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क्या है भू-आधार? आपके जमीन और प्लॉट का Aadhaar Card, बदलेगा रजिस्ट्री सिस्टम

भू-आधार को देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग-अलग चरणों में रोल आउट किया जा चुका है. अब सरकार ने 2026 से 2031 की के लिए DILRMP के तीसरे चरण की घोषणा की है.

क्या है भू-आधार? आपके जमीन और प्लॉट का Aadhaar Card, बदलेगा रजिस्ट्री सिस्टम
जमीन को मिलेगा यूनिक नंबर
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

केंद्र सरकार ने जमीन की रजिस्ट्री का सिस्टम बदल दिया है. अब जमीन के रिकॉर्ड को आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) 3.0 के तहत सितंबर 2026 में 'भू-आधार' यानी यूनिवर्सल ULPIN योजना की आधिकारिक दिशा निर्देश और राष्ट्रव्यापी क्रियान्वयन की शुरुआत की है. इसे चरणबद्ध तरीके से देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा रहा है. 

खास बता यह है कि भू-आधार योजना के तहत गांव से लेकर शहरों तक जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, नक्शे और रजिस्ट्रेशन की जानकारी को डिजिटल तरीके से जोड़ा जाएगा. इसका उद्देश्य है जमीन से जुड़े अलग-अलग रिकॉर्ड को GIS आधारित डिजिटल सिस्टम में लाना है. इसमें हर जमीन या प्लॉट की एक 14 अंकों वाली यूनिक नंबर की व्यवस्था की जा रही है. जिससे जमीन की पहचान रिकॉर्ड में होगी.

क्या है भू-आधार?

भू-आधार (ULPIN) जिसमें जमीन का 14 अंकों का यूनिक नंबर होगा. इसके तहत देश की हर जमीन या प्लॉट को 14 अंकों का एक विशिष्ट पहचान नंबर दिया जाता है. यानी यह जमीन का एक डिजिटल कार्ड होगा. यह नंबर इंसानों के Aadhaar Card की तरह ही जमीन की सटीक भौगोलिक स्थिति और पहचान बताएगा. सबसे बड़ी बात इससे फर्जीवाड़े पर लगाम लग सकती है. एक ही जमीन को बार-बार बेचने या फर्जी दस्तावेजों से कब्जा करने जैसी धोखाधड़ी खत्म होगी.

भू-आधार को देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग-अलग चरणों में रोल आउट किया जा चुका है. अब सरकार ने 2026 से 2031 के लिए DILRMP के तीसरे चरण की घोषणा की है. जिसके जरिए इसे देश के सभी भूखंडों पर पूरी तरह लागू किया जा रहा है. 

जमनी के रिकॉर्ड में क्या होगा बदलाव

इस योजना के जरिए राज्यों में GIS इनेबल्ड लैंड स्टैक तैयार किया जाएगा. इसमें जमीन का मैप, अधिकारियों के रिकॉर्ड और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी को जोड़ा जाएगा. पुरानी जमीन और प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन डॉक्यूमेंट को स्कैन करके डिजिटल रिकॉर्ड में सुरक्षित रूप से बदला जाएगा. रेवेन्यू कोर्ट के रिकॉर्ड को भूमि रिकॉर्ड से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जाएगा, ताकि मामलों के निपटारे में तेजी आ सके.

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