अयोध्या के राम मंदिर में रामलला के चढ़ावे और दान में हुई कथित चोरी के मामले में हर दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं.पुलिस और एसआईटी (SIT) की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है,मंदिर की सुरक्षा,प्रबंधन और भर्ती प्रक्रिया की कलई खुलती जा रही है.45 दिनों की भारी-भरकम रिकॉर्डिंग खंगालने के बाद पुलिस ने जो दावा किया है, उसने सभी को हैरान कर दिया है.इससे पता चला है कि मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे की गिनती के दौरान कर्मचारी सीसीटीवी कैमरों के सामने ही शातिर तरीके से नोटों के बंडल अपने कपड़ों और मोज़ों में छिपाकर पार कर रहे थे. दूसरी तरफ इस बड़े विवाद के बीच अब मंदिर प्रशासन ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए रामलला के गर्भगृह सहित परिसर के सभी प्रमुख मंदिरों के पुजारियों की ड्यूटी का नया रोस्टर जारी कर दिया है.
राम मंदिर दान गबन केस का राज खुला: योगा सेंटर में छिपा था पैसा, NDTV रिपोर्टर का खुलासा #RamMandir #NDTVExclusive @mukeshmukeshs pic.twitter.com/eM1uLdRS3p
— NDTV India (@ndtvindia) July 1, 2026
मोजों और कपड़ों में छिपाए नोट, 45 दिन की फुटेज ने खोले राज
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, राम मंदिर के पिलग्रिम फैसिलिटी सेंटर (PFC) के भीतर लगे कैमरों की 45 दिनों की फुटेज की बारीकी से जांच की गई. इस जांच में कम से कम पांच कर्मचारी ऐसे पाए गए जो नोटों की गिनती करने के दौरान बेहद शातिर तरीके से नोटों के बंडल गायब कर रहे थे.
इस कार्रवाई में अब तक करीब 80 लाख रुपये की भारी-भरकम नकदी बरामद की जा चुकी है. हालांकि, पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मंदिर के सिस्टम में सीसीटीवी फुटेज केवल 45 दिनों तक ही सुरक्षित (बैकअप) रहती है. ऐसे में यह अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा है कि यह खेल कब से चल रहा था और कुल कितने रुपयों का गबन किया जा चुका है.
चंपत राय के पूर्व ड्राइवर का नेक्सस, 8 आरोपी गिरफ्तार
इस महाघोटाले में पुलिस ने अब तक कुल आठ लोगों को सलाखों के पीछे भेजा है. गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा,अनुकल्प मिश्रा,मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं. इनमें से अनुकल्प, लवकुश,अविनाश और मनीष के ठिकानों से ही पुलिस को 80 लाख रुपये कैश मिले हैं.
इसके अलावा गिरोह के कई अन्य आरोपी भी आपस में करीबी रिश्तेदार बताए जा रहे हैं. इसी रसूख और रिश्तेदारी के दम पर इन लोगों ने मंदिर के सबसे संवेदनशील हिस्से में अपनी पैठ बनाई थी.
न फ्रिस्किंग, न वेरिफिकेशन: सिफारिश पर मिली नौकरियां
पुलिस और एसआईटी की जांच अब सिर्फ चोरी की घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था पर भी केंद्रित है जिसके तहत इन आरोपियों को अंदर एंट्री मिली. शुरुआती जांच में सामने आया है कि मंदिर में नियुक्तियां किसी मजबूत या पारदर्शी प्रक्रिया के तहत नहीं की गई थीं. ज्यादातर भर्तियां सिर्फ आपसी पहचान, प्रभाव और सिफारिशों के आधार पर कर दी गईं.
इसी बड़ी लापरवाही का फायदा उठाकर आरोपी हर दिन लाखों रुपये बाहर ले जाते रहे.
राम मंदिर में पुजारियों का नया रोस्टर जारी
चढ़ावे की चोरी के इस बड़े विवाद और गबन के आरोपों के बीच मंदिर प्रशासन ने आंतरिक व्यवस्था को सुधारने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है. राम मंदिर चढ़ावे के गबन के इस पूरे घटनाक्रम के साए में अयोध्या के राम मंदिर समेत कुल 18 संबद्ध मंदिरों में तैनात 35 पुजारियों की ड्यूटी का एक बिल्कुल नया रोस्टर (Duty Roster) लागू कर दिया गया है. इस नए आदेश के तहत रामलला के मुख्य गर्भगृह में पूजा-अर्चना करने वाले पुजारियों के क्रम को पूरी तरह बदल दिया गया है. इसके साथ ही परिसर के सभी 18 मंदिरों के पुजारियों की आपस में अदला-बदली कर दी गई है. अब मंदिर प्रशासन ने यह कड़ा नियम बनाया है कि किसी भी पुजारी को लंबे समय तक एक ही जगह तैनात नहीं रखा जाएगा, बल्कि हर 15 दिन में उनकी ड्यूटी का स्थान और क्रम बदला जाएगा.
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जांच के दायरे में बैंक अधिकारी, खंगाली जा रही हैं संपत्तियां
इस महाघोटाले की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब स्टेट बैंक के अधिकारी भी जांच के घेरे में आ गए हैं. पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या सुरक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी चूक के पीछे बैंक के किसी जिम्मेदार अधिकारी की मिलीभगत थी या फिर यह केवल लापरवाही का नतीजा था. इसके साथ ही आरोपियों के पास से बरामद दस्तावेजों और डायरियों को खंगाला जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि चोरी की गई करोड़ों की रकम से आरोपियों ने अयोध्या या उसके आसपास कोई बेनामी जमीन, मकान या दूसरी चल-अचल संपत्तियां तो नहीं खरीदी हैं. एजेंसियां अब गबन के हर संभावित रास्ते और नेक्सस का पूरी तरह पर्दाफाश करने में जुटी हैं.
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