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India-Switzerland Deal: 10 लाख रोजगार, 100 बिलियन डॉलर निवेश, 5 साल का वीजा, हजारों छात्रों-युवाओं को मौके, जानें भारतीयों को क्या-क्‍या फायदे

India-Switzerland Deal: 5 साल तक मल्टीपल-एंट्री वीजा, युवा प्रोफेशनल्स के लिए अवसर और 100 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य. समझौते का पूरा फायदा आसान भाषा में समझिए.

India-Switzerland Deal: 10 लाख रोजगार, 100 बिलियन डॉलर निवेश, 5 साल का वीजा, हजारों छात्रों-युवाओं को मौके, जानें भारतीयों को क्या-क्‍या फायदे
भारतीयों के लिए खुलेंगे नए अवसर, स्विट्जरलैंड के साथ व्यापार से लेकर माइग्रेशन तक कई समझौते
Source: NDTV Graphics/Social

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच द्विपक्षीय रिश्तों को नई दिशा देने वाले कई अहम समझौते हुए हैं. स्विस राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन (Guy Parmelin) की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा, परमाणु ऊर्जा और तकनीक के साथ-साथ माइग्रेशन और आवाजाही (Migration-Mobility) पर भी समझौता हुआ.

इन समझौतों का असर सिर्फ दोनों देशों के कारोबारी रिश्तों तक सीमित नहीं है. भारतीय छात्रों, युवाओं, प्रोफेशनल्स, स्टार्टअप्स और कंपनियों के लिए भी नए अवसर खुलने की उम्मीद है. आइए समझते हैं कि इस साझेदारी का आम भारतीय और बिजनेस सेक्टर के लिए क्या मतलब है.

भारतीय छात्रों और युवाओं के लिए कैसे खुलेंगे नए रास्ते?

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच हुए माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट से योग्य भारतीय नागरिकों के लिए दोनों देशों के बीच आवाजाही के नए रास्ते खुलेंगे.

5 साल तक का मल्टीपल-एंट्री वीजा

इस समझौते के तहत योग्य नागरिकों के लिए अधिकतम 5 साल तक वैध मल्टीपल-एंट्री वीजा का प्रावधान है. इसके तहत हर यात्रा पर छह महीने तक रुकने की सुविधा होगी.

इसके अलावा, छात्रों के लिए एक साल का नवीकरणीय छात्र परमिट भी उपलब्ध होगा.

इसका मतलब ये है कि स्विट्जरलैंड में पढ़ाई या दूसरे योग्य उद्देश्यों के लिए जाने वाले भारतीयों के लिए लंबे समय तक आवाजाही की सुविधा मिल सकती है.

हर साल 300 युवा प्रोफेशनल्स को मौका

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच यंग प्रोफेशनल एग्रीमेंट भी हुआ है.

इसके तहत हर साल दोनों देशों के 300 युवा प्रोफेशनल्स को एक-दूसरे के देश में अस्थायी रोजगार और पेशेवर अनुभव हासिल करने का मौका मिलेगा. इस संख्या को आगे बढ़ाकर 500 तक किया जा सकता है.

इससे युवाओं को अपने क्षेत्र में काम करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने, भाषा सीखने और अपने कौशल को बेहतर बनाने का मौका मिलेगा.

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रिसर्च और स्टार्टअप्स के लिए भी अवसर

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच हुए समझौतों से शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स और वैज्ञानिकों के लिए भी नए अवसर बनने की उम्मीद है.

AIT इंडिया यानी इंडो-स्विस एकेडमिया इंडस्‍ट्री ट्रेनिंग प्रोग्राम के जरिए ग्लोबल प्लेटफॉर्म और फंडिंग के अवसर मिलने की संभावना है.

स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान भी शुरू किए जाएंगे.

व्यापार और निवेश पर क्या होगा असर?

भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी EFTA के बीच हुआ Trade and Economic Partnership Agreement (TEPA) लागू हो चुका है. इसके बाद स्विट्जरलैंड के साथ रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने से व्यापार और निवेश के रिश्तों को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है.

100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख रोजगार का लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साझेदारी को निवेश, नवाचार, रोजगार और साझा समृद्धि के लिए एक “महत्वाकांक्षी खाका” बताया है.

इसके तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश की जाएगी.

इन सेक्टरों को मिल सकता है फायदा

भारत की ओर से स्विट्जरलैंड को कृषि, दवा, वस्त्र और इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.

वहीं, भारत में जैव प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान, बैंकिंग, बीमा और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में स्विस निवेश को बढ़ावा देने की कोशिश होगी.

इससे दोनों देशों की कंपनियों के लिए कारोबार और निवेश के नए अवसर बन सकते हैं.

इंफ्रास्ट्रक्चर में भी बढ़ेगा सहयोग

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच बुनियादी ढांचे और परिवहन के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है.

इसमें टिकाऊ बुनियादी ढांचा, इलेक्ट्रिक वाहन, रोपवे, सर्कुलर इकोनॉमी और सुरंग निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल हैं.

भारत में वाराणसी का रोपवे और नोएडा का जेवर एयरपोर्ट दोनों देशों के इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोग के उदाहरण के तौर पर सामने आए हैं.

रक्षा और परमाणु ऊर्जा में भी सहयोग

व्यापार और लोगों के बीच आवाजाही के अलावा दोनों देशों ने रणनीतिक क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है.

भारत और स्विट्जरलैंड ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई है. इसके साथ ही सैन्य आदान-प्रदान और रक्षा उत्पादन में सहयोग की नई संभावनाएं तलाशने की बात भी कही गई है.

AI और ग्लोबल पीस पर भी साथ आए दोनों देश

भारत और स्विट्जरलैंड ने वैश्विक शांति, कूटनीति और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावना है.

अगले साल जिनेवा में होने वाले AI शिखर सम्मेलन के जरिए दोनों देश AI को जिम्मेदार, समावेशी और मानव-केंद्रित बनाने की दिशा में काम करने की बात कह चुके हैं.

भारत और स्विट्जरलैंड की ये साझेदारी सिर्फ दो देशों के बीच व्यापार और कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है. प्रवासन और आवाजाही समझौते से छात्रों, युवा प्रोफेशनल्स और शोधकर्ताओं के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं, वहीं व्यापार और निवेश से भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए अंतरराष्ट्रीय अवसर बढ़ सकते हैं.

अब इस साझेदारी का असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इन समझौतों के तहत तय किए गए अवसरों और लक्ष्यों को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है. 

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