Ethanol Cookstove Benefits: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर भारत पर भी देखने को मिल रहा है. देश में कई जगह से गैस की किल्लत की खबरें सामने आ रही हैं. कई लोगों को बुकिंग करने में दिक्कत हो रही है, तो किसी-किसी को बुकिंग के बावजूद भी गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है. साथ ही कुछ लोगों ने LPG से PNG कनेक्शन पर शिफ्ट कर लिया है. इसी बीच लोगों में एथेनॉल कुकस्टोव (Ethanol Cookstove) चर्चा का विषय बना हुआ है. फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री (एफआईपीआई) के निदेशक आरएस रवि ने बताया कि एलपीजी इक्विपमेंट रिसर्च सेंटर और विभिन्न IIT की मदद से एथनॉल से चलने वाले कूकिंग स्टोव के प्रोटोटाइप जल्द तैयार हो सकते हैं. आइए जानते हैं यह कैसे काम करेंगे और इनसे क्या फायदा होगा.
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क्या है एथेनॉल कुकस्टोव?
एथेनॉल कुकस्टोव एक ऐसा चूल्हा होता है, जो एलपीजी, केरोसिन या लकड़ी की जगह एथेनॉल जैसे अल्कोहल बेस्ड फ्यूल से चलता है. इसमें आमतौर पर बायो‑एथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता है, जो गन्ने या दूसरे पौधों से तैयार होता है. इसमें न तो गैस सिलेंडर की जरूरत होती है और न ही पाइप लाइन कनेक्शन की. ऐसे कुकटॉप को क्लीन कुकिंग टेक्नोलॉजी माना जाता है.

कैसे काम करते हैं एथेनॉल कुकस्टोव?
एथेनॉल कुकस्टोव में एक इन‑बिल्ट बर्नर या फ्यूल टैंक होता है, जिसमें एथेनॉल भरा जाता है. इसके बाद फ्यूल को हाथ से जलाया जाता है. इसके अलावा कुछ मॉडलों में एथेनॉल पहले भाप में बदलता है और फिर हवा के साथ मिलकर जलता है, जिससे जलने की क्षमता बढ़ जाती है और फ्यूल का बेहतर इस्तेमाल हो पाता है.
क्या हैं एथेनॉल कुकटॉप के फायदे?
- बेहतर डिजाइन वाले एथेनॉल चूल्हे में LPG और PNG की जरूरत नहीं होती है और इसपर खाना बनाना सस्ता-बजट में पड़ता है.
- एथेनॉल का इस्तेमाल करने से धुआं खत्म हो जाता है, जिससे घर के अंदर होने वाला वायु प्रदूषण कम होता है.
- कई एथेनॉल स्टोव मेथेनॉल पर भी चल सकते हैं, क्योंकि दोनों ईंधनों का काम करने का तरीका लगभग एक जैसा होता है.
- कुछ एथेनॉल स्टोव ऐसे भी होते हैं, जो 1 लीटर एथेनॉल से करीब 15 घंटे तक चल सकते हैं.
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