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आस्था के नाम पर ठगी! वैष्णो देवी में नकली चांदी का बड़ा खुलासा, चढ़ावे से पहले ऐसे करें असली-नकली की सही पहचान

Vaishno Devi Silver Scam: धार्मिक आस्था के नाम पर अगर किसी के साथ धोखा हो जाए, तो यह चिंता की बात है. हाल ही में वैष्णो देवी से जुड़ी एक जांच में ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसने भक्तों को चौंका दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर में चढ़ावे के लिए खरीदी जा रही चांदी में भारी मिलावट पाई गई है.

आस्था के नाम पर ठगी! वैष्णो देवी में नकली चांदी का बड़ा खुलासा, चढ़ावे से पहले ऐसे करें असली-नकली की सही पहचान
Vaishno Devi Silver Scam: असली चांदी की पहचान कैसे करें?

Vaishno Devi Silver Scam: हाल ही में देश के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक वैष्णो देवी से जुड़ी एक चौंकाने वाली खबर सामने आई. यहां भक्त श्रद्धा से चांदी के सिक्के और गहने खरीदकर चढ़ावा चढ़ाते हैं, लेकिन अब जांच में पता चला है कि इनमें से कई चीजें असली नहीं हैं. अधिक चौंकाने की बात यह है कि ये मामला सिर्फ आर्थिक धोखाधड़ी या भक्तों की श्रद्धा से जुड़ा हुआ ही नहीं है, बल्कि इससे लोगों की सेहत को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, हाल ही में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने चढ़ावे में मिली करीब 20 टन चांदी को पिघलाने और सुरक्षित रखने के लिए सरकारी मिंट को भेजा था. अनुमान था कि इसकी कीमत 500 से 550 करोड़ रुपये होगी. लेकिन जांच में जो सामने आया, वह चौंकाने वाला था. असली चांदी की कीमत सिर्फ करीब 30 करोड़ रुपये ही निकली. इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस चांदी में केवल 5 से 6 प्रतिशत ही असली चांदी थी. बाकी में कैडमियम और लोहा जैसी सस्ती धातुएं मिली हुई थीं.

लोगों की सेहत को कैसा खतरा?

जैसा की ऊपर जिक्र किया गया है, चांदी के गहनों और सिक्कों में कैडमियम पाया गया है. वहीं, आपको बता दें कि कैडमियम एक बेहद जहरीली धातु है, जो दिखने में चांदी जैसी लगती है. यही कारण है कि लोग इसे आसानी से पहचान नहीं पाते. यह कैंसर पैदा करने वाली धातु मानी जाती है और इसे पिघलाने पर जहरीला धुआं निकलता है. ऐसे में यह पर्यावरण और इंसानों दोनों के लिए हानिकारक है. इसी खतरे को देखते हुए टकसाल के कर्मचारियों ने शुरुआत में इसे पिघलाने से भी मना कर दिया था.

कहां हो रही है गड़बड़ी?

रिपोर्ट्स के अनुसार, मंदिर के आसपास की दुकानों में नकली चांदी बेचे जाने की आशंका है. श्रद्धालु वहां से चांदी खरीदते हैं और उसे चढ़ावा चढ़ा देते हैं. टकसाल को भेजे गए 70 किलो चांदी के एक बैच में से केवल 3 किलो ही असली चांदी निकली है. बाकी पूरी धातु मिलावटी थी. इस चांदी को शुद्ध करने में करीब 3 महीने का समय लगा.

नियम क्या कहते हैं?

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के नियमों के अनुसार, उपभोक्ता उत्पादों में कैडमियम के इस्तेमाल की अनुमति नहीं है. इसके बावजूद इस तरह की मिलावट गंभीर चिंता का विषय है.

असली चांदी की पहचान कैसे करें?

हॉलमार्क जरूर देखें

असली चांदी पर BIS हॉलमार्क होता है. यह उसकी शुद्धता की गारंटी देता है.

चुंबक टेस्ट करें

चांदी चुंबक से नहीं चिपकती. अगर चिपक रही है, तो समझिए मिलावट है.

रंग और चमक से पहचानें

असली चांदी की चमक हल्की और साफ होती है. नकली चांदी ज्यादा चमकदार या फीकी दिख सकती है.

बर्फ टेस्ट

आप चांदी को बर्फ पर रखकर देख सकते हैं. अगर चांदी असली है, तो बर्फ का टुकड़ा बहुत तेजी से पिघलना शुरू हो जाएगा.

भरोसेमंद जगह से खरीदें

हमेशा प्रमाणित दुकानों या ज्वेलर्स से ही खरीदारी करें, खासकर धार्मिक स्थानों पर.

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यह मामला सिर्फ एक मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें जागरूक रहने का संकेत देता है. आस्था जरूरी है, लेकिन सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है.
 

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