लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रदेशवासियों के नाम एक और 'पाती' लिखी. कांवड़ यात्रा को समरसता का महापर्व बताते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांवड़ यात्रा धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, समाज और संस्कृति की जीवंत पाठशाला है. यह करोड़ों श्रद्धालुओं को शिवभक्ति के सूत्र में जोड़ती है.
मुख्यमंत्री योगी ने पाती में लिखा, ''भगवा वस्त्र, कंधे पर कांवड़ और हृदय में भोलेनाथ की भक्ति-एक है हर कांवड़िए की पहचान. पैदल चलते कदम अलग हो सकते है, लेकिन सभी का लक्ष्य सिर्फ महादेव का जलाभिषेक ही है. कांवड़ यात्रा में जाति, वर्ग, भाषा और क्षेत्र के भेद गौण हो जाते हैं. कांवड़ यात्रा सनातन संस्कृति के समभाव और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण है. तप से चरित्र दमकता है, सेवा से समाज संवरता और एकता से राष्ट्र निखरता है. दिव्यांग शिवभक्तों का समर्पण देखकर मन श्रद्धा से भर उठता है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए यूपी सरकार कृतसंकल्पित है. कांवड़ यात्रा मार्गों पर स्वच्छता, पेयजल और चिकित्सा समेत सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित हैं. कांवड़ियों के स्वागत में पुष्पवर्षा, यात्रा मार्गों पर विशेष इंतजाम हैं. शिवभक्तों की सुगम यात्रा के लिए प्रभावी यातायात प्रबंधन और सतत निगरानी की जा रही है.
मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों,
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) August 10, 2026
भारतीय परंपराओं में कुछ यात्राएं धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं होतीं, अपितु वे समाज, संस्कृति, अनुशासन एवं लोकजीवन की जीवंत पाठशाला भी बन जाती हैं। श्रावण में निकलने वाली कांवड़ यात्रा ऐसी ही एक अनुपम परंपरा है, जो प्रत्येक वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं को… pic.twitter.com/Gex9QSpGDX
कांवड़ियों से सीएम ने की अपील
मुख्यमंत्री ने अपील की कि कांवड़ यात्रा को सामाजिक उत्तरदायित्व और सेवा का उत्सव बनाएं. पर्यावरण-अनुकूल कांवड़ अपनाएं, प्लास्टिक मुक्त जीवन का लें संकल्प. कांवड़िए से अपील की कि एंबुलेंस और विद्यालय वाहनों को प्राथमिकता दें. उन्होंने कहा कि श्रद्धा, अनुशासन, संयम और सेवा- यही कांवड़ यात्रा की आत्मा है. कांवड़ यात्रा भगवान शिव के लोकमंगल के संदेश को आगे बढ़ाती है.
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