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यूपी चुनाव से पहले फिर शुरू हुआ नाम बदलने का खेल, भदोही को फिर संत रविदास नगर क्यों बनाया गया

उत्तर प्रदेश में जिलों, शहरों और शिक्षण संस्थानों के नाम बदलने का पिछले काफी सालों से चल रहा है. आइए जानते हैं कि इसके पीछे के राजनीतिक कारण क्या हैं.

यूपी चुनाव से पहले फिर शुरू हुआ नाम बदलने का खेल, भदोही को फिर संत रविदास नगर क्यों बनाया गया
नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं. लेकिन उसकी बिसात अभी से बिछाई जा रही है. उत्तर प्रदेश की जाति-धर्म वाली राजनीति में नाम का बड़ा महत्व है. इसलिए प्रदेश में अलग-अलग सरकारों ने जिलों और शहरों के नाम अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार बदले हैं. इस कड़ी में सबसे नया कदम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उठाया है. उन्होंने बुधवार को भदोही जिले का नाम बदलकर संत रविदास नगर करने की घोषणा की. इस तरह भदोही का नाम पांचवीं बार बदलेगा. भदोही उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा जिला नहीं है, जिसका नाम बदला गया है. आइए जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में जिलों, शहरों और शिक्षण संस्थानों के नाम बदलने के पीछे की राजनीति क्या है.

कितनी बार बदला है भदोही का नाम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को भदोही जिले का नाम बदलकर संत रविदास नगर करने की घोषणा की. समाजवादी पार्टी के संस्थापक और तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 1994 में भदोही को जिला बनाया था. अपने कालीनों के लिए दुनिया भर में मशहूर भदोही पहले वाराणसी जिले की एक तहसील हुआ करता था. जिला बनने के करीब तीन साल बाद 1997 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और बसपा प्रमुख मायावती ने इस जिले का नाम संत रविदास नगर कर दिया. इसके बाद नवंबर 1999 में बीजेपी सरकार ने इसका नाम संत रविदास नगर भदोही कर दिया. यही नाम करीब डेढ़ दशक तक चलता रहा. लेकिन 2014 में अखिलेश यादव की सरकार ने संत रविदास नगर भदोही का नाम फिर से भदोही कर दिया. अब भदोही का नाम एक बार फिर संत रविदास नगर होगा. 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत रविदास की 650वीं जयंती पर वाराणसी में आयोजित एक कार्यक्रम में भदोही का नाम बदलने की घोषणा की. इस कार्यक्रम का आयोजन बीजेपी ने 'समरसता संकल्प अभियान' का शुभारंभ करने के लिए किया था. बीजेपी ने उत्तर प्रदेश और पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस अभियान का आगाज किया है. इसका मकसद दलित मतदाताओं में अपनी पैठ बढ़ाना है. इन दोनों राज्यों में दलितों की आबादी बहुत अधिक है. दरअसल संत रविदास का जितना सम्मान हिंदू समाज में है, उतना ही सम्मान सिख धर्म में भी है. बीजेपी इस अभियान के जरिए साथ एक साथ दो वर्गों में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है. दलित उत्तर प्रदेश में सपा के 'पीडीए' का प्रमुख आधार हैं. दलित वोटों में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सपा सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवार उतार रही है. लोकसभा चुनाव में उसे इसका सबसे बड़ा फायदा अयोध्या में मिला था, जहां सामान्य सीट होते हुए भी दलित समाज के अवधेश प्रसाद जीते थे. वहीं किसान आंदोलन की वजह से बीजेपी को पंजाब में काफी नुकसान उठाना पड़ा है. वहां अकाली दल उसका साथ छोड़ चुका है. बीजेपी के कई दूसरे प्रयोग पंजाब में उसे फायदा नहीं दिला पाए. इसलिए बीजेपी ने संत रविदास के नाम पर दलितों में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है. जिसकी आबादी पंजाब में सबसे अधिक है.  

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मायावती ने कितने जिलों के नाम बदलें

उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर जिलों के नाम बदलने का काम बसपा के नेतृत्व वाली सरकारों ने किया. बसपा प्रमुख मायावती ने अपने शासन काल में शामली का नाम प्रबुद्ध नगर, संभल का भीम नगर, हापुड़ का पंचशील नगर, हाथरस का महामाया नगर, अमरोहा का ज्योतिबा फुले नगर, कासगंज का कांशीराम नगर, अमेठी का छत्रपति शाहूजी महाराज नगर, कानपुर देहात का रामाबाई नगर और भदोही का नाम संत रविदास नगर कर दिया था. लेकिन अखिलेश यादव की सरकार ने 2012 से 2017 के बीच इन जिलों का पुराना नाम बहाल कर दिया था. 

