- यूपी चुनाव से पहले महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की योजना पर सरकार ने न तो पुष्टि की है और न ही खारिज किया
- यूपी में 6 करोड़ महिला वोटर हैं, जिनमें से आधी को अगर सहायता दी गई तो खर्च कई हजार करोड़ तक पहुंच सकता है
- 2026 यूपी का बजट 9,70,200 करोड़ के करीब है, जिसमें बड़ी आर्थिक सहायता देना चुनौतीपूर्ण होगा
यूपी में आने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर जारी गहमागहमी के बीच दावा किया जा रहा है कि योगी सरकार महिलाओं को 20 हजार से 50 हजार रुपये के बीच आर्थिक सहायता कर आधी आबादी को साधने की कोशिश कर सकती है. इन दावों को लेकर राज्य सरकार ने खुलकर ना हां कहा है और नहीं ही इन्हें खारिज किया गया है. वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सपा सरकार आने पर महिलाओं को 40 हजार रुपये देने की घोषणा कर दी.
क्या कहते हैं आंकड़े?
बात कर लेते हैं आंकड़ों की. यूपी में कुल वोटर्स की संख्या 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 है. इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 7 करोड़ 30 लाख 71 हजार 61 और महिला मतदाताओं की संख्या 6 करोड़ 9 लाख 9 हजार 525 है. अगर हम महिला वोटर्स को छह करोड़ मान लें और उसमें से आधी महिलाओं को लाभार्थी मान लें तो 3 करोड़ महिलाओं को पैसे देने होंगे. अगर 20 हजार रुपये प्रति महिला मान लें तो ये आंकड़ा 60,000 करोड़ तक चला जाएगा.
महिला लाभार्थियों की संख्या 3 करोड़ के आधार पर 40 हजार करोड़ देने पर 1 लाख 20 हजार करोड़ और 50 हजार रुपये प्रति महिला दिए जायें तो आंकड़ा डेढ़ लाख करोड़ तक पहुंच जाएगा. यूपी की अर्थव्यवस्था की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2026-27 का कुल बजट 9 लाख 72 हजार करोड़ रुपयों का है. इसमें मूल बजट 9 लाख 12 हजार करोड़ और अनुपूरक बजट का 59 हजार करोड़ शामिल है. सरकार के पास शीतकालीन सत्र में एक अनुपूरक बजट लाने का विकल्प है लेकिन वो कितने का हो सकता है, ये किसी को नहीं पता.
क्या इतने रुपयों की आर्थिक सहायता संभव है?
सवाल ये है कि क्या 20 हजार या 40 हजार या 50 हजार रुपयों की आर्थिक सहायता दिया जाना संभव है. जानकार कहते हैं कि ये मुश्किल है लेकिन असंभव नहीं है. हालांकि सवाल ये है कि अगर सरकार को महिलाओं को आर्थिक लाभ देना भी हो तो वो पैसे मैनेज कैसे किए जायेंगे. चालू वित्तीय वर्ष में सरकार ने खर्चों का हिसाब किताब करके बजट आवंटन कर दिया है. वर्तमान तिमाही और अगली तुम्हारी में क्या सरकार के राजस्व में इतना पैसा आ सकता है कि वो इतनी भरी भरकम राशि महिलाओं को देने पर खर्च कर सके, ये बड़ा सवाल है.
इतिहास पर नजर डालें तो ऐसा नहीं है कि राज्य सरकार ने बड़ी राशि अपने विवाद से खर्च ना की हो. साल 2017 में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में बीजेपी की सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट की बैठक में 36,000 करोड़ रुपए की कर्जमाफी की गई थी. गन्ना किसानों के बकाये और उनके चालू वित्तीय वर्ष के भुगतान के आंकड़ों पर नजर डालें तो सरकार का दावा है कि 2017 से अब तक दो लाख करोड़ से ज्यादा का भुगतान किया जा चुका है.
