- मई, जून और जुलाई के दौरान मुख्यमंत्री ने यूपी के 43 अलग-अलग जिलों का दौरा किया
- सीएम योगी आदित्यनाथ ने जुलाई महीने में अपने दौरे और तेज कर दिए
- भाजपा इसे मुख्यमंत्री की नियमित कार्यशैली का हिस्सा बता रही है
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लगातार जिलों के दौरे राजनीतिक चर्चा का विषय बन गए हैं. मई, जून और जुलाई के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 43 अलग-अलग जिलों का दौरा करते हुए 36,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. राजनीतिक गलियारों में इन दौरों को चुनावी सक्रियता बढ़ाने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है, जबकि भाजपा इसे मुख्यमंत्री की नियमित कार्यशैली का हिस्सा बता रही है.
आंकड़ों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने इस दौरान 43 अलग-अलग जिलों का दौरा किया. इनमें वाराणसी चार बार, जबकि देवरिया, बिजनौर, प्रयागराज, अयोध्या, कुशीनगर और गाजियाबाद दो-दो बार पहुंचे. लगातार एक ही जिलों में दोबारा पहुंचने को लेकर भी सियासी हलकों में चर्चा तेज है. मई में मुख्यमंत्री ने गोरखपुर, प्रयागराज, बिजनौर, वाराणसी, देवरिया, महाराजगंज, मऊ और सहारनपुर का दौरा किया. बात करें जून की तो जून में हाथरस, आजमगढ़, अलीगढ़, बलरामपुर, गौतम बुद्ध नगर (नोएडा), पीलीभीत, अयोध्या, गोंडा, फिरोजाबाद, कुशीनगर, महोबा, संत कबीर नगर, उन्नाव, झांसी, हमीरपुर, ललितपुर, वाराणसी, मुरादाबाद और गाजियाबाद सहित कई जिलों में कार्यक्रम किए.
सीएम योगी आदित्यनाथ ने जुलाई महीने में अपने दौरे और तेज कर दिए. जुलाई में योगी वाराणसी, बांदा, चित्रकूट, मैनपुरी, अमरोहा, बहराइच, बाराबंकी, बिजनौर, बुलंदशहर, इटावा, कुशीनगर, शामली, प्रतापगढ़, अयोध्या, सुल्तानपुर, बस्ती, आगरा, फतेहपुर, संभल, प्रयागराज, गाजियाबाद और श्रावस्ती समेत कई जिलों में विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. इन 3 महीनों में मुख्यमंत्री ने सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई और आधारभूत ढांचे से जुड़ी 36,877 करोड़ की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया.
सपा ने उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मोहम्मद आजम खान ने मुख्यमंत्री के दौरों को चुनावी अभियान करार देते हुए कहा कि जिन-जिन जिलों में मुख्यमंत्री गए, वहां जनहित के अहम मुद्दे चर्चा से गायब रहे. उनके मुताबिक कई जगह पेपर लीक का मुद्दा था तो कहीं राम मंदिर में चोरी का मामला चर्चा में था, लेकिन मुख्यमंत्री ने इन सवालों पर बात करने के बजाय केवल लोकार्पण और शिलान्यास के कार्यक्रमों के जरिए चुनावी माहौल बनाने की कोशिश की.
बीजेपी का पलटवार
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने सपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव अभी दूर हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुरू से ही पूरे प्रदेश का लगातार दौरा करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि "जो मुख्यमंत्री अपनी सरकार में नोएडा जाने से कतराते थे, वे ऐसी बातें न करें. एसी में 11 बजे सोकर उठने वाले अखिलेश यादव जब तक अपने दिन की शुरुआत करते हैं, तब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई जिलों का दौरा कर चुके होते हैं." उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की कार्यशैली हमेशा से फील्ड में रहकर काम करने की रही है और उनके दौरों को चुनावी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए.
क्या बोले वरिष्ठ पत्रकार?
वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार शुक्ला का मानना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रदेशभर में दौरा करना नई बात नहीं है, लेकिन इस बार के दौरों का राजनीतिक महत्व अधिक दिखाई देता है. उनके अनुसार राम मंदिर में चोरी के मामले से सरकार की छवि पर जो असर पड़ा, उसके बाद लगातार जिलों के दौरे और विकास परियोजनाओं के कार्यक्रम उस राजनीतिक नुकसान की भरपाई की कोशिश के रूप में भी देखे जा सकते हैं. उनका कहना है कि इन दौरों के जरिए मुख्यमंत्री विकास कार्यों के साथ-साथ अपने समर्थकों और मतदाताओं को राजनीतिक संदेश देने का भी प्रयास कर रहे हैं.
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