दरअसल मायावती ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने चार कार्यकाल में कई नए जिले बनाए थे. उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में आंबेडकर नगर और उधम सिंह नगर के नाम से दो जिले बनाए थे. आज आंबेडकर नगर उत्तर प्रदेश तो उधम सिंह नगर उत्तराखंड में है. उन्होंने  गौतम बुद्ध नगर, कौशांबी और अमरोह को भी जिला बनाया था. उन्होंने अपने अंतिम कार्यकाल में शामली, हापुड़, संभल और अमेठी को जिला बनाया थे. मायावती ने जितने जिले बनाए थे, उनके नाम दलित और पिछड़े समाज के महापुरुषों के नाम पर रखे गए थे. मायावती ने इसके जरिए अपने वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश की थी. लेकिन अखिलेश यादव ने उन जिलों के में से कई के नाम बदल दिए. लेकिन आंबेडकर नगर और गौतम बुद्ध नगर जिले का नाम किसी भी सरकार ने नहीं बदला. दरअसल मायावती ने कुछ मुस्लिम बहुल इलाकों में भी जिले बनाए और उनके नाम दलित और पिछड़ा समाज के महापुरुषों के नाम पर कर दिया था. इसका बड़े पैमाने पर विरोध भी हुआ. सपा ने वोट बैंक की राजनीति में आठ जिलों के नाम बदल दिए. सपा-बसपा की यह राजनीति आज भी रह-रहकर टकराती रहती है. सपा के नेता या संगठन जब भी कांशीराम या ज्योति बा फुले के नाम पर कोई बात कहते हैं तो मायावती उनके नाम पर बने जिलों का नाम बदलना याद दिला देती हैं. यह काम सपा सरकार में हुआ था. इससे सपा को असहज होना पड़ता है.

BSP, Mayawati, Uttar Pradesh

मायावती ने अपने कार्यकाल में कई नए जिले बनाए और कई जिलों का नाम बदला. इन जिलों के नाम बहुजन महापुरुषों के नाम पर रखे गए.

बीजेपी की सरकार में कितने नाम बदले

साल 2017 में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से प्रदेश में जिलों के नाम बदले गए. साल 2017 में इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज और 2018 में फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या कर दिया गया. इस सरकार में रेलवे स्टेशनों का नाम बदलने का काम भी बहुत बड़े पैमाने पर हुआ. 2018 में मुगलसराय जंक्शन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर और 2021 में झांसी रेलवे स्टेशन का नाम वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन कर दिया गया. साल 2024 में अकेले अमेठी जिले के आठ रेलवे स्टेशनों के नाम बदल दिए गए. इसमें कासिमपुर हाल्ट का नाम जैस सिटी, जैस का नाम गुरु गोरखनाथ धाम, मिसरौली का नाम  मां कालिकन धाम, बनी का नाम स्वामी परमहंस,  निहालगढ़ का नाम महाराजा बिजली पासी, अकबरगंज का नाम मां अहोरवा भवानी धाम, वारिसगंज का नाम अमर शहीद भले सुल्तान और फुरसतगंज का नाम तपेश्वरनाथ धाम कर दिया गया. इससे पहले 2023 में प्रतापगढ़ जंक्शन को नाम मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़ जंक्शन, अंतू स्टेशन को मां चंद्रिका देवी धाम अंतू और बिशनाथगंज का नाम शनिदेव धाम बिशनाथगंज किया जा चुका था. 

बात केवल जिलों, शहरों और रेलवे स्टेशनों के नाम बदलने तक नहीं रही है. उत्तर प्रदेश की सरकारों ने विश्वविद्यालयों,  कॉलेजों और दूसरे शिक्षण संस्थानों के नाम भी बदले हैं. साल 1997 में उत्तर प्रदेश में बीजेपी और बसपा गठबंधन की सरकार थी. इस दौरान गोरखपुर के गोरखपुर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय कर दिया गया. वहीं लखनऊ के ऐतिहासिक किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज का नाम बदलकर छत्रपति शाहू जी महाराज के नाम पर कर दिया गया था. अखिलेश यादव की सरकार ने किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज का पुराना नाम बहाल कर दिया. यह कॉलेज मेडिकल यूनिवर्सिटी में बदल चुका है.  

मुख्यमंत्री अखिलेश .यादव ने अपनी सरकार में मायावती की सरकार में जिलों के बदले गए नाम को हटाकर पुराने नाम बहाल कर दिए थे.

मुख्यमंत्री अखिलेश .यादव ने अपनी सरकार में मायावती की सरकार में जिलों के बदले गए नाम को हटाकर पुराने नाम बहाल कर दिए थे.

योगी सरकार ने इसी तरह सहारनपुर स्टेट यूनिवर्सिटी को नाम मां शाकुंभरी यूनिवर्सिटी  और औरैया मेडिकल कॉलेज का नाम अहिल्याबाई होल्कर मेडिकल कॉलेज कर दिया गया है. इनके अलावा योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले साल जून में प्रदेश के पांच इंजिनियरिंग कॉलेजों के नाम बदल दिए. इसके तहत प्रतापगढ़ के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज का नाम भारत रत्न बाबा साहब भीमराव आंबेडकर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, मिरजापुर के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज का नाम सम्राट अशोक राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज मिर्जापुर,बस्ती के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज का नाम भारत रत्न सरदार बल्लभभाई पटेल राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, गोण्डा के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज का नाम मां पाटेश्वरी देवी राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज और मैनपुरी के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज का नाम लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज कर दिया गया था. 

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