वित्तीय वर्ष 2026-27 के यूपी के मूल बजट के आंकड़े बताते हैं कि राज्य सरकार की कुल आमदनी 8,48,233 रही और रेवन्यू सरप्लस 64,458 करोड़ रुपये का रहा. राजकोषीय घटा यानी फिस्कल डेफिसिट का आंकड़ा 1,18,481 है. रेवन्यू एक्सपेंडिचर की बात करें तो सरकारी खर्चों, योजनाओं, प्रशासनिक व्यय, वेतन और पेंशन जैसे मदों में सरकार 5 लाख 83 हजार करोड़ खर्च करती है. कैपिटल एक्सपेंडिचर का आंकड़ा 1 लाख 78 हजार करोड़ का है। सरकार ने ऋण अदायगी के मद में करीब 62 हजार करोड़ खर्च किए हैं.
महिलाओं के लिए कितना खर्च कर सकती है सरकार?
महिलाओं के लिए होने वाले खर्च की बात करें तो चालू वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार ने महिला एवं बाल कल्याण विभाग के हिस्से में खर्च का कुल प्रावधान 15 हजार 662 करोड़ 63 लाख 16 हजार किया है. इनमें विभाग के खर्चे, महिलाओं और लड़कियों के लिए चलने वाली योजनाएं, अनुदान जैसे खर्च शामिल हैं. ऐसे में अलग से 60 हज़ार करोड़ से लेकर 1,50,000 करोड़ तक का खर्च इसमें से नहीं हो सकता. ऐसे में सवाल ये है क्या केंद्र इस भारी भरकम खर्च को वहन करने को तैयार होगा?
ये तो हुई आंकड़ों की बात. सरकार की मंशा की बात करें तो इसको लेकर स्पष्टता नहीं है कि सरकार आर्थिक मदद के तौर पर महिलाओं को पैसे देने जा रही है या नहीं. ऐसे में यह भी नहीं पता कि अगर पैसे दिए जाने की योजना है तो वो कितनी महिलाओं को और किस योजना के तहत दिए जाएंगे. हालांकि विकल्प के तौर पर गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों में शामिल महिलाओं या किसी अन्य तरीके से महिलाओं की संख्या घटाकर ऐसा किया जाये तो शायद भर भी कम पड़े और एक दांव आधी आबादी को लेकर खेल जा सके.
महिलाओं को दिए जाने वाले लाभ की बात करें तो वृद्धा पेंशन और विधवा पेंशन जैसी योजनाओं में पहले से महिलाओं को लाभ दिया जा रहा है. स्वयं सहायता समूहों में शामिल महिलाओं के लिए भी सरकार बजट में प्रावधान रखती है. महिला हॉस्टल, लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना, छोटी बच्चियों के लिए सरकारी स्कीम जैसी योजनाएं भी सरकार चला रही है. केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त स्कीम में उज्ज्वला योजना, आयुष्मान योजना, शौचालय योजना, आवास योजना जैसी योजनाओं में भी महिलाओं को लाभ दिया जा रहा है.
कोरोना काल में केंद्र सरकार ने मुफ्त राशन योजना की शुरुआत की थी. इस योजना के अंतर्गत देश में लगभग 80 करोड़ लाभार्थी हैं. यानी इसमें भी आधी आबादी की संख्या गिनें तो लगभग 40 करोड़ रुपये महिलाएं मुफ्त राशन योजना की लाभार्थी हैं. यूपी की कुल 25 करोड़ की आबादी के हिसाब से अकेले यूपी में 12 करोड़ से ज्यादा महिलाएं मुफ्त राशन स्कीम की लाभार्थी मानी जा सकती हैं. इन सबके बावजूद अगर राज्य सरकार को महिलाओं को लाभार्थी बनाकर आर्थिक सहायता करनी है तो आखिर पैसों का मैनेजमेंट कैसे होगा, ये देखना दिलचस्प होगा.
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