतिहासिक मकबरे का बड़ा हिस्सा जमींदोज़ हो चुका है.

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फर्रुखाबाद शहर में मोहम्मद खान बंगश के अलावा काबुल के नवाब और बंगश परिवार के भी कई मकबरे हैं लेकिन कुछ मिट्टी में मिल चुके हैं तो कुछ पर भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया है.  नवाब मोहम्मद खान बंगश के वंशज काजिम हुसैन खान बंगश बताते हैं कि वे हर साल अनुरोध करते हैं कि इसकी बाउंड्री करवा दी जाए. यहां असमाजिक तत्व बैठे रहते हैं. जुआ खेलते हैं और शराब पीते रहते हैं. उन्होंने कहा कि ये फर्रुखाबाद के लिए पिकनिक स्पॉट हो सकता है. लोग इसे देखने आएंगे और पहचानेंगे कि ये फर्रुखाबाद के संस्थापक है. 

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नवाब बंगश खान से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत ही नहीं उनके वारिस भी बदहाली के शिकार है. नवाब बंगश खान की 11 वीं पीढ़ी के वारिस काजिम हुसैन खान बंगश काशीराम आवास योजना के मकान में अपने बेटे और बहू के साथ रहते हैं. एक डाक्टर के यहां पर्चा बनाकर किसी तरह अपने परिवार का गुजर बसर कर रहे हैं. 
स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेने के चलते इनके तीन परदादाओं को फांसी दे दी गई और एक को देश निकाला दे दिया गया था. 

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काजिम कहते हैं कि हम भी आज नवाबों की तरह रहते लेकिन हमारी सबसे बड़ी गलती आजादी के आंदोलन में भाग लेना था. काजिम हुसैन ने कहा, 'हमारी यही अच्छाई या गलती समझ लीजिए कि हम अंग्रेजों से लड़े और हम तबाह हो गए. हमारे तीन परदादाओं को फांसियां हुई एक को मुल्क बदर कर दिया गया और सारी जमीन जायदाद हमारी जब्त कर ली गई.' उन्होंने  कहा कि जो देश के लिए कभी नहीं लड़े कलकत्ता संग्राम या मेरठ में कभी भाग नहीं लिया वे आज नवाबों की जिंदगी जी रहे हैं और हम छोटी सी नौकरी करके गुजर बसर कर रहे हैं.

तीन सौ साल पहले फर्रुखाबाद को बसाने वाले मोहम्मद खान बंगश और उनके वंशजों के यहां बीस मकबरे हैं. लेकिन सब मिट्ठी के ढेर में तब्दील हो रहे हैं. कुछ दिन बाद आने वाली पीढ़ी फर्रुखाबाद को बसाने वाले मोहम्मद खान बंगश और अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते अपने को खत्म करने वाले उनके वारिसों के बारे में शायद कभी नहीं जान पाएगी.

वीडियो: बदहाली का शिकार फर्रुखाबाद बसाने वाले नवाब का मकबरा

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