- इजरायल चाहता है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों और उसकी मिसाइल क्षमताओं को सीमित किया जाए
- इजरायल की रणनीति में ईरान को विभाजित करना और मौजूदा नेतृत्व को बदलना शामिल है ताकि उसकी ताकत कम हो सके
- अमेरिका और इजरायल ने अली खामेनेई पर हमले की योजना बनाई थी, जिससे ईरान में आंतरिक अस्थिरता फैलाने की उम्मीद थी
इजरायल के बारे में माना जाता है कि उसे उसके लक्ष्य से हटाना किसी के लिए मुमकिन नहीं. खुद अमेरिका भी उसे कुछ देर के लिए रोक सकता है, पर उसे अपने लक्ष्य से हटा नहीं सकता. ऐसा गाजा में भी देखा गया. मगर ईरान युद्ध में इजरायल डोनाल्ड ट्रंप के लगातार बदलते बयानों से डर गया है. उसे डर ये लग रहा है कि कहीं ट्रंप जल्दबाजी में युद्ध खत्म करने के लिए ईरान के साथ कोई ऐसा समझौता नहीं कर लें, जो उसके तय लक्ष्यों से इतर हो.
इजरायल के लक्ष्य क्या
- इजरायल नहीं चाहता कि ईरान के पास परमाणु बम हों. अमेरिका से ज्यादा उसे ईरान से है. कारण ईरान उसके नजदीक है और वो ईरान की मिसाइलों की रेंज में है.
- इजरायल ये भी चाहता है कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को भी समाप्त कर दिया जाए, या कम से कम ऐसा कि वो उसकी जमीन तक हमला करने में सक्षम नहीं रहे.
- इसके अलावा वो ईरान को कई भागों में बांट देना चाहता है. इजरायल को पता है कि कई भागों में ईरान के बंटने से उसकी ताकत कम हो जाएगी और प्रभाव कम.
- इजरायल की पूरी कोशिश है कि ईरान के मौजूदा नेतृत्व को या तो समाप्त कर दिया जाए या सत्ता पर किसी दूसरे को बैठा दिया जाए. उसे पता है कि खामेनेई समर्थक अगर सत्ता में रहेंगे तो उसके लिए खतरा बने रहेंगे.
- ईरान की पांचवीं सबसे बड़ी कोशिश है कि हूती, हिज्बुल्लाह जैसे ईरान के प्रॉक्सी संगठनों को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए और ये तब तक नहीं होगा जब तक खामेनेई समर्थक सत्ता से दूर नहीं हो जाते.
अमेरिका की समस्या क्या
- ऐसी कई रिपोर्ट हैं कि अमेरिका को जब पता चला कि अली खामेनेई इजरायल के टारगेट पर हैं तो उसने अरब देशों से बात कर खुद भी जंग में उतरने का फैसला कर लिया.
- ट्रंप और उनकी टीम को पूरी उम्मीद थी कि अली खामेनेई के मारे जाते ही ईरान में अफरा-तफरी का माहौल हो जाएगा और ईरान की ताकत बिखर जाएगी.
- मगर यही आकलन ट्रंप और उनकी टीम को भारी पड़ गई. अली खामेनेई और उनकी टीम को पक्का यकीन था कि अमेरिका-इजरायल हमला करेंगे.
- यही कारण है कि उन्होंने हर उस परिस्थिति का अल्टरनेट प्लान कर रखा था कि अगर खुद वो भी नहीं लेंगे तो फैसला कब कौन लेगा.
- अली खामेनेई सहित कई बड़े ईरानी अधिकारियों के शुरू में ही मारे जाने के बावजूद ईरान ने पलटवार कर अमेरिका-इजरायल को चौंका दिया.
- होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर ईरान ने अमेरिका के गले की नस दबा दी. उसे पता था कि वैसे उसे बचाने या अमेरिका को रोकने कोई नहीं आएगा, लेकिन पेट्रोल-गैस की किल्लत होते ही पूरी दुनिया अमेरिका पर दबाव डालेगी.
- और यही हुआ भी. आज अमेरिका की जनता सहित पूरी दुनिया ट्रंप पर दबाव डाल रही है कि जल्द से जल्द युद्ध को रोक दें. ट्रंप भी ऐसा ही चाहते हैं, मगर अब समस्या ये कि ईरान भी अपनी मांगें मनवाना चाह रहा है.
- ईरान चाहता है कि उसे जंग के नुकसान का मुआवजा दिया जाए और मिडिल ईस्ट से अमेरिका अपने सैन्य बेस छोड़कर हमेशा के लिए चला जाए. साथ ही वो अपने मिसाइल कार्यक्रम और सत्ता हस्तांतरण पर कुछ भी सुनने को तैयार नहीं
यही कारण है कि अमेरिका को फंसा देखकर इजरायल को डर लग रहा है. उसे लग रहा है कि ट्रंप अपने चक्कर में कहीं उसके उद्देश्यों की बलि न ले लें और ईरान से कोई कमजोर समझौता कर लें. यही कारण है कि ईरान लगातार हमले कर रहा है. उसकी कोशिश है कि समझौते से पहले वो ईरान को इतना कमजोर कर दे कि ईरान को फिर से खड़ा होने में कई वर्ष लग जाएं. आज ही इजरायल ने दावा किया है कि ईरान के नौसेना प्रमुख अलीरेजा तांगसिरी को हमले में मार गिराया गया है. द येरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार एक इजरायली अधिकारी ने गुरुवार, 26 मार्च को बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से सटे बंदर अब्बास में एक हमले में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना के प्रमुख अलीरेजा तांगसिरी की मौत हो गई है. जाहिर है, जब तक कोई समझौता नहीं होता इजरायल अपने दुश्मन की संख्या कम करने में लगा हुआ है.